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शनिवार, मई 23, 2020

समय की गिनती: पंकज कुमार

समय की गिनती बड़ा कठिन है,
समय बड़ा अनमोल है।
समय की गरिमा कोई न जाने,
इसकी सीमा पार है।

समय बड़ा बलवान है,
समय अहित भी करता है।
समय का कर उपयोग सदा हम,
समय हमेशा चलता है।

समय को व्यर्थ नहीं करते हम,
समय व्यर्थ करता है हमको।
बीत गया जो समय सुनहरा,
बाद में पछतावा हम सबको।

समय हसाता समय रुलाता,
समय समय पर सब कुछ आता।
समय की महिमा कोई न जाने,
समय क्या क्या दिन दिखलाता।

समय पे निर्भर है सब,
भविष्य हमारा कैसा होगा।
कठिन परिश्रम की है जिसने,
सुनहरा भविष्य उसका होगा।

समय ही कड़वा समय ही मीठा,
समय ही आंधी तूफा है।
समय से बढ़कर न है कोई,
समय कभी न ठहरा है।

नाम- पंकज कुमार (ET प्रथम वर्ष)
ग्राम- बैहार पोस्ट- गौरेला थाना- जैतहरी जिला- अनूपपुर (म.प्र.)

शुक्रवार, मई 15, 2020

पापा की हैं प्यारी:पंकज कुमार

पापा की हैं प्यारी,
घर की लक्ष्मी बेटियां।
सब लोगो की राजदुलारी,
प्यारी - प्यारी बेटियां।

कोई पड़ा तकलीफ में,
तब आगे आएं बेटियां।
कई ऐसे ये पल दिखाएं,
और बहुत रुलाएं बेटियां।

पूरा घर हो भरा - भरा सा,
जब घर में होती बेटियां।
रूप अनेक हैं इनके,
मां, बहन, पत्नी ये सब होती बेटियां।

इनसे है संसार बना,
इनके बिन न कोई बना।
कभी भी इनपर हुआ अन्याय,
त्राहि - त्राहि संसार किया।

निडर साहसी होती नारी,
अन्याय कभी न सहती हैं।
अगर समय आए लड़ने का,
वीरांगना रूप दिखती हैं।

समय - समय की बात है,
जब बेटी बंधी - बंधी सी।
अब जब समय मिला बढ़ने का,
तब बेटी उड़ी-उड़ी सी।

मंगल पे पहुंची हैं बेटी,
चांद पे भी पहुंची हैं बेटी।
जहां-जहां भी नजर जाएगा,
सभी जगह अब दिखेंगी बेटी।

रचना- पंकज कुमार (ET प्रथम वर्ष)
ग्राम- बैहार पोस्ट- गौरेला थाना- जैतहरी जिला- अनूपपुर (म प्र) 

बुधवार, मई 13, 2020

ऐ जिंदगी, पंकज कुमार

ऐ जिंदगी तू क्या क्या कराती,
पाप कराती, पुण्य कराती।
तेरा न कोई निश्चित कल,
कब तू किस पर टूट पड़े।

भूत,भविष्य, वर्तमान है तू 
रहती है तू अंतर मन में।
मार्ग है तेरा, कर्म है मेरा,
जुड़े रहें इस बंधन में।

कुछ अच्छे कर्मों से हमने,
सुनहरा जीवन पाया है।
जिंदगी की गोद में,
माता ने हमें सुलाया है।

पता नहीं  ये मानव जिन्दगी,
बार-बार मिल पाएगी।
पता नहीं ये जिंदगी, 
कब धोखा दे जाएगी,
अमीर गरीब का भेद न कर,
   श्मसान  घाट पहुंचाएगी।

इस छोटी सी जिंदगी में,
ऊँच-नीच तो आता है।
जो जिंदगी से हार गया,
वो कुछ नहीं कर पाता है।

नाम- पंकज कुमार यादव (ET प्रथम वर्ष)
ग्राम- बैहार पोस्ट- गौरेला थाना- जैतहरी जिला- अनूपपुर (म प्र)
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रविवार, मई 10, 2020

ईश्वर आखिर कौन है:पंकज कुमार


ईश्वर आखिर कौन है

ईश्वर आखिर कौन है?
अपनी मेहनत ईश्वर है।
अपना मन भी ईश्वर है,
अपना तन भी ईश्वर है।

प्राकृति में ईश्वर है,
पूरा भारत ईश्वर है।
भारत की सेना ईश्वर है,
देशों के अंदर ईश्वर है।

माता - पिता के चरणों में,
और उनकी वाणी ईश्वर है।
सब लोगो की चिंता करना,
और मानवता भी ईश्वर है।

जिसने पूरा ब्रम्हांड बनाया,
वो भी तो एक ईश्वर है।
सत्य अगर कोई न त्यागे,
तो हर प्राणी में ईश्वर है।

