शनिवार, जनवरी 10, 2026

दो कविताएं

🇮🇳 देश भक्ति गीत 🇮🇳

बर्बादी हम अपने देश की, नहीं देख सकते तनिकाय।
जो भी इस पर आंख उठाये, उसकी आंख निकालूं जाय।।
जिसका दाना हम हैं खाते, उस जन्म भूमि से प्रेम लगाय।
करेंगे रक्षा तन-मन-धन से, चाहे जान रहे या जाय।।
महाकाल से भी लड़ने को, हम नहीं कभी पिछाड़ी जाय।
हम उन पुरखों के बेटे हैं, बलिदान दिए जो मन हर्षाय।।
छोटा हमको मत समझे कोई, मेरी बात सुनो चितलाय।
अग्निपुंज के हम अंगारे, क्षण में दुश्मन दउं जलाय।।
भारत मां ने पालन करके, हमको ऐसा दिओ बनाय।
युद्ध भूमि में हम अड़ जाएं, तो शत्रु का लगे ठिकाना नाय।।
प्राण से बढ़कर है यह भारत, जननी बात कही समझाय।
कहे सहोदर भारत माता, पाला हमको ध्यान लगाय।।

🌿 दुर्जन इंसान 🌿

साधु असाधु कहावत हैं,
जब चले कुमारग आन बिसारिके।
शान बनावन चाहत रे नर,
पर कैसे बने सत्संग बिगारिके।।
बुद्धि विवेक ना काम करें,
नहिं मान बचे भय जन बल धन के।
संत समाज ना नीक लगे,

जब राह चले असमाजिकता के।।
मैत्री भाव बुरो लागत है,
मन भावत है अभिमानन के।
नभ देख चलैं न नवैं कतहू,
अकड़ाय जपत अभिमानन के।।
बात करत न बनै इनसे,
जिन दुर्जन वृत्ति विकाय मना के।
दूरहि ते टकरावन चाहत,
चलन पड़त निज मान बचाय के।।
हित बात लगे विपरीत इन्हें,
उल्टा करैं बात बड़ाय बड़ा के।
ज्यों पाहन पतित बान नहिं लागत,
उल्टे सर नोकहिं देत नशाय के।।
इनकी यदि स्वारथ सिद्धि हुई नहिं,
तो अभियान करत बड़ कोप दिखाय के।
विषधर अनुरूप स्वभाव सदा,
रहियो इनसे निज जान बचाय के।।
बचकर रहिए इनसे हरदम,
संगत इनकी नहिं जाहु जनाय के।
भाव सहोदर सम रखियो,
चलियो निज राह बनाय बनाय के।।

✍️ राम सहोदर पटेल, "शिक्षक"
हाई स्कूल नगनौडी संकुल
आमडीह, जिला शहडोल।

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