रक्षाबंधन: अविनाश सिंह

रक्षाबंधन

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राखी के बंधन में बंध कर
भाई खूब है इठलाता
बहिन तेरी मैं रक्षा करूंगा
वचन यही है दोहराता।
भाई बहिन के सम्बंध में
आई है आज बहार
राखी के धागों में बंधु
होता बहिन का प्यार।
इन धागों पर न्योछावर 
खुशियां कई हजार
बाँध के धागा प्रेम का
मनाये हर वर्ष हर बार।

अविनाश सिंह
8010017450
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टिप्पणियाँ

बेनामी ने कहा…
उत्कृष्ट रचना

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