धरती के कण-कण में ईश्वर,
सूर्य की किरणों में ईश्वर।
चांद की शीतलता में ईश्वर,
पानी की लहरों में ईश्वर।

ईश्वर की बनी ये पूरी दुनिया,
माया की ही रचना हैं।
इन्हें किसी ने नहीं बनाया,
ईश्वर की ही गणना है।

रचना: पंकज कुमार यादव (ET प्रथम वर्ष)
ग्राम- बैहार, पोस्ट- गौरेला थाना- जैतहरी जिला- अनूपपुर ( म प्र)
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गुरुवार, मई 07, 2020

कहाँ गये वो दिन:पंकज कुमार


कहाँ गये वो दिन
जब हम भी खेला करते थे
वो कंचा खोखो प्यारे थे
कबड्डी में भी हारे थे

वो दोस्त कहाँ हैं जिनके संग
हम गली मोहल्ला भागे थे
घर की ना थी चिंता हमको
खेल कूद में आगे थे

गिर कर भी झट खड़े हो जाते
हमें न रोने देते थे
खुद की चीजें हमको देते
इतने अच्छे बच्चे थे

वो अटक-अटक के पड़ना सबका
याद बहुत आता है हम
चिड़ा चिड़ा के सबको हंसते
मजा बहुत आता था तब

मित्र थे अच्छे प्यारे-प्यारे
उंच-नीच का भेद न था
कब मिले हमें स्कूल से छुट्टी
घर में जाके खेलना था

मार पडी जो घर वालों से
चुपके-चुपके भगते थे
कोई न कर दे घर में चुगली
घर वालों से डरते थे

रह-रह के उन मित्रों का
अब भी याद सताता है
बचपन के वो दिन ना जानें
क्यों इतनी जल्दी जाता है

पंकज कुमार यादव, (ई.टी. प्रथम वर्ष)
ग्राम- बैहार, पोस्ट-गौरेला, थाना-जैतहरी, जिला- अनूपपुर
(मध्यप्रदेश)
ⓒपंकज कुमार यादव (ई.टी. प्रथम वर्ष)
ग्राम-बैहारपोस्ट-गौरेलाथाना- जैतहरी,
जिला अनूपपुर
  •   आपसे अनुरोध है कि कोरोना से बचने के सभी आवश्यक उपाय किये जाएँ।
  •  बहुत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर जाएँमास्क का उपयोग करें और शारीरिक दूरी बनाये रखें।
  •  कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से अच्छी तरह अपने हाथों को धोएं। ऐसा कई बार करें।
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बुधवार, मई 06, 2020

भूतों का संसार:पंकज कुमार


भूतों का संसार
भूतों का संसार निराला,
कभी किसी को समझ न आए।
भूतों का संसार न देखा
फिर भी सब को डर लग जाए॥

इनकी है इक अलग ही दुनिया
लोगों का यह कहना है।
बहुत लोग भूतों को मानें
अपनी-अपनी श्रृद्धा है॥

कई जगह भूतों के भ्रम में
लोनों ने जान गवाए हैं।
झाड़ फूंक करवाके लोग
बाद में पछ्ताए हैं॥

भूत प्रेत को कभी न देखा
फिर कुछ को दिखता है।
झूठ-मूठ की बातें करते
सुनने वाला डरता है॥

गाँव-गाँव की यह परेशानी
भूतों पर विश्वास करें।
दिन में सोयें रात में जागें
उल्लू जैसा काम करें॥

भूत-प्रेत से भरा है तन मन
अंध विश्वास की बात करें।
लोगों को देखे भूत ही समझे
डर-डर कर वह चला करे॥

भूत-प्रेत न होता जग में
होता है यह मन का भ्रम।
अच्छा सोचो, अच्छा समझो
अच्छा ही होगा हर दम॥
रचना- पंकज कुमार यादव (ई.टी. प्रथम वर्ष)
ग्राम-बैहार, पोस्ट-गौरेला, थाना- जैतहरी,
जिला अनूपपुर
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सोमवार, मई 04, 2020

कोरोना आया कोरोना आया:पंकज यादव


कोरोना आया कोरोना आया

कोरोना आया कोरोना आया,
सम्पूर्ण विश्व जगत में छाया
सभी देशों में खौफ बड़ा है,
गली मोहल्ला सून पड़ा है।

बाहर ये कैसी विपदा आई,
कोरोना ने ली है अंगड़ाई।
कई लोगन की जान गयी, है
कोरोना की यह कठिन घड़ी है।

हमें एक अच्छा समय मिला है,
अपने घर में रहने का।
सोच समझ कर बाहर निकलें,
कोरोना से हैं बचने का।

एक बार जो हुआ कोरोना,
किसी से न मिल पाओगे।
चाहे हो वो कितना अच्छा,
पास बुला न पाओगे।

