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दादा वल्लभ की सांसें वतन के लिये: राम सहोदर पटेल

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                                                                                                                                                     :दादा वल्लभ की सांसें  वतन के लिये: दादा वल्लभ की सांस थी वतन के लिये, उनकी हर आस थी इस वतन के लिये। जिन्दगी की कभी भी न परवाह की, पग बढ़ाया हमेशा वतन के लिये।। कभी अन्याय सहना न सीखा था वह, दया करुणा की समझो तो सागर था वह, दीन-हीनों का समझो पुजारी था वह  उनका सपना भी होता वतन के लिये।। धूर्त दुष्टों का अन्याय सहकर के भी, आंग्ल क्रूरों के कोड़ों से छिल करके भी,  बन्दी खाने में भूखा ही रहकर के भी, उनकी हर चाह होती वतन के लिये।। पड़ा दुर्भिक्ष बेहाल जनता हुई, भूख...

लौह पुरुष की ऐसी छवि:अनिल पटेल

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लौह पुरुष की ऐसी छवि,        न देखि न सोची कभी।     आवाज मे सिंह सी दहाड़ थी, हृदय मे कोमलता की पुकार थी।।     एकता का स्वरूप जो इसने रचा,   देश का मानचित्र पल भर मे बदला।।       गरीवो का सरदार था वो, दुश्मनो के लिए लोहा था वो।   आंधी की तरह वहता गया,  ज्वालामुखी सा धधकता गया। बनकर गांधी का अहिंसा का शस्त्र,  महकता गया विश्व मे कोई ब्रम्हास्त्र। इतिहास  के गलियारे खोजते है जिसे, ऐसे सरदार पटेल अब न मिलते पूरे विश्व मे।।       खंड खंड  को जोड़ जिसने,     अखंड राष्ट्र का सृजन किया। उन शिल्पी वल्लभ को सबने,  लौह पुरुष कह नमन किया।।  खेड़ा से राण  मे  रखे कदम, भर हुंकार बारदौली मे बोले। न दे लगान कि रत्ती हम,    वाणी मे थी सिंह गर्जना।     पांच सौ  पैसठ रजवाड़ो को, कूटनीति से विलय किया।। रचना:अनिल पटेल, ग्राम-पोस्ट नगनौड़ी, तहसील-जयसिंहनग र [इस ब्लॉग में रचना प्रकाशन हेतु कृपया हमें 📳 akbs980@gmail.com...

राष्ट्रीय एकता से सामाजिक एकता की ओर: जनार्दन

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राष्ट्रीय एकता से सामाजिक एकता की ओर: जनार्दन    आज हम सबने भारत वर्ष की राष्ट्रीय एकता के सूत्रधार सरदार वल्लभ भाई पटेल साहब का 145 वां जन्मदिन राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया । दोस्तों ,  जब हम लोग  एकता शब्द उच्चारित करते हैं तो मन में शक्ति का भाव ज्यादा उभरता है , किन्तु एकता शब्द  का  अर्थ   ( एक + ता = एक जैसा अर्थात  समानता) वाला भाव कितना जागता है , आप खुद से पूंछ लें।   साल दर साल हम सरदार पटेल एवम् अन्य महापुरुषों के द्वारा किए गए कार्यों को याद करते हैं और अच्छा महसूस करते हैं , फिर अपने जीवन यापन , अपने व्यवसाय एवं कार्य व्यवहार में लग जाते हैं। हमारा पूरा ध्यान इस बात में रहता है कि हम महापुरुषों के कार्यों के विषय में कितनी सटीकता से जानकारी रखते हैं , आपको क्या लगता है , किए गए कार्यों की चर्चा / उल्लेख से  देश(समाज) का उत्थान होगा ? मुझे लगता है कि देश ( समाज) की बेहतरी तब होगी , जब चर्चा उन कार्यों की हो , जो अधूरे रह गए , जिन कार्यों को पूरा करने से पहले ही महापुरुष का भौतिक जीवन पूरा हो गया है। ...

