दादा वल्लभ की सांसें वतन के लिये: राम सहोदर पटेल
:दादा वल्लभ की सांसें वतन के लिये: दादा वल्लभ की सांस थी वतन के लिये, उनकी हर आस थी इस वतन के लिये। जिन्दगी की कभी भी न परवाह की, पग बढ़ाया हमेशा वतन के लिये।। कभी अन्याय सहना न सीखा था वह, दया करुणा की समझो तो सागर था वह, दीन-हीनों का समझो पुजारी था वह उनका सपना भी होता वतन के लिये।। धूर्त दुष्टों का अन्याय सहकर के भी, आंग्ल क्रूरों के कोड़ों से छिल करके भी, बन्दी खाने में भूखा ही रहकर के भी, उनकी हर चाह होती वतन के लिये।। पड़ा दुर्भिक्ष बेहाल जनता हुई, भूख...