संदेश

शिक्षक दिवस पर शिक्षक के सम्मान में

शिक्षक दिवस पर शिक्षक के सम्मान में ज्ञान का दान करे शिक्षक, सिख देत समाज सुधार करे। अज्ञान तिमिर सब दूर करे, बन ज्ञान का दीप प्रकाश करे॥ दे अक्षर ज्ञान अक्षय करके, आस्तित्व असीम आकार करे। हर काम आसान करे जग का, जन जीवन भव्य श्रंगार करे॥ निज जीवन काहि जलाय सदा, जन-मानस काहि प्रकाश करे। सत्य सुमार्ग सिखाय सबहि, सदबुद्धि समर्थ सुधार करे॥ बन्द कपाट कपाल को खोल के, शिष्य का कार्य आसान करे। बिन गुरु न विद्या बुद्धि मिले, वह जीवन मार्ग प्रशस्त करे॥ गुरु ज्ञान बिना सन्मार्ग मिले नहि, जीवन बेड़ा पार करे। विद्या के मंदिर ज्ञान बंटे, तिन महि गुरु भगवान रहे॥ पितु-मातु से बढ़कर मान धरे गुरु, न्याय का मार्ग दिखाय रहे। सम्मान के काम करे शिक्षक, कर्तव्य करे कर्मट्ठ रहे॥ सत्य व न्याय का मार्ग धरे नित,बन प्रेरक नव निर्माण करे। समाज सुधार सदा करके, सिख शीष के साया अशीष धरे॥ कर्तव्य हमारा बने इतना, गुरुदेव का शुक्रगुजार करें। सम्मान करें शिक्षक दिन को, निज जीवन का उद्धार करें॥ सम्मान करे इनका हरदम, जिन जी...

थैंक्यू टीचर

“थैंक्यू टीचर” तुम्हारे नाम की पूजा, मैं हरदम दिल से करता हूँ। दिया जो ज्ञान का रोशन, सो थैंक्यू तेरा करता हूँ॥ हे शिक्षक शिक्षा देने की कृपा, मुझ पर दिखाई जो। इसी से जीवन की कला में, मैं जान भरता हूँ॥ मैं थैंक्यू-थैंक्यू कहता हूँ, सदा धन्यवाद करता हूँ। दिया भंडार बुद्धि का, सो साधुवाद करता हूँ॥ अंधेरे-अंध ख्वाबों के, अनैतिक अंध नीतों से। जगाया ज्योति दर्शन दे, सभी अहशान करता हूँ॥ करूँ धन्यवाद मैं तेरा,या साधुवाद जी भरकर। सँवारा साज-सुख-साहस, सरस सब भोग करता हूँ॥ जन्म जननी जगत् में दे, जिताती जंग सारा है। सकल जीवन सुधारा, ज्ञान डाला तेरा ही स्वास भरता हूँ। कृपा की दृष्टि यदि तुम्हरी,न होती तो विकल रहता। पड़ा शोषक के शोषण में,सताया जाता रहता हूँ॥ मैं थैंक्यू कहता हूँ कि शिक्षक, शिखर की सीख दीन्ही है। जो खाते ठोकरें शिक्षा बिना,उन्हें मैं याद करता हूँ॥ अकल के उल्लू बने बैठे, शरण शिक्षक न पाया जो। बिताते पशु सा जीवन है,उन्हें भी याद करता हूँ।। ✦ ✦ ✦ तिमिर अज्ञान से निकला, ज...

पावन पर्व रक्षाबंधन

✨ पावन पर्व ✨ रक्षाबन्धन 🌸 रेशम के धागों का कीमत, कोई आंक नहीं पाता। इसका कीमत वह रिश्ता है, जिसको कोई फांक नहीं पाता॥ भइया-बहना का पावन पर्व, बड़ा अनूठा प्यार है। बहना के खुशियों का संगम, 'भाई ही आधार' है॥ रोली अक्षत दे माथे पर, जब सजी मिठाई की थाली। राखी कलाई पर बंधते ही, खिल उठती आंगन की डाली॥ राखी भइया की ताकत है, बहना की रक्षा करने का। है स्नेह सूत्र-स्नेह मिलन, बचपन के खटास बिसरने का॥ दोनों ही जितनी दूरी हों, रिश्ते कभी नहीं कमते। रेशमी डोर के बंधन से, समय के साथ नहीं थमते॥ मुश्किल चाहे जो भी आये, भ्राता ही साथ निभाता है। इस एक प्रेम के धागे से, रिश्ता गहरा हो जाता है॥ गौरव बढ़ जाता भाई का, बहना पर वारी जाता है। आपद काल सुरक्षा ...

रक्षाबन्धन- श्री रामसहोदर पटेल

✨ 🪢 ✨ — रक्षाबन्धन — आया राखी का त्योहार, छाया खुशियाँ बेशुमार। भ्राता भगिनी का त्योहार, निभाना रिश्ता बारम्बार॥ जाति धर्म से परे यह उत्सव, रस्म-रिवाज अनुकूल। भ्रात-भगिन का प्यार उमड़ता, रहे उभय समतूल॥ बना ये रक्षा-सूत्र आधार, निभाना रिश्ता बारम्बार।। बहना बाँधे प्रेम का धागा, भइया की भवि रक्षित हो॥ मनोकामना उज्जवलता की, जीवन सदा सुरक्षित हो। मिले सुख-चैन सदा भरमार, निभाना रिश्ता बारम्बार॥ भ्राता फिर गौरवान्वित हो, बहना पर बलि-बलि जाता है। सुख-शांति सुरक्षा के खातिर, संकल्प-शपथ खा जाता है॥ इसी मतलब का ये त्योहार, निभाना रिश्ता बारम्बार॥ यह मामूली सूत्र नहीं, अटूट प्रेम का बंधन है। अनमोल सूत्र स्नेह भरा, कहलाता रक्षाबंधन है। प्रगाढ़ सम्बन्ध भरा त्योहार, निभाना रिश्ता बारम्बा...

