शनिवार, जुलाई 17, 2021
बरसि जई घनस्याम: अशोक त्रिपाठी "माधव"
शनिवार, जुलाई 03, 2021
अशोक त्रिपाठी 'माधव' के बघेली गजल Ashok Tripathi Ke Bagheli Gazal
गुरुवार, जुलाई 01, 2021
बघेली पर्यावरण गीत: अशोक त्रिपाठी 'माधव' BAGHELI PARYAWARAN GEET
मंगलवार, जून 29, 2021
फगुनाहटी बघेली कविता : अशोक त्रिपाठी 'माधव'
ओरहन :बघेली कविता-अशोक त्रिपाठी माधव
बघेली गजल : अशोक त्रिपाठी माधव
शनिवार, जून 26, 2021
आजकल के पढ़ाई लिखाई दादा मोबाईले मे होई जात हय #बघेली_कविता: जोगेश्वर सिंह 'जख्मी'
मंगलवार, सितंबर 01, 2020
गो बलि महापाप:राम सहोदर
गो बलि महापाप
उपकार करे गाय हमारी है शान
से।
संवृद्धि में सहयोगी हो मिल
जुल किसान से॥
बैला जने हैं ताकती हल खीचे
मान से।
मेहनत अथक है करता खेती में
ध्यान से॥
हर इच्छा करे पूरी, है
धेनू नाम से।
कहलाती कामधेनु रहे देवधाम
से॥
दूध, दही, तक्रम घी, दें ईमान
से।
पाले हैं जग को सारा, बछड़ा
जनान से॥
हर अंग बेसकीमती धेनु के
नाम से।
अस्थि, चर्म, मूत्र, मल
होते हैं काम से॥
गोबर भी पूजा जाता गौरा के
नाम से।
वांछित है फल को देती पूजे
जो ध्यान से॥
हर इच्छा पुरी करती धेनु
ईमान से।
गोधन है कृष्ण प्यारी गोपाल
नाम से॥
गोधन से गोपी गोरस ग्वाले
गुमान से।
गोकुल में गोधन पूजें मुरली की तान से॥
हिन्द पूजता है माता के नाम
से।
बधकार पूजता है पूजे है प्राण से॥
कैसी बिडम्बना है द्विविधा
के प्लान से।
उपकार का बकसीस चुकाती है
जान से॥
गो बलि का पाप त्यागो जीवन समान से।
रहम करो पशु पर मत खेलो
प्राण से॥
रूढ़ीवादी तर्क को निकालो है
ध्यान से।
शिक्षा की राह मान निकल
अंधज्ञान से॥
कहता सहोदर जग में रहना ईमान
से।
पूज्यनीय धेनु पूजो स्वाभिमान
से॥
रचनाकार: राम सहोदर पटेल
शिक्षक, शासकीय हाईस्कूल नगनौड़ी, गृह निवास-सनौसी,जिला-शहडोल(म.प्र.)
सोमवार, अगस्त 31, 2020
देशभक्ति गीत (आल्हा-लय): राम सहोदर
काव्यरचना:-
राम सहोदर पटेल, शिक्षक,
रविवार, जुलाई 05, 2020
कहिया बीतही रे भैया कोरोना के डरवा-2

कहिया बीतही रे भैया कोरोना के डरवा-2
ओये होये
रोज रोज पुलिस के सायरन बाजे
बाजे हे एम्बुलेशवा
एको दीना के चेन नही
भैया फँसल मोर बिदेसवा
कहिया बीतही रे भैया ...
ओये होये
बाजार में जाए के मनवा करे
करे रे घुमे फिरय के मनवा
घेरा में खड़ा करके
देथे रे सहुआ समनवा
कहिया बीतही रे भैया ...
ओये होये
बेर बेर हाथ धोवा
धोवा रे अोना धोतिया
एता दीना घरे रहनं मन भरी गए
सगरो त्यौहार में लागी गए रोकवा
कहिया बीतही रे भैया ...
ओये होये
बड़े बड़े लइका होइ गइन
कथंय रोज कराइ दे मोर कजवा
सगरो घोडा-गाड़ी बंद हे
कैसे के आहीं महिमनवा
कहिया बीतही रे भैया ...
ओये होये
गाई गोरु घरे बैठिन
कैसे लोरीे खेतवा से भूसा-चरवा
ओहु में काटेक हवय गोहु
कैसे आही अगने मोर ठेसरवा
कहिया बीतही रे भैया ...
ओये होये
मोदी जी कहिनय
घरे से झिन निकलिहा
शिवराज मामा के आसरा से
फ्री में मिलिथे कोटा में गेहु गलवा
कहिया बीतही रे भैया ...
