प्रेम: कविता
प्रेम — राम सहोदर पटेल प्रेम — श्री राम सहोदर पटेल दोहा प्रेम बनाए काम सब, प्रेमहि सुख आधार । वशीकरण यह प्रेम है , प्रेम जीवनाधार ।। चौपाई प्रेम से प्रेम बढ़े दिन दूना। प्रेम बिना यह जीवन सूना।। प्रेम प्रसंग पवित्र पियारा। प्रेम पराग मधुप पग धारा।। प्रेम पियासे सुर नर मुनि सब। प्रेमहि बसी भये खगमृग सब।। प्रेम के बसी होहि भगवंता। प्रेम में रति का बास अनंता। प्रेम से राष्ट्र अमित अखंडा। प्रेम दिलावे नहि कछु दंडा।। दंपति प्रेम कुटुंब सुधारहि। संपत्ति प्रेम शकल निस्तारहि।। कर्तव्य से प्रेम प्रतिष्ठा देई। लोगन प्रेम सुखद फल होई।। प्रेम का भूखा हर नर नारी। प्रेम से मिले महातम भारी।। दोहा जे निज स्वारथ रत रहहि, करे न कछु उपकार। ते नर पशुवत जियत हैं, पावत नहिं सत्कार ।। चौपाई प्रेम सकल रस की है खाना। प्रेमहि बसी होहि भगवाना। प्रेम अकर्षण और उजाला। प्रेम उमग उत्साह का प्याला। प्रेम दिलों दिल क...