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फ़रवरी, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आभासी दुनिया:सुरेन्द्र कुमार पटेल

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उस पवि़त्र दिवस को याद कर आज भी मस्तक विनम्रता से झुक जाता है। ईश्वरीय कृपा इस दुनिया में है या नहीं इसकी अवधारणा स्पष्ट न होने पर भी हृदय किसी अदृश्य, शाश्वत और सर्वोच्च शक्ति को याद कर कृतज्ञता के भाव से भर जाता है। उस एक दिवस ने मुझे जगत प्रसिद्व कर दिया। और तो और, जिस ‘‘सामाजिक‘‘ होने के लिए लोग न जाने किस-किसके दर ठोंकरे खाते रहते हैं घर बैठे ही मैं सामाजिक हो गया! सोशल मीडिया पर मेरा उस रोज खाता खुला था। उसके पहले तक मैं वैसे ही सर्व सभ्य समाज से अलग प्राणी समझाा जाता था जैसे आपके ही जान-पहचान में हो रहे शादी-ब्याह के कार्यक्रम में सभी को पूछा गया हो पर आपको जानबूझकर छोड़ दिया गया हो। सच कहूं तो उस रोज मेरा नया अवतार हुआ था। न जाने क्यों लोग उस रोज को हैप्पी नया अवतार नहीं मनाते! आपको विश्वास नहीं होगा, उस रोज से मैंने घर से रहा सही निकलना भी बन्द कर दिया। ऐसा क्यों? इसे आगे बताते हैं। मैंने देखा, क्यों लोग इस प्लेटफाॅर्म को सोशलमीडिया कहते हैं। इस प्लेटफार्म में लोगों के व्यवहार का पूरा हिसाब-किताब रहता है। आपने कोई पोस्ट डाला, किस-किस ने लाइक किया, कमेंट किया इसका लेखा-...

बदलाव की सोचिए:राम सहोदर पटेल

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बदले की नहीं बदलाव की सोचिए। क्षण भरके गुस्से से प्रेम भरा संबंध बिखर जाता है। गुस्सा जब तक धीमा पड़ता है तब तक संबंध सुधारने का वक़्त निकल जाता है।। बुराई पराई देखने का नहीं, बुरे व्यक्ति में अच्छाई खोजिए। दूसरों की बुराई खोजने में, स्वयं का अच्छापन चला जाता है।। बकवास करने का नहीं, काम करने की आदत डालिये। बक-झक में सुकर्म का कौशल चला जाता है, गलतियां करने की नहीं, गलतियां दूर करने की सोचिए क्षमा याचना मात्र से दुष्प्रवृत्ति में सुधार आता है।। ईर्ष्या, द्वेष, नफरत नहीं प्रेम, मैत्री, सद्भाव सोचिए। अनवरत निकटतम रहने से सदवृत्ति निखर आता है। अलग रहने की नहीं, समूह में रहने की सोचिए, सदा सहोदर भाव रखने से मन का विकार निकल जाता है।। -राम सहोदर पटेल, शिक्षक। 

राजनीति का नया पैटर्न या मुफ्तखोरी: सुरेन्द्र कुमार पटेल

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जबसे दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आए हैं तब से मुफ्तखोरी जैसे विषय पर खूब चर्चा हो रही है. लग तो ऐसा रहा है कि दिल्ली की सरकार ने सभी को निकम्मा बना दिया है और अब दिल्ली की जनता को कोई काम ही नहीं करना पड़ेगा. तभी तो जी न्यूज़ के सुधीर चौधरी यह कहते भी नहीं चूकते कि दिल्ली की जनता आलसी है. आइए इसकी पड़ताल करते हैं लोग मुफ्तखोरी पर चटखारे लेकर बात क्यों कर रहे हैं! यदि गौर करें  तो पाएंगे कि दिल्ली की  हालिया सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में ध्यान दिया है. जिसकी चर्चा सभी प्लेटफार्मों  पर होती  है. ऐसा नहीं है कि दिल्ली की सरकार ने प्राइवेट स्कूलों को बंद करवा दिया है. हाँ उसने प्राइवेट स्कूलों द्वारा उगाही जा रही मनमानी फीस पर नकेल कसने की कोशिश जरूर की है  और सरकारी स्कूलों को बेहतर स्थिति में लाने कि कोशिश की  है. इस मुद्दे पर आप स्वयं  को रखकर देखिये.  आप क्या चाहते हैं? और इस मुद्दे पर आप किन बिन्दुओं पर असहमत हैं. क्या निजी विद्यालयों द्वारा ली जा रही मनमानी फीस पर अंकुश लगाने के आप विरोधी हैं या सरकारी स्कूलों की स्थिति को बेहतर ...