पावन पर्व रक्षाबंधन
रक्षाबन्धन
रेशम के धागों का कीमत, कोई आंक नहीं पाता।
इसका कीमत वह रिश्ता है, जिसको कोई फांक नहीं पाता॥
भइया-बहना का पावन पर्व, बड़ा अनूठा प्यार है।
बहना के खुशियों का संगम, 'भाई ही आधार' है॥
रोली अक्षत दे माथे पर, जब सजी मिठाई की थाली।
राखी कलाई पर बंधते ही, खिल उठती आंगन की डाली॥
राखी भइया की ताकत है, बहना की रक्षा करने का।
है स्नेह सूत्र-स्नेह मिलन, बचपन के खटास बिसरने का॥
दोनों ही जितनी दूरी हों, रिश्ते कभी नहीं कमते।
रेशमी डोर के बंधन से, समय के साथ नहीं थमते॥
मुश्किल चाहे जो भी आये, भ्राता ही साथ निभाता है।
इस एक प्रेम के धागे से, रिश्ता गहरा हो जाता है॥
गौरव बढ़ जाता भाई का, बहना पर वारी जाता है।
आपद काल सुरक्षा हित, संकल्प शपथ खा जाता है॥
प्यार, त्याग, विश्वास का, यह पर्व पवित्र कहलाता है।
सहोदर शीतलता चांद सम, रक्षाबन्धन मन भाता है॥
टिप्पणियाँ