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जनवरी, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आत्मोन्नति की स्वर्णिम सूक्तियाॅं:रमेश पटेल

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आत्मोन्नति की स्वर्णिम सूक्तियाॅं नियमित व संयमित दिनचर्या, सुखी जीवन का आधार। आत्मोन्नति की स्वर्णिम सूक्तियां करती हैं बेड़ा पार।। मन वश में और इच्छाओं को नियंत्रित करता, लक्ष्य के प्रति जो सदा अपने को सचेत रखता। लक्ष्य पाने की तुम चेष्टा करना, नहीं है सब बेकार आत्मोन्नति की स्वर्णिम सूक्तियां करती हैं बेड़ा पार। बुद्धि विवेक से सत पथ में करते काम, सदा उन्नति के पथ से मिलता है आराम। उन्नति करते हुए तुम दूसरों का कर सको उपकार, आत्मोन्नति की स्वर्णिम सूक्तियां करती हैं बेड़ा पार। सात्विक भोजन ही नियमित तुम खाओ, ब्रम्हचर्य अपना, खुशियां अपने तन लाओ। समझदारी रखते हुए और सदा बने रहें ईमानदार। आत्मोन्नति की स्वर्णिम सूक्तियां करती हैं बेड़ा पार। व्यस्त रहें, मस्त रहें, स्वास्थ्य भी बनाए रखना, बड़ों से सलाह ले सबको सम्मान देते रहना। बहादुर बनो व हर कार्यों में तुम बने रहो जिम्मेदार, आत्मोन्नति की स्वर्णिम सूक्तियां करती हैं बेड़ा पार। परिश्रमी अध्ययनशीलता व मधुरभाषी बने, आध्यात्मिक शक्ति अपना सदा विनम्र बने। जीवन मंगलमय बने और कर सके अपना उद्धार, आत्मोन्नति ...

शिक्षा का व्यवसायीकरण नहीं,राष्ट्रीयकरण हो: सुरेश यादव

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        सर्वविदित है कि  शिक्षा , स्वास्थ्य  और सुरक्षा सरकार की नैतिक  जिम्मेदारी हैं और ऐसा  अनुपार्जक कार्य  जिसमें  सरकार को तत्काल तो कोई लाभ नहीं मिलता लेकिन एक स्वस्थ , सभ्य और सुरक्षित समाज  का निर्माण होता है । प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग , निजी हाथों में जा रहा है। अलीराजपुर जिला सौंपा जा चूका है, 27 अन्य जिले जल्द ही निजी हाथों में होंगे लेकिन  नैतिक  जिम्मेदारी होने के कारण  शासन  यह तेजी से नहीं  कर  सकता , लेकिन यह सब हुआ कैसे ?  यह सब स्वास्थ्य के व्यवसायीकरण के कारण हुआ ।         पिछले  दिनों की  अखबारों की सुर्ख़ियों पर एक नजर डालें , " अलीराजपुर जिला अस्पताल प्रायवेट कंपनी के हवाले" दूसरी है , "60 प्रतिशत कमीशन के फेर में  राजधानी के स्कूल हर साल बदल देते हैं कोर्स की किताबें" तीसरी , " स्कूल फिर वसूलेंगे मोटी फीस , सरकार बैकफुट पर" और अंत में , " निजी स्कूलों में फीस वृद्धि के खिलाफ , अब सड़कों पर उतरेंगे पेरेंट्स" । इन समाचारों ...

