शहीद हो गए कंत: अंजली सिंह
*शहीद हो गए कंत*
नाश की पट भूमिका पर ,
पदचिन्ह छोड़कर चले गए।
मांग में लालिमा रोली भर,
अंगार बना कर चले गए।
पुलकित दृग में प्रेम बीज भर ,
अश्रु धार बना कर चले गए।
स्नेह जलद के प्रेम नांव में,
अनुराग अधूरा छोड़ चले गए।
सहस्त्र ख्वाब की सेज पर,
कटीली रजनी छोड़ चले गए,
मन-मंदिर के प्रेम पुजारी
दीया बुझा कर चले गए।
अंतस में ऐसा घाव दिये ,
गरल पिला कर चले गए।
पर मेरे परम -प्यारे पिया,
वतन का मान बढाकर चले गए।
गर्व करु ,अभिमान करूं,
सिसकूं या जयगान करूं।
धरती मां के वीर पुत्र ,
माता का कर्ज उतार कर चले गए।
मेरे प्रारब्ध के पुण्य कंत
यश गात बना कर चले गए।
नाश की पट भूमिका पर ,
पदचिन्ह छोड़ कर चले गए।।
©रचनाकार
अंजली सिंह
उच्च माध्यमिक शिक्षक
शासकीय स्तर माध्यमिक विद्यालय भाद

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