रक्षाबन्धन- श्री रामसहोदर पटेल

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— रक्षाबन्धन —

आया राखी का त्योहार, छाया खुशियाँ बेशुमार।
भ्राता भगिनी का त्योहार, निभाना रिश्ता बारम्बार॥

जाति धर्म से परे यह उत्सव, रस्म-रिवाज अनुकूल।
भ्रात-भगिन का प्यार उमड़ता, रहे उभय समतूल॥
बना ये रक्षा-सूत्र आधार, निभाना रिश्ता बारम्बार।।

बहना बाँधे प्रेम का धागा, भइया की भवि रक्षित हो॥
मनोकामना उज्जवलता की, जीवन सदा सुरक्षित हो।
मिले सुख-चैन सदा भरमार, निभाना रिश्ता बारम्बार॥

भ्राता फिर गौरवान्वित हो, बहना पर बलि-बलि जाता है।
सुख-शांति सुरक्षा के खातिर, संकल्प-शपथ खा जाता है॥
इसी मतलब का ये त्योहार, निभाना रिश्ता बारम्बार॥

यह मामूली सूत्र नहीं, अटूट प्रेम का बंधन है।
अनमोल सूत्र स्नेह भरा, कहलाता रक्षाबंधन है।
प्रगाढ़ सम्बन्ध भरा त्योहार, निभाना रिश्ता बारम्बार॥

मंगल कलश सजा जब बहना, भाल पे तिलक लगाये।
रक्षा सूत्र कलाई बाँधे, भ्राता की सीना तन जाये॥
बढ़ाये भ्रातृ-भगिन का प्यार, निभाना रिश्ता बारम्बार॥

कारागृह में बहनों को भी, मिलती ये आजादी।
सीमा रक्षक योद्धा भी, बनते इससे फौलादी।
करे पराक्रम का संचार, निभाना रिश्ता बारम्बार॥

भ्रात बनाकर कर्मवती ने, मुस्लिम को राखी भेजा था।
समझा था मूल्य हुमायु ने, रक्षा में सेना भेजा था॥
किया मेवाण का बेड़ा पार, निभाना रिश्ता बारम्बार॥

भारतीय संस्कृति की गौरवगाथा, गाते उत्सव सारे।
कहे सहोदर मिल-जुल के सब, प्रकटाओ भाई-चारे॥
मानवीय मूल्यों का आधार, निभाना रिश्ता बारम्बार॥

रचनाकार रामसहोदर पटेल 'पूर्व शिक्षक'
ग्राम- समीसी, पो० खड्डा, वाया- ब्यौहारी
जिला- शहडोल (मध्यप्रदेश)
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