70वीं वर्षगांठ मनाएंगे हम: सतीश कुमार सोनी

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गणतंत्र स्वतंत्र यह पर्व है भारत, सभी जनों की यही है चाहत। फिर से फक्र मनाएंगे हम, 70 वीं वर्षगांठ मनाएंगे हम।। देश प्रेम का राष्ट्र पर्व है, तिरंगे पर हमें गर्व है। बड़े शान से फहराएंगे हम, मिलकर त्यौहार बनाएंगे हम।। वीरों की यह याद दिलाता, तन-मन में है जोश जगाता। इस तिरंगे की खातिर बलि-बलि जाएंगे हम, आन-बान और शान से यह तिरंगा लहराएंगे हम।। गणतंत्र देश संविधान बना कर, सभी जनों को यह बतला कर। रहो स्वतंत्र अभिव्यक्ति करो तुम, देश हित में डटे रहो तुम।। विकसित यह राष्ट्र बनाएंगे हम, अपना परचम लहराएंगे हम। तिरंगे को विश्व पटल पर सबसे ऊंचा फहराएंगे हम।। -सतीश कुमार सोनी, जैतहरी, जिला-अनूपपुर(म.प्र.) 

हमारा गणतंत्र महान हो:सुरेन्द्र कुमार पटेल

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71 वां दिवस गणतंत्र का, हमारा गणतंत्र महान हो। विशाल व्योम-क्षितिज से, आशाओं का नव बिहान हो। वसुधा विशाल, सुधा-सिंचित कृषि की अपार संभावना। शक्ति सम्पन्न हो मूलतः धरा, पुष्पाच्छादित वृक्ष फलघना। जलराशि पूरित सर-सरित, खनिज तत्व प्रचुर है धना। उदधि से ऊर्ध्व होता मानसून, उत्तर से हिम वायु करे वंदना। संविधान-विधि पोषित गणतंत्र का, 'हम भारत के लोग' शक्ति श्रोत बने। पंथनिरपेक्ष,समाजवादी, लोकतंत्रात्मक गणराज्य में हम विविध धर्म, जाति के सने। अनंत पर्व, पंथ, वेशभूषा अनन्त, यह गणतंत्र, अनेक रीतियों की आशा। हैं अनेक श्रोत, संस्कृति मगर एक, भारतीयों की यद्यपि बोली-बहुत-भाषा। संकट हटा थाल में मिला हमें, यह गणतंत्र गांधी के स्वराज का। अवलोक लोकतंत्र है यही क्या, कल्पना गांधी-सा लोकतंत्र आज का? स्फूर्त का नवसंचार हो विकासपथ पर, बढ़ें सब साथ-साथ राष्ट्र के नवनिर्माण में। मिथक का न प्रसार हो देशहित बना रहे, उल्लास न बिखर जाए ढूढ़ने प्रमाण में। भौगोलिक सीमाओं से सीमित मात्र राष्ट्र का अवलंब है नहीं भूगोल ही। राष्ट्रवासियों के मध्य प्रेम का प्रसार...

राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रयोग में सावधानियां:सुरेन्द्र कुमार पटेल

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26 जनवरी 2020 को भारतवर्ष  अपना 71 वाँ गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है. इस दिन शासकीय और निजी संस्थाओं में समारोह का आयोजन होता है जिसमें  तिरंगा ध्वज फहराया जाता है.  राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' और राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम्' गाया जाता है. ये  तीनों ही हमारे राष्ट्रीय प्रतीक हैं जो हमारे राष्ट्र की गरिमा का बोध कराते हैं. अतः यह प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है कि वह इन प्रतीकों का इस तरह प्रयोग करे कि इन प्रतीकों के प्रयोग के दौरान जाने-अनजाने  अपमान न हो. इसके लिए यह आवश्यक है कि इन प्रतीकों के सम्बन्ध में संसद द्वारा पारित कानूनों/नियमों एवं दिशानिर्देशों की समुचित जानकारी हो. राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगा' ( अ) इतिहास- भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज को इसके वर्तमान स्‍वरूप में 22 जुलाई 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था. इसके पूर्व तिरंगे का जो स्वरूप था उसकी कहानी आँध्रप्रदेश के मछलीपत्तनम के निकट भात्लापेनुमारू के एक युवक पिंगली वेंकैया द्वारा डिजाइन किये ध्वज से प्रारम्भ होती है. इनके द्वारा विभिन्न देशों के झंडों का अध्ययन किया गया था. अ...