आत्मोन्नति की स्वर्णिम सूक्तियाॅं:रमेश पटेल
आत्मोन्नति की स्वर्णिम सूक्तियाॅं नियमित व संयमित दिनचर्या, सुखी जीवन का आधार। आत्मोन्नति की स्वर्णिम सूक्तियां करती हैं बेड़ा पार।। मन वश में और इच्छाओं को नियंत्रित करता, लक्ष्य के प्रति जो सदा अपने को सचेत रखता। लक्ष्य पाने की तुम चेष्टा करना, नहीं है सब बेकार आत्मोन्नति की स्वर्णिम सूक्तियां करती हैं बेड़ा पार। बुद्धि विवेक से सत पथ में करते काम, सदा उन्नति के पथ से मिलता है आराम। उन्नति करते हुए तुम दूसरों का कर सको उपकार, आत्मोन्नति की स्वर्णिम सूक्तियां करती हैं बेड़ा पार। सात्विक भोजन ही नियमित तुम खाओ, ब्रम्हचर्य अपना, खुशियां अपने तन लाओ। समझदारी रखते हुए और सदा बने रहें ईमानदार। आत्मोन्नति की स्वर्णिम सूक्तियां करती हैं बेड़ा पार। व्यस्त रहें, मस्त रहें, स्वास्थ्य भी बनाए रखना, बड़ों से सलाह ले सबको सम्मान देते रहना। बहादुर बनो व हर कार्यों में तुम बने रहो जिम्मेदार, आत्मोन्नति की स्वर्णिम सूक्तियां करती हैं बेड़ा पार। परिश्रमी अध्ययनशीलता व मधुरभाषी बने, आध्यात्मिक शक्ति अपना सदा विनम्र बने। जीवन मंगलमय बने और कर सके अपना उद्धार, आत्मोन्नति ...