मंगलवार, जून 30, 2020

कुदरत का करिश्मा: बी एस कुशराम


रचनाकार--- बी एस कुशराम बड़ी तुम्मी
शहर--- अनूपपुर (मध्य प्रदेश)
दिनांक--- 30 जून 2020
दिन--- मंगलवार
विषय--- कुदरत का करिश्मा
विधा--- कविता
     🙏 कुदरत का करिश्मा🙏
वरदान है मानव के लिए,देखो करिश्मा कुदरत का।
अभिशाप भी है जग के लिए,ये तो करिश्मा कुदरत का।।
   अस्तित्व को बचाए रखें, वरदान साबित होगा,
   गर करोगे छेड़छाड़,अभिशाप होगा कुदरत का।
   वरदान है मानव के लिए----------

पूजा करें कुदरत का, यश गान करें शोहरत का,
फल मिलेगा पक्ष में, मौका न होगा शिकायत का।
वरदान है मानव के लिए-----------
   हम ऐसा करें उपक्रम, पर्यावरण सुधारें हम,
   समाज देश उन्नत करें, विकास हो भारत का।
   वरदान है मानव के लिए---------
प्रकृति से न करें खिलवाड़, प्रगति का लगाके आड़,
   
   असर विपरीत पड़ेगा, एहसान मानो कुदरत का।
   अभिशाप भी है जग लिए----------
    बिन मांगे सब कुछ देता, हमसे कुछ भी नहीं लेता,
   संरक्षण व संवर्धन करें, सम्मान करें कुदरत का।
   वरदान है मानव के लिए-----------
कुशराम का है ये कथन, वृक्ष लगाएं सभी जन,
कुदरत ही से जीवन है, समझो करिश्मा कुदरत का।
वरदान है मानव के लिए,देखो करिश्मा कुदरत का।।
अभिशाप भी है जग के लिए, ये तो करिश्मा कुदरत का।।
            सधन्यवाद
बी. एस. कुशराम बड़ी तुम्मी,
जिला अनूपपुर (मध्यम प्रदेश)

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