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थैंक्यू टीचर

“थैंक्यू टीचर” तुम्हारे नाम की पूजा, मैं हरदम दिल से करता हूँ। दिया जो ज्ञान का रोशन, सो थैंक्यू तेरा करता हूँ॥ हे शिक्षक शिक्षा देने की कृपा, मुझ पर दिखाई जो। इसी से जीवन की कला में, मैं जान भरता हूँ॥ मैं थैंक्यू-थैंक्यू कहता हूँ, सदा धन्यवाद करता हूँ। दिया भंडार बुद्धि का, सो साधुवाद करता हूँ॥ अंधेरे-अंध ख्वाबों के, अनैतिक अंध नीतों से। जगाया ज्योति दर्शन दे, सभी अहशान करता हूँ॥ करूँ धन्यवाद मैं तेरा,या साधुवाद जी भरकर। सँवारा साज-सुख-साहस, सरस सब भोग करता हूँ॥ जन्म जननी जगत् में दे, जिताती जंग सारा है। सकल जीवन सुधारा, ज्ञान डाला तेरा ही स्वास भरता हूँ। कृपा की दृष्टि यदि तुम्हरी,न होती तो विकल रहता। पड़ा शोषक के शोषण में,सताया जाता रहता हूँ॥ मैं थैंक्यू कहता हूँ कि शिक्षक, शिखर की सीख दीन्ही है। जो खाते ठोकरें शिक्षा बिना,उन्हें मैं याद करता हूँ॥ अकल के उल्लू बने बैठे, शरण शिक्षक न पाया जो। बिताते पशु सा जीवन है,उन्हें भी याद करता हूँ।। ✦ ✦ ✦ तिमिर अज्ञान से निकला, ज...