श्रम का स्वाद: गोलेंद्र की कविताएँ Beautiful poems on labour day
Beautiful poems on labour day 1. किसान है क्रोध ••••••••••••••••• निंदा की नज़र तेज है इच्छा के विरुद्ध भिनभिना रही हैं बाज़ार की मक्खियाँ अभिमान की आवाज़ है एक दिन स्पर्द्धा के साथ चरित्र चखती है इमली और इमरती का स्वाद द्वेष के दुकान पर और घृणा के घड़े से पीती है पानी गर्व के गिलास में ईर्ष्या अपने इब्न के लिए लेकर खड़ी है राजनीति का रस प्रतिद्वन्द्विता के पथ पर कुढ़न की खेती का किसान है क्रोध ! 2. ईर्ष्या की खेती •••••••••••••••• मिट्टी के मिठास को सोख जिद के ज़मीन पर उगी है इच्छाओं के ईख खेत में चुपचाप चेफा छिल रही है चरित्र और चुह रही है ईर्ष्या छिलके पर मक्खियाँ भिनभिना रही हैं और द्वेष देख रहा है मचान से दूर बहुत दूर चरती हुई निंदा की नीलगाय ! 3. मूर्तिकारिन ••••••••••••• राजमंदिरों के महात्माओं मौन मूर्तिकार की स्त्री हूँ समय की छेनी-हथौड़ी से स्वयं को गढ़ रही हूँ चुप्पी तोड़ रही है चिंगारी! सूरज को लगा है गरहन लालटेनों के तेल खत्म हो गए हैं चारो ओर अंधेरा है कहर रहे हैं हर शहर ...