प्रकृति को हुआ इजाफा,
शुद्ध हुयी ये दुनिया सारी।
सभी वाहने हो गयी बंद,
फर्क पडा है वातावरणीय।

बच्चों के संग हंसना गाना,
कोरोना ने सिखलाया है।
कठिन नहीं स्वच्छ रहना हर, दम
इसने हमें बताया है।

बड़े-बड़े देशों के इसने,
हाथ खड़े कर डाले हैं।
चीन,अमेरिका, पाकिस्तान में से,
भारत के लोग निराले हैं।

कोरोना का यह अंतिम पडाव,
सबको लगता भरी सा।
बस कुछ दिन घर में रह लो,
फिर आएगा खुशहाली सा,
फिर आएगा खुशहाली सा।

नाम- पंकज कुमार यादव (ई.टी. प्रथम वर्ष)
ग्राम-बैहार, पोस्ट-गौरेला, थाना- जैतहरी,
जिला –अनूपपुर
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सोमवार, अप्रैल 27, 2020

आओ चलो कुछ करना सीखें:पंकज यादव

आओ चलो कुछ करना सीखें

बड़ों का आदर करना सीखें
उनके आगे झुकना सीखें
सदा सत्य है बोलना हमें
उनकी बातें सुनना सीखें

समय से घर में आना सीखें
सुबह शाम हम पढना सीखें
कुछ ऐसा हम खेल बनायें
खेल-खेल में पढना सीखें

घर को स्वच्छ रखना सीखें
बाग़ में पौध लगाना सीखें
उनका ध्यान रखना सीखें
उनकी गिनती करना सीखें

सबसे अच्छा बनना सीखें
सबसे बेहतर करना सीखें
स्कूल हमें है  जाना रोज
स्कूल में नया  कुछ सीखें

प्रेम से सब कुछ कहना सीखें
अच्छा बनकर रहना सीखें
सुबह-सुबह हम उठाना सीखें
चलो योग हम करना सीखें

अभी से लक्ष्य बनाना सीखें
उसी लक्ष्य पे चलना सीखें
परिस्थिति में लड़ना सीखें
अपना हक पाना सीखें

सब की बातें  सुनना सीखें
सबके बीच रहना सीखें
भले लोग हों कितने सारे
सब के बीच कहना सीखें

रचना: पंकज कुमार यादव
(E.T. प्रथम वर्ष, अनुपपुर)
ग्राम-बैहार, पोस्ट-गौरेला, थाना-तहसील जैतहरी जिला अनुपपुर

सोमवार, अक्टूबर 14, 2019

पेड़ों का अस्तित्व


पेड़ों का अस्तित्व
पंकज कुमार यादव
पेड़ों का अस्तित्व है संकट में, 
अगली पीढ़ी है मुसीबत में  

कोई विरोध न करता इसका,.
संतुलन खो  गया है मानव का

पेड़ हमें सब कुछ देता है,
बदले में ना कुछ लेता है

फिर भी ना कोई इनको बक्शे,
काट रहे हैं हंसते-हंसते

इससे है ब्रह्मांड बना,
तत्वों का  यह मुखिया
  
आसपास हैं हरे-भरे,
ऊंचे नीचे सभी खड़े

अगर क्रोध में आया पेड़,
सब कुछ नष्ट कर देगा  
नहीं बचेगा कोई भी प्राणी,
सबको पाठ पढ़ा देगा

एक तत्व भी अगर गया,
तो चार तत्व भी होंगे नष्ट
  सबकी आंखें खुल जाएंगी, 
जब होगा मानव का अंत

पेड़ हमें छाया देते हैं,
खाने को है देते फल  
फिर भी मानव सोच रहा है,
चलो हम इनको कांटे कल

मानव चाहता बंजर भूमि,
कब तक रहेगा उसमें खुश  
है फिर चाह कर भी ना होगा,
हरा-भरा दोबारा विश्व

मत काटो हम पेड़ों को,
हमने तेरा क्या बिगाड़ा  
ठीक ठीक कह रहे हैं,
फिर भी सब ने मुंह है फेरा

कितना प्यारा विश्व है,
हर खुशी है साथ मनाते  
फिर क्यों उनको भूल गए हैं,
जो आसपास हैं हवा लगाते

लोग समझ के इसको कविता,
पढ़ लेते और जाते भूल।
इसमें करता अमल न कोई,
नादानी करते सब कोई।

अब से पौधा हमें लगाना,
सेवा इनकी सदा है करना।  
जान हमारी भले ही जाए,
पेड़ एक भी कट न पाए।

CO2 है सबके पास,
O2 कहां से लाओगे?
पीठ में जब गैस रहेगा,
तब बड़ा पछताओगे?

रचना:पंकज कुमार यादव
ग्राम-बैहार, पोस्ट-गौरेला,
तहसील-जैतहरी, जिला-अनुपपुर(मध्यप्रदेश)

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