बीबी को झोला पकड़ाया तो वह झल्ला पड़ी। झोले में कुछ पन्ने थे पर उसे झोला खाली लगा। कहने लगी पूरा झोलाभर नोट ले गए थे, कहाँ उड़ा आए । मैंने समझाने की पूरी कोशिश की-तुम झोला तो देखो झोलाभर रुपयों का हिसाब है। उसने झोला देखा नहीं, झपट कर दूर फेंक दिया। मैंने ही जतन किए। एक हाथ में झोला पकड़ा और दूसरे में उसका हाथ। उसमें से एकतरफ छपा हुआ कागज का एक पन्ना निकाला और उसकी आँखों के निकट ले जाकर कहा-यह देख, यह है झोलाभर रुपयों का हिसाब। उसने कागज को उल्टाया-पलटाया, बोली इसमें कहाँ है हिसाब? मैंने कागज के बीचों-बीच लिखे शब्द को पढ़वाया-ले इसे पढ़, क्या लिखा है-"ट्रांसफर आदेश" बीबी समझ गयी झोलाभर रुपयों का हिसाब।
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
॥ दगाबाजों से सावधान ॥ चौपाई जब बारी ही फसल उजारे। कर दीजै तब उसे किनारे॥ विश्वासघात अंगरखा होई। त...
-
राही लौट जा इस राह से बाग में जो फूल खिले थे। अब वह फूल नहीं हैं। मिलने की आस थी जिनकी अब वही मीत नहीं हैं। राही लौट जा इस रा...
-
कौन कहता है नहीं बदले हैं हम। सादगी छोड़कर विलासिता में डूबे हैं हम। नए नए अविष्कार करके बहुत आगे हैं हम। वह दौर और था जब, पी...
-
हाय! मजदूर की भारी दुर्दशा, धरती न अम्बर में घर बसा । तन, वस्त्र पसीने से भींगे जब होती भारी गर्मी, काम नहीं छोड़ते, चाहे ठंडी मे...
-
मैं सड़क हूँ. मैं खराब सड़क हूँ. मेरी महानता मानिए कि लोगों को उनके घरों तक पहुँचाती हूँ. जरा सोचिए, अगर मैं चलती होती तो क्या...
-
" मुक्ति का मार्ग शिक्षा" शिक्षा है कल्पवृक्ष , शिक्षा सागर मंथन का सार। शिक्षा से है मुक्ति मार्ग , शिक्षा है ...
-
पर्यावरण पर कुछ दोहे: सांसारिक रचना सभी , युक्त संगत ही होय। ये रचना तेरे लिए , कर उपभोग संजोय॥ धरती के उपमान सब , करे भलाई त...
-
शिक्षा का उद्देश्य शिक्षा उस कल्पवृक्ष की भांति है जो जीवान्त तक मनवांछित फल प्रदान करता रहता है। शिक्षा से जीवन की सारी मनोकामनाएं सम्पू...
-
1. हाइकु:-पिताजी संबंधित ******************* पेड़ की छाया उसके फल-फूल होते हैं पिता। धूप में छांंव गागर में सागर होते हैं पिता। ...
-
स्वाभिमान से अत्याचारी, नहीं होंगे ये वचन हमारी। तुम एक दाता;जगत भिखारी, एक खुदा की एक पुजारी। कुटुम्ब कबीला ताना मारे, और क्या त...
-
श्रमिक की अंतर्व्यथा हौसला बुलंद कर , निकले थे हम गाँव से। काफिला निकलक , आग बरसाती छाँव से। बहुत गुरुर था इन लम्बे सडको को , ...

2 टिप्पणियां:
ट्रांसफर के नाम पर हो रहे भ्रस्टाचार पर नाटकीय शैली में किया गया कटाक्ष हमारे व्यवस्था चित्रण करता है। बहुत सुंदर लेख।
Er.Pradeip ji, बहुत-बहुत आभार आपका।
एक टिप्पणी भेजें