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मार्च, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चलें गांव की ओर: अंजली सिंह

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चलें गांव की ओर  (वैश्विक महामारी कोरोना के विशेष संदर्भ में)                         वर्तमान परिपेक्ष में हम बात करें तो आज इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का प्रयोग शहरों की तरह गांव में भी होने लगा है। आज गांव का हर परिवार या यों कहें कि गांव में रहने वाला हर व्यक्ति सोशल मीडिया से जुड़ चुका है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। खासकर आज का युवा वर्ग इससे बिल्कुल अछूता नहीं है।              वैश्विक महामारी कोरोना के प्रभाव एवं दुष्परिणाम की जानकारी आज जितना शहर में रहने वाले व्यक्ति को है उससे कम गांव के रहवासी को  है। इसे हम उसकी एक तरह से अनभिज्ञता या जानबूझकर "आ बैल मुझे मार" जैसी बात कह सकते हैं।          आदरणीय प्रधानमंत्री जी के द्वारा 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के पश्चात 24 मार्च मंगलवार को सभी टीवी चैनलों के माध्यम से एक सप्ताह के अंदर दूसरी बार जनता को संबोधित करते हुए इस वैश्विक महामारी की ओर बड़ा संकेत किया गया था। प्रधानमंत्री ने  चैत्र नवरात्रि के...

जंग अभी जारी है: अंजली सिंह

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चाहे मुसीबत हो भारी,  जंग हमारी है जारी। घर में बैठें कुछ काम करें, समर अभी है बाकी।  नहीं रुके हैं, नहीं रुकेंगे,  चाहे हों हम एकाकी।। किसी को 'कोरोना' से नहीं है डरना, हम सभी को इससे मुकाबला है करना। इसे पैर नहीं फैलाने देना है, साफ-सफाई का संकल्प हमें लेना है।। 'सोशल डिस्टेंसिग' है सभी को रखना, सभी को यह बतालाना है। मास्क पहनना, घर में रहना और  बार-बार हाथ है  धोना।। निश्चित है यह होगा हमसे दूर  यदि आचरण हो समझदारी से युक्त। रहेंगे हम सुरक्षित, समाज भी रहे इसके चंगुल से मुक्त।। हाथ धुलाई सभी करें हम, गले नहीं मिलाएं हम। इसे मजाक में नहीं है लेना  तो सुरक्षित बच जाएंगे हम।। भीड़ में नहीं जाना है,  सभी को बचाना है। नहीं थूंकना कहीं किसी जगह , हांथ अब नहीं मिलाना है।। यह भारत विश्व गुरु है, हमसे हार सभी ने मानी है।। जब भी हम एक हुए हैं, जग ने हमारी एकता जानी है।। हम जीते हैं, हम ही  जीतेंगे, सफल किया  मार्च 22 का जनता कर्फ्यू। जब शेष है  अभी  लड़ाई,  फिर घर से हम निकलें क्यूं? ...

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के 10 वर्ष: सुरेश यादव

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शिक्षा का अधिकार अधिनियम   को 10 वर्ष पूर्ण हो गए । एक शिक्षक होने के नाते कह सकता हूँ कि -निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के अंतर्गत देश के 6 से 14 वर्ष तक के अभी बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा की सुविधा प्रदान की गई। लेकिन   लगता है नीति निर्माताओं का लक्ष्य सिर्फ छात्रों के नामांकन तक ही सीमित था , ठहराव के लिए , निःशुल्क गणवेश , मध्यान्ह भोजन एवं पाठ्यपुस्तकों की व्यस्वथा कारगर साबित नही हुए। कागजों पर छात्रों के नामांकन तो 6 से 14 वर्ष   की आयु तक निरंतर होते रहे लेकिन , बहुत बड़ी संख्या में कक्षाओं में अनुपस्थिति   चिंता का विषय रही । इ से   हम विद्यालयों में वास्तविक ठहराव नही कह सकते । कोई भी शिक्षक इस विषय पर खुल कर बात नही कर सकता क्योंकि इस कमी   केलिए शासन के नीति निर्माता शिक्षक को ही जिम्मेदार ठहरा देंगे । असल मे इस सबके   लिए क्षेत्र के भौतिक , आर्थिक एवं सांस्कृतिक कारक जिम्मेदार हैं। इन पर कार्य करना आवश्यक   है। निजी विद्यालयों की 25 % सीट वंचित वर्गों के लिये आरक्षित की गई -सतही तौर पर यह कदम ह...