सरदार वल्लभ भाई पटेल(आलेख): भानू पटेल

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भारतरत्न लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल  पूरा नाम- वल्लभ भाई झावेरभाई पटेल जन्म- 31 अक्टूबर 1875 नडियाद (बंबई पेंसीडेंसी) मृत्यु- 15 दिसम्बर 1950 (मुम्बई) पत्नी- झाबेरवा पटेल सरदार पटेल के नाम से लोकप्रिय भारत के उपप्रधानमंत्री प्रथम (15 अगस्त 1947 से 15 दिसम्बर 1950) सरदार पटेल जी का जन्म नडियाद,गुजरात में एक लेबा पटेल (पाटीदार) जाति में हुआ था। आपके पिता का नाम झाबेरभाई एवं आपकी माता का नाम लाडवा देवी था। आप अपने माता-पिता की चैथी संतान थे। आपके तीन बड़े भाई सोमाभाई, नरसीभाई औ बिट्ठलभाई थे। आपकी शिक्षा मुख्यतः स्वाध्याय से हुई। आप लन्दन जाकर बैरिस्टर की पढ़ाई की और वापस आकर अहमदाबाद में वकालत की। महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर आप स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लिए। स्वतंत्रता आंदोलन में सरदार पटेल का सबसे पहला और बड़ा योगदान 1918 में खेड़ा संघर्ष में  हुआ। गुजरात का खेड़ा खण्ड उस समय सूखा की चपेट में था। तब किसानों ने अंगेजों से कर में छूट की मांग की। जब यह स्वीकार नहीं किया गया तब सरदार पटेल ने किसानों का नेतृत्व कर अंग्रेज सरकार को झुकने पर मजबूर किया। बारडोली सत्याग्रह भा...

भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल (कविता): मनोज कुमार चंद्रवंशी

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भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल                           (कविता)             सरदार   जी   का  जीवन  दर्शन,             हम  सबके  लिए अनुकरणीय है।             कर्मयोगी लौह पुरुष का योगदान,             सियासत की धरा में अतुलनीय है॥ सरदार   पटेल    युग  प्रवर्तक  के   सच्चे  अवतारी थे। दूर दृष्टा,   देशभक्त   मातृभूमि   के   परम   पूजारी थे॥             प्रतिभा  के बहुमुखी  सरदार पटेल,            ...

प्रियदर्शिनी इन्दिरा: राम सहोदर पटेल

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प्रियदर्शिनी इन्दिरा प्रियदर्शिनी इंदिरा प्रखर बुद्धिशाली, अद्भुत अजूबा करामात वाली। अदम्य साहसी शूरमा शेरनी की मूरत, वतन की प्रगति में रही मतवाली ॥ देशभक्ति से नस-नस तेरी रंगी थी, बचपन से तेरी शक्ति जगी थी। विलक्षण सकल कार्य होते हैं तेरे, बनाया था वानरसेना प्रबल बच्चों वाली ॥ महिला प्रथम थी जो भारत में छाई, तेरी नीति का कोई नहीं पार पाई, प्रेरक प्रकृति प्रेम निश्छल सदा ही, कूटनीतिज्ञ दूरदृष्टि भावना निराली ॥ बांग्ला को पृथक कर आजाद कीन्हा, अनाचारी पाक के दाॅंत खट्टे कीन्हा। सन् इकहत्तर का जंग जीत लीन्हा, धैर्य और साहस प्रचण्ड शक्तिवाली ॥ राजा नवाबों का प्रिवीपर्स रोका, राष्ट्रीयकरण में अधिकोषों को झोंका। भूमि की सीमा निर्धारण कराया, तू लौह महिला अथक शौर्यवाली ॥ कुशल प्रशासन से जन-मन को जीता, गरीबी उन्मूलन में तेरा पल बीता। रखती सहोदर सा नाता सभी से, उर्जस्वला थी मृदुल बोलवाली ॥ अद्भुत अजूबा करामात वाली ॥ रचनाकार: राम सहोदर पटेल, सहा. शिक्षक   शासकीय हाईस्कूल नगनौड़ी, निवास ग्राम- सनौसी थाना- ब्योहारी जिला- शहडोल (मध्यप्रदेश) [इस ब्लॉग में रचना प्रकाशन हेतु कृपया हमें 📳 akbs980@g...