ओये होये
दाइ बाबा आथंय रोज
रात के देखे रामायणवा
दिने चढ़ी जाथंय महवा
मम्मी पापा कथंय कहिया आही बहुरिया
कहिया बीतही रे भैया ,कोरोना के डरवा - 3
..... ओये होये
©®जागेश्वर सिंह 'ज़ख़्मी '
गुरुवार, जून 04, 2020
पर्यावरण पर करमा गीत: राम सहोदर
तेरे करमन से रे , फूट गया तकदीर, तेरे........।
1)
तेरे हित का काम करत हैं ये तरुवर है सारे।
हाय-हाय ये तरुवर हैं सारे।
फिर भी तेरे समझ न आवै, इनहिं चलावे आरे।।
तेरे करमन से रे फूट गया..................।
2)
पेड़ को कितना मारे-काटे तऊ न मानै बैर । हाय-हाय तऊ न मानै बैर।
मार का बदला फल है देता अउर मनाबै खैर। तेरे करमन से रे ।
फूट गया तकदीर....................।।
3)
आॅक्सीजन दे के साॅंस बचावै, पानी देके जान। हाय-हाय पानी देके जान।
धूप को सह छाया देवे, पर्यावरण महान। तेरे करमन से रे। फूट गया तकदीर.............।।
4)
वन महोत्सव लक्ष्य को देखो, पहली गलती सुधार।
हाय-हाय पहली गलती सुधार।
रखो सहोदर नाता इनसे ये मुक्ति के द्वार। तेरे करमन से रे। फूट गया तकदीर तेरे करमन से रे ............।।
मंगलवार, मई 19, 2020
डिजीलैप शिक्षण राई गीत: बी एस कुशराम
बुधवार, मई 13, 2020
स्वच्छता गीत (राई): बी एस कुशराम
मंगलवार, मई 12, 2020
जागरूक महिला किसान: बी एस कुशराम
शुक्रवार, मई 08, 2020
राई साक्षरता गीत:राम सहोदर पटेल
- आपसे अनुरोध है कि कोरोना से बचने के सभी आवश्यक उपाय किये जाएँ।
- बहुत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर जाएँ, मास्क का उपयोग करें और शारीरिक दूरी बनाये रखें।
- कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से अच्छी तरह अपने हाथों को धोएं। ऐसा कई बार करें।
- आपकी रचनाएँ हमें हमारे ईमेल पता akbs980@gmail.com पर अथवा व्हाट्सप नंबर 8982161035 पर भेजें। कृपया अपने आसपास के लोगों को तथा विद्यार्थियों को लिखने के लिए प्रोत्साहित करने का कष्ट करें। कृपया देखें, नियमावली।
॥ दगाबाजों से सावधान ॥ चौपाई जब बारी ही फसल उजारे। कर दीजै तब उसे किनारे॥ विश्वासघात अंगरखा होई। त...
-
बचपन की बहार : रिश्तेदारों का प्यार बात जुलाई 1985 की है , जब खेलते खेलते प्राथमिक पाठशाला कराहिया ( रीवा जिले के ग्राम बारौ का ए...
-
सूरज के बहाने अनन्त ताप का स्वामी, है अनन्त जिसकी आभा। अगणित जन जिसके दरबारी, होती है जिसकी अनन्त सभा। स्वयं केंद्र बिंदु है जो, है ज...
-
सायबर अपराध एवं बचाव साइबर अपराध क्या है ? सूचना क्रांति के अंतर्गत आने वाले विभिन्न साधन- जैसे मोबाइल , कंप्यूटर , लैपट...
-
भारत भूमि के अमर सपूत बाबा साहब को नमन करें। बाबा साहब की शिक्षा से घर-घर में प्रकाश भरें। एके दीप जलाया था बाबा ने, चलो आज हजारो...
-
मान्यताएं, वह विश्वास है जिसे लोग बिना जांच-परख किए मानते हैं. कुछ मान्यताएं ऐसी हैं जिनसे किसी प्रकार की हानि की आशंका नहीं ह...
-
पुट्टी सुरेन्द्र कुमार पटेल जमाना पुट्टी का है। आप कितना भी महंगा घर बनवा लीजिए, यदि आपने पुट्टी नहीं कराई तो सब बेकार है। इसी तरह म...
-
प्रेरणा गीत रहे सुरक्षित सब का आंगन। यही है सब की आस। तो मिलकर करें प्रयास। भाई-बहन सब घर में रहेंगे। रखेंगे मां-बापू का ध्यान। ...
-
कोरोना आया कोरोना आया कोरोना आया कोरोना आया, सम्पूर्ण विश्व जगत में छाया । सभी देशों में खौफ बड़ा है , गली मोहल्ला सून पड़ा है...
-
विकास से बात-चीत विकास! तुम अभी भी बच्चे हो। तुम बढ़े नहीं छोटे हो क्यों ? मैं शोषण का शिकार हो गया। इसलिए मेरा व...
-
स्वप्न एक झरोखा स्वप्न तभी तक स्वप्न है जब तक कि आंखें न खुलें। आंखें खुलते ही हकीकत सामने आ जाती है। पर इसके विपर्याय बात करें तो ...







