जिसकी मनमोहक सुबह, और सुहावनी शाम है।
विश्वगुरु, यशवान, सूरज-सा — भारत मेरा महान है।
विश्व-प्रसिद्ध नाम इसका, पौरुष बनी पहचान है।
सांस्कृतिक हो या प्राकृतिक, प्रत्येक क्षेत्र में ज्ञान है।
आर्यावर्त है नाम पुरातन, विश्व-विदित सम्मान है।
दुष्यंतपुत्र भरत से भारत, नामकरण सरनाम है।
रहा अग्रणी युग-युगों से यह, सभी करें गुणगान है।
ऊँचा गौरव, इतिहास अग्रणी — किया जगत कल्याण है।
अवतार विधाता लेकर इसको, दिया विजय वरदान है।
शत्रु न टिकता इसके आगे, दुर्जेय पराक्रमी महान है।
महान उद्यमी, उन्नत विचारक — कृषि में यह प्रधान है।
नव-तकनीकी हरित क्रांति से, सजा खेत-खलिहान है।
विभिन्न संस्कृतियाँ होने पर भी, एक ही नियम-विधान है।
किए कुशासन मुगल-फिरंगी, फिर भी दिया सम्मान है।
स्वागत में हम आगे हरदम, कभी न किया अपमान है।
कला, शिल्प, संगीत, नृत्य में — सदा शिखर पर नाम है।
समान नियम-कानून है अपना, बना एक संविधान है।
सबको है अधिकार बराबर, कर्तव्य में सभी समान हैं।
धर्म है ऐच्छिक — जो भी माने, जिसका जिस पर ध्यान है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भी, भारत का स्थान है।
कंप्यूटर उपलब्धियों में आगे, मिला इसे पहचान है।
तीव्र अग्रणी काम हो रहे, डिजिटल अब अरमान है।
शिर पर मुकुट हिमालय बनकर, होता शोभामान है।
बहे शुद्ध निर्मल जल नदियाँ, फैले खेत-खलिहान हैं।
अदम्य साहसी नेता सुभाष ने, दिया अभय वरदान है।
किया स्वतंत्र, अखंड बनाया — सरदार पटेल महान हैं।
राष्ट्रभाषा हिंदी है इसकी, माने कोटि संतान हैं।
‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रगीत और ‘जन-गण-मन’ ही गान है।
जानो, पक्षी मयूर राष्ट्र का, पशु बाघ बलवान है।
राष्ट्रीय चिन्ह अशोक चक्र, तिरंगा ध्वज सम्मान है।
जितना लिखूँ उतना ही कम है, है मुश्किल गौरव-गान है।
मेहनत, लगन, वफादारी से, यह पाया गौरवमान है।
धरती इसकी सोना उगले, करें पेड़ फलदान हैं।
सहोदर सिंधु चरण पखारे, पसरे सौख्य-निधान है।।
*रचनाकार*
राम सहोदर पटेल, "शिक्षक", हाई स्कूल नगनौडी।
संकुल -आमडीह, जिला शहडोल मध्यप्रदेश।

1 टिप्पणी:
अच्छी पंक्तियाँ 🙏
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