लड़ाकू महिला का हृदयपरिवर्तन: श्री रामसहोदर पटेल

लड़ाकू महिला का हृदयपरिवर्तन रामपुर नामक गाँव में एक फुलझड़ी नाम की महिला थी। नाम के अनुसार उसके मुख से फूल से सुन्दर वाणी झड़नी चाहिए लेकिन नाम के विपरीत उसका स्वभाव था। वह जरा सी बात में गुस्सा करती और जो भी महिला पुरुष सामने मिल जाय वह छोटे-बड़े का ध्यान दिये बिना बेतहाशा लड़ती। जब वह लड़ने लगती तब शब्दों के सारे सीमा लाघ जाती थी। उसके जेहन में गालियों की इतनी विशाल शब्दकोष थी जो कभी खत्म ही नहीं होती थी। सुबह से गाली-गलौज शुरू करती तो शाम हो जाती किन्तु वह न तो थकती और न ही उसके गालियों के भण्डार खत्म होते थे। गनीमत थी कि वह किसी को भी नहीं छोड़ती थी, सभी से बराबर लड़ती रहती थी। बिना लड़े उसका भोजन ही हजम नहीं होता था। सारे गाँव के लोग फुलझड़ी से त्रस्त हो चुके थे। जो भी सामने से गुजरता उससे बेवजह लड़ाई छेड़ लेती, समय बर्बाद कर देती, काम नुकसान कर देती। कोई भी उससे बचकर अपने काम में नहीं जा पाता था। एक दिन गाँव के भले लोगों ने आपस में मशविरा किया कि गाँव की पंचायत बुलायी जाय और फुलझड़ी को भी उस पंचायत में बुलाकर कोई निर्णय लिया जाय जिससे इसके लड़ाई से छुटकारा मिले।...

एक समझ : श्री राम सहोदर पटेल

— एक समझ — दिनांक: 15/10/2022 समझदारों की समझ जब, समझ से बेसमझ हो जाती है॥ मानो तब तो समाज का, जनाज़ा ही निकल जाती है। समझ तेरे को देख लगा, ज्यों नासमझों का ही राज है॥ तुम्हारे रुतबे से यों लगा, जहांन का तू ही सरताज है। करते प्रार्थना निज देश-जाति में बलिदान होने का। मौका तलाशते समाज की किडनी निकाल लेने का॥ शेखी बघारते-बघारते तुम, मर्यादा ही डकार बैठे। समाज को कुछ दिया तो नहीं, उलटे झोली ही फाड़ बैठे॥ अरे! स्वयं को समझदार कहने वाला मूर्ख ही होता है। बुजुर्गों का अपमान करने वाला, कोई धूर्त ही होता है॥ अपने को सुयोग्य कहने वाला, द्वापर का कंस था। जिसने पिता की गद्दी छीन, दिया जेल का डंस था॥ अपना उल्लू साधने वालों, जरा भी तो समझो। जिसको तुम अपमानित करते, वही असली हंस था॥ यह अहंकार तुम्हारा, कब तक साथ देगा तुझे। एक दिन समझ आयेगी कि, तुममें न समझदारी का अंश था॥ समझदार वह ...
॥ दगाबाजों से सावधान ॥ चौपाई जब बारी ही फसल उजारे। कर दीजै तब उसे किनारे॥ विश्वासघात अंगरखा होई। ताही दूर राखे हित होई॥ मित्र करे जो घात पिछारी। ताहि न नियर रखो दिन चारी॥ समझ बूझकर मित्र बनाबहु। ज्यों बाजार में माल पटाबहु॥ सखा रहत सुख-दुख को साथी। ज्यों रवि तिमिर हरे परमार्थी॥ कपट कुचली होय पड़ोसी। रहहु सजग जो अवसर पोसी॥ कबहु न बैर करब काहू से। बैर किये बल घट बाहू से॥ निर्मल मन राखहु सब ही सो। निश्छल प्रेम राख रब ही सो॥ दोहा तन मन निर्मल राखकर, श्रेष्ठ आचरण धार। मधुरी वाणी बांटकर, सबहि जनाबहु प्यार॥ चौपाई झूठ कपट जो लेय सहारा। ताहि न जीवन में भिनसारा॥ मान घटे अपयश है बाढे़। बाह्य आडंबर यदि पग धारे॥ बात बनाबटि काम दिखाबा। ते नर मानव जनम नशावा॥ विश्वास किये विश्वास पनपता। बिन विश्वास न मिले सफलता॥ भाई चारा राखहु सबसो। यदि चाहत उजियारा तम सो॥ जिन मुख दुग्ध कुंभ विष होई। तिन सो दूर रहे सुख होई॥ ...