बीबी को झोला पकड़ाया तो वह झल्ला पड़ी। झोले में कुछ पन्ने थे पर उसे झोला खाली लगा। कहने लगी पूरा झोलाभर नोट ले गए थे, कहाँ उड़ा आए । मैंने समझाने की पूरी कोशिश की-तुम झोला तो देखो झोलाभर रुपयों का हिसाब है। उसने झोला देखा नहीं, झपट कर दूर फेंक दिया। मैंने ही जतन किए। एक हाथ में झोला पकड़ा और दूसरे में उसका हाथ। उसमें से एकतरफ छपा हुआ कागज का एक पन्ना निकाला और उसकी आँखों के निकट ले जाकर कहा-यह देख, यह है झोलाभर रुपयों का हिसाब। उसने कागज को उल्टाया-पलटाया, बोली इसमें कहाँ है हिसाब? मैंने कागज के बीचों-बीच लिखे शब्द को पढ़वाया-ले इसे पढ़, क्या लिखा है-"ट्रांसफर आदेश" बीबी समझ गयी झोलाभर रुपयों का हिसाब।
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2 टिप्पणियां:
ट्रांसफर के नाम पर हो रहे भ्रस्टाचार पर नाटकीय शैली में किया गया कटाक्ष हमारे व्यवस्था चित्रण करता है। बहुत सुंदर लेख।
Er.Pradeip ji, बहुत-बहुत आभार आपका।
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