रविवार, जनवरी 11, 2026

कविता: गणतंत्र दिवस

★ गणतंत्र दिवस ★


गणतंत्र दिवस की शुभ वेला में,
मैं तुम्हें बधाई देता हूं ।
यह अमूल्य समय जो दिया आपने,
धन्यवाद इसी पर देता हूं ।।

प्रेम मिलन का है यह दिन,
खुशियां बांटो सब मिलकर के ।
गणराज्य स्वराज को प्राप्त हुआ,
इस दिन को पूजो मन धोकर के ।।

स्वाधीन हुए हम पन्द्रह अगस्त को,
लेकिन अधिकार मिला इस दिन ।
संविधान बना कर भीमराव ने,
जनता के दूर किये दुर्दिन ।।

हमको यह खुशियां देने को,
कितने जाने बर्बाद हुए ।
पता नहीं यह हमको है,
कि कैसे हम आबाद हुए ।।

नि:स्वार्थ भाव थे उन पुरखों के,
प्रण अपना उनने पूर्ण किया ।
हमरे ही खुशियों के खातिर,
अपना सब कुछ होम दिया ।।

कर्तव्य हमारा अब क्या है,
कि उनका बोझ संभाले हम।
गणतंत्र कभी परतंत्र ना हो,
सौगंध आज ही खालें हम ।।

निज स्वारथ से ऊपर उठकर,
उपकार भाव दिखलाएं हम ।
सहयोग भाव को जागृत कर,
सभ्य समाज बनाए हम ।।

परनिंदा से दूर रहे,
अपने को छोटा ही समझे ।
बड़ाई अपना जो खुद करता,
उसको नीचा ही समझे ।।

बड़ा वही माना जाता,
उपकार पराया जो करता ।
दूसरों की प्रशंसा प्राप्त करें,
व्यवहार नम्रता का करता ।।

पर चिंता की बात है यह,
गणतंत्र का अर्थ न माने कोई ।
मौका समझते भाषण बाजी का,
योग्यता बखाने हर कोई ।।

करें पराया पर्दाफाश,
अवसर अच्छा पावे इस दिन ।
बाकपटुता की होड़ लगाने का,
इच्छा जगती है इस दिन ।।

प्रभाव जमाये जनता पर,
जनसेवा का है ख्याल नहीं ।
रखो सहोदर रिश्ता सबसे,
क्या राष्ट्र भाव का ध्यान नहीं ।।
क्या राष्ट्र भाव का ध्यान नहीं ।।


✍️ कलमकार
राम सहोदर पटेल, शिक्षक
हाई स्कूल नगनौडी, संकुल - आमडीह
जिला शहडोल, मध्यप्रदेश

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