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शनिवार, जुलाई 03, 2021

अशोक त्रिपाठी 'माधव' के बघेली गजल Ashok Tripathi Ke Bagheli Gazal


बघेली गजल
अशोक त्रिपाठी 'माधव' के बघेली गजल Ashok Tripathi Ke Bagheli Gazal
आपन फरज निबाहा आगे बढ़े रहा।
खासा परगति के सीढ़ी मा चढ़े रहा।।

पुरिखन हर सीख गांठ मा बांधि के राख्या।
आय जई मंजिल खुद रसता गढ़े रहा।।

थकि के बइठि न जया तूं कहौं छहांरे मा।
धीरेन-धीरे चला गमय-गम कढ़े रहा।।

निंगही से सीखा कुछ अकिल लगाबा थोरौ।
मकड़ी कस जाला रातौ-दिन गढ़े रहा।।

देखा सोच न मान्या कउनिउ बातन के।
दोस न एक दुसरे के मूड़े मढ़े रहा।।

हांथ मा हांथ धये बइठे से कुछू न होई।
कमर कसे करतब्ब मा अपने ठढ़े रहा।।

देई दइउ सहारा केबल करतब्बी का।
पाठ करम योगी बाला सब पढ़ें रहा।।

फल के इच्छा कबौ न कीन्ह्या जान लिहा।
पढ़य के साथय-साथ अउरु कुछ लढ़े रहा।।

आजु-काल बिन लढ़े पढ़ाई फीकी है सब।
माधव के या सीख के मंतर पढ़े रहा।।

अशोक त्रिपाठी "माधव"
  शहडोल मध्यप्रदेश
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मंगलवार, जून 29, 2021

बघेली गजल : अशोक त्रिपाठी माधव



बघेली गजल 

केखा खोटहा कही केखा हीरा कही।
है निठुर जब जमाना केसे पीरा कही।।

केसे रोई बताई हम आपनि बिपति।
केहू पिरबेदना दुनिया मा अइसन नही।।

जेखा मानेन हम आपन ऊ दीन्हिसि दगा।
करी केखर भरोसा साथ केखे रही।।

अब उचटि गा हय बिसुआस संसार से।
हर घड़ी अब जुलुम बोला कइसे सही।।

टोरि दीन्ह्या तुहूं सगली उम्मीद का।
एक भरोसा रहा तोंहसे आशा रही।।

सुधि रही या मरत तक जउनु दीन्ह्या सजा।
नाउ से तोंहरे आंसू या बहतय रही।।

ठीक भा तू किहा जउनु जानिन गयन।
पय पारुख तोहांरय उमिर भर रही।।

तूं मिला ना मिला दुःख न होई कबौ।
ना बिसरि पउबय सुधि आय अउतय रही।।

तूं जहां जा खुशहाल जीबन जिया।
रात-दिन माधव मांगन या मगतय रही।।

खेल किसमत के जाने न पाबय कोऊ।
दूध बिगड़े के बादय बनत है दही।।

रचना:
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मंगलवार, अप्रैल 21, 2020

इश्क़ की बात करते हैं:अमलेश कुमार

●इश्क़ की बात करते हैं●

घरों में क़ैद होकर भी इश्क़ की बात करते हैं
वो हमें याद करते हैं, हम उन्हें याद करते हैं।

अँधेरा हटेगा सुबह होगी फिर दीदार होगा
एक दूसरे की सलामती की फरियाद करते हैं।

ख़ौफ़ मर्ज़ का है पर ख़्वाबों में ज़ोर नहीं इसका
हम नींद की गहराइयों में ही मुलाक़ात करते हैं।

क़यामत की धुंध में खोना मुमकिन नहीं हमारा
हम मोहब्बत वाले हैं, ख़ुद को चराग़ करते हैं।

-अमलेश कुमार
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बुधवार, नवंबर 06, 2019

सुरेन्द्र कुमार पटेल की ग़ज़ल


ग़ज़ल
दिल की बात कह दूँ, जरा बात तो हो।
मिश्री ही घोलूँगा, पहