बघेली प्रहसन - बुधिया मान गई
बघेली प्रहसन - बुधिया मान गई (इस प्रहसन में प्रयुक्त घटना एवं नाम पूरी तरह काल्पनिक हैं) पात्र-परिचय 1 . मटकू - परिवार का मुखिया उम्र-40 वर्ष 2. बुधिया - मटकू की पत्नी उम्र- 35 वर्ष 3. आश्रित - 5 बच्चे क्रमशः 12, 10, 8, 6,एवं 4 वर्ष 4. बैजू - परिवार कल्याण कार्यक्रम का प्रचारक उम्र- 40 वर्ष 5. मैकू - परिवार नियोजन करा चुका परिवार का मुखिया (संध्या का समय. मटकू अपने घर में रस्सी कांत रहा है. बुधिया रसोई की तैयारी कर रही है तभी बैजू का प्रवेश) बैजूः सुना थ हो मटकू भाई..., मटकूः हाॅं बैजू भाई...राम-राम, राम-राम। बैजूः त जना तोहांर परिवार बहुत बड़ा है, इ घरे मं बहुत लरिका बच्चा भरे हैं मटकूः हाॅं बैजू भाई, भगवान द्यात है त का करी। इ भगवान केर खेती आय।जे आय गे त आय गे। एक बच्चाः (अर्धनग्न) दादा रे, भूख लगी है। दूसरा बच्चाः (अर्धनग्न) दादा काल्ह पाॅंच रुपिया चाही। पेन खरीदैं का है। तीसरा बच्चाः दादा रे हमहीं सल्ट बनवा दे। ह-ह, ह-ह, चैथा बच्चाः ये दादा, ये दादा ह-ह, ह-ह, मटकूः चुप्प रहा रे। दुआरे मं जो कोऊ बड़ा मनई आ जाय त इनके मारे कुछ सुनै...