प्रकृति (कविता) : शोभा तिवारी 'समीक्षा'
शीर्षक - प्रकृति (कविता) प्रकृति के ये नजारे कितने सुंदर कितने प्यारे , नौका मे करूँ विहार कभी इस आर कभी उस पार, नीले गगन तले चले ठंडी -ठंडी पवन, देख कर दृश्य यह भाव विभोर हो रहा मन । नदियॉ रहती अपनी धुन में आसमान नीला - नीला खुबसूरत इन वादियों में पक्षी उड़ते मस्तमौला मन करता हैं मै भी पक्षी बन उड़ जाऊँ छू लूँ जाके गगन हवा के साथ लहराऊँ । सुबह का सूरज उगता जैसे नयी प्रेरणा लाये उठो , ज...