कर उनकी जय-जयकार कलम तूं
कर उनकी जय-जयकार कलम तू,
सरहद पर जान गमाते जो।
जो मात्र भूमि के सच्चे सपूत हैं,
निज भाल से थाल सजाते जो।
अचल अथक कर्तव्य मार्ग पर,
हमरे सुख के खातिर जो।
अदम्य सुरमा भटमानी है,
रहते निडर मुखातिर जो।
बीवी बच्चों का मोह त्याग कर,
मातृधरणि से मोहे जो।
भारत माता का कर्ज चुकाने,
अनिमेष दृष्टि खल जोहे जो।
हे कलम, दुहाई उनको दे तू,
अग्रिम कतार में रहते जो।
आन, मान, सम्मान बचाने,
है क्षुधा-पिपासा सहते जो।
बलिदान हुए सीमा रक्षण में,
खल दल है मार गिराए जो।
माता के अखंड सुरक्षा हित,
दुश्मन की नींद उड़ाते जो।
कर उनकी जय-जयकार कलम तू,
पर स्वार्थ में स्वाहुति देते जो।
निज प्राण हथेली पर रखकर,
हमको हैं रक्षित करते जो।
विकट विपत्ति, काल, कलह पर,
निर्भय सेवा देते जो।
कहे सहोदर, वे कर्मवीर बन,
जन्मभूमि हित जीते जो।
कर उनकी जय-जयकार कलम तू,
देश भक्ति हित जीते जो।
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