सरदार जी का संक्षिप्त परिचय: राम सहोदर पटेल

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-:सरदार जी का संक्षिप्त परिचय:- बरस अठारह सौ पचहत्तर में, अक्टूबर इकतीस को जन्म लिया । अपने अद्भुत सद्भावों से, स्वातंत्र्य संग्राम को सफल किया ॥ सरदारों का सरदार था वह, निर्भय वीर महान था वह । रण कौशल था हिम्मतवाला, सेना नायक दिलदार था वह ॥ दृढता पर अविचल रह करके, भारत का नव निर्माण किया । बारडोली का वन शेरेदिल, कृषकों का उद्धार किया ॥ कुशल युद्ध संचालन कर, सरदार उपाधि को प्राप्त किया ।   अजेय प्रबल पराक्रम से, दुश्मन के छक्का छुड़ा दिया ॥ मानवीय गुणों में थे भरपूर, निज स्वारथ पर नहिं काम किया । दयाभाव अनुशासन से जिम्मेदारी का कार्य किया ॥ अपनी असाधारण बुद्धिमत्ता से, पांच सौ बासठ रियासतें भंग किया । अखंड भारत को रच डाला, नहीं किसी को तंग किया ॥ प्रेरणा दायक सद्वृत्ति से, सद्मार्ग दिखाया हम सबको । प्रखर करें उन भावों को, फर्ज सिखाता हम सबको ॥ रचनाकार : राम सहोदर पटेल, सहायक शिक्षक, शास. हाईस्कूल नगनौड़ी निवासग्राम-सनौसी, थाना-ब्योहारी जिला शहडोल (मध्यप्रदेश)  [इस ब्लॉग में रचना प्रकाशन हेतु कृपया हमें 📳 akbs980@gmail.com पर इमेल करें अथवा ✆ 8982161035 नंबर पर व्हाट्सप करें, ...

सरदार वल्लभ भाई पटेल: महान व्यक्तित्व राम सहोदर पटेल

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सरदार वल्लभ भाई पटेल: महान व्यक्तित्व राम सहोदर पटेल सरदारों का सरदार था वह, दिलदारों का दिलदार था वह। भारतीय किसानों का रक्षक, देशभक्त किरदार था वह॥ था गुजराती शेरेदिल वह, नेतृत्व कुशल सिद्धांत अटल। था सख्त मिजाज सुभट योद्धा, लौहपुरुष अवतार था वह॥ था मितभाषी, कर्मठ, जनसेवक, भारत का एकीकरण किया। प्रतिभा प्रखर नेतृत्व अटल, वीर पुरुष दमदार था वह॥ था कालजयी हिम्मत वाला, दुश्मन के होश उडाता था। किया राष्ट्र निर्माण स्वबूते, भारत का कर्णधार था वह॥ निज स्वारथ से दूर सदा रह, दीन-हीन पर दया किया। न्याय, निष्ठा, अनुशासित रह भारत हित का पतवार था वह॥ दानी था दानवीर से बढ़, पद लोलुपता का त्याग किया। दान किया था राजमुकुट का, क्योंकि गाँधी का वफादार था वह॥ कुटिल फिरंगी की कुटिल चाल को, रौंद कुशल संचालन से। रखा सहोदर रिश्ता सबसे, इसीलिए सरदार था वह॥ इसीलिए सरदार था वह॥ रचनाकार : राम सहोदर पटेल, शिक्षक, शासकीय हाईस्कूल नगनौड़ी निवासग्राम-सनौसी, थाना-ब्योहारी जिला शहडोल मध्यप्रदेश [इस ब्लॉग में रचना प्रकाशन हेतु कृपया हमें 📳 akbs980@gmail.com पर इमेल करें अथवा ✆ 8982161035 नंबर पर व्हाट्सप करें,...

जीवन और अन्तःकरण: इंजीनियर प्रदीप

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जीवन और अन्तःकरण जीवन एक जैविक घटना है, एक बायोलॉजिकल प्रोसेस है, अगर सिर्फ जीवन का मिलना ही जीना है तो मनुष्य और जानवर में कोई फर्क नहीं है क्योंकि जीवन तो उसे भी मिलता है, पर अन्तःकरण निर्मित होता है उसे बनाया जाता है अन्तःकरण उस पटल की तरह है जिस पर लिखना संभव है; जिस पर पहले से कुछ लिखा हुआ नहीं है। जीवन की शुरुआत में  अन्तःकरण शून्य होता है। लालच, घृणा, प्रेम, नफरत, काम  और क्रोध  भी अन्तःकरण नहीं हैं क्योंकि यह भाव है, एक परिणाम है, आवेग है अन्तःकरण की सतह पर बनती बिगड़ती हुई प्रतिक्रिया है । फिर अन्तःकरण क्या है? अन्तःकरण एक समझ है हर उस वस्तु को लेकर जो हमारे से होकर गुजरती है और जिसे देखकर हम उसका छाया चित्र कैद कर लेते हैं । यह सतत होने वाली प्रक्रिया है। हर समझ की नई परत हर बार हमारे मानस पर जमती चली जाती है और हमारा अन्तःकरण बनता चला जाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का अन्तःकरण अलग निर्मित हुआ है क्योंकि वस्तुओं को परखने का उसका परसेप्शन अलग था। उसे देखने का उसका नजरिया अलग था, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति एक समान दिखने पर भी भिन्न अन्तःकरण की वजह से भिन्न होते हैं ।...