आया पिशाच कोरोना:राम सहोदर पटेल

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आया पिशाच कोरोना कोरोना आया कोरोना, आया पिशाच कोरोना! भला चाहते यदि अपनी तो तुम भी इससे डरो ना... ।। शासन और प्रशासन का कहना मानो। अरे! भाई, लाॅकडाउन का पालन करो ना ... ।। बेवजह भीड़ एकत्र करना बंद करो । उत्सव, त्योहार मनाकर कोरोना को आमंत्रित  करो न।। मेरे या तेरे मरने का कोई गम नहीं। पर लाकडाउन तोड़कर समाज का मौत करो न।। सन्तुलित आहार कर, बन्द तू किबाड़ कर। अपनी जरा सी भूल से जग को तबाह करो न।। काम से फुरसत नहीं था अभी तक तू। अब घर में ही रहकर माता-पिता की सेवा करो ना ... ।। स्कूल, काॅलेज  बन्द हुए हैं तो क्या? घर भीतर ही बच्चों की शिक्षा में प्रोग्रेस करो ना ... ।। बहुत  घूमा है देश दुनिया हिल-स्टेशन। अब घर के भीतर ही रहने का आनन्द चखो ना ... ।। यदि जीवित बचोगे तो इतिहास रचोगे तुम। अभी तो इससे मुकाबला के लिए साहस रखो ना ... ।। घुटने टेक दिये सामर्थ्यवान  देशों ने भी। अपनी क्या औकात? अतः संयम तीव्र रखो ना ... ।। यदि खुशी चाहते भाई-बन्धु, मात-पिता की। तो समझो और स्वजनों को समझाए रखो ना ... ।। अभी तक शिकायत थी समय व्यस्तता की। ...

छायी कोरोना महामारी:एम.के.पटेल

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छायी जग में कोरोना महामारी, सबजन एक मीटर दूर रहा। छुआछूत से लग जाती बीमारी, सबजन एक मीटर दूर रहा।। सर्दी खांसी और बुखार, मुख्य है लक्षण जब हो लाचार। श्वसन क्रिया में परेशानी, भक्षण न कर  पाए प्राण वाचानी। प्रलय करने न पाए मानव सारी, सबजन एक मीटर दूर रहा।। अनमोल जिंन्दगी में न लगे सूरी, जब हो सर्दी खांसी दवा लो पूरी। सेनेटाइजर लगाना है जरूरी, भीड़ में न जाओ राखो सबसे दूरी। हाथ न मिलाओ मानो बात हमारी, सब जन एक मीटर दूर रहा।। जब कही से घर में तुम आओ, साबुन से हाथ-पैर, मुंह  धोओ। कपड़े बदलो, मास्क लगाओ,  अपने घर को स्वच्छ बनाओ। जन-जन में हो यह समझदारी, सबजन एक मीटर   दूर रहा।। वैज्ञानिक दवा न कर पाए तैयार, सावधानी ही हैं  अच्छा   उपचार। ताजा भोजन हो तैयार, गरम पानी से लीजिए आहार।। घर में ही रहकर दिखाओ वफादारी, सब जन एक मीटर  दूर रहा।। रचना: एम.के.पटेल, ग्राम-पुरैना, थाना-ब्यौहारी, जिला-शहडोल (मध्यप्रदेश)। [ इस ब्लॉग पर प्रकाशित रचनाएँ नियमित रूप से अपने व्हाट्सएप पर प्राप्त करने तथा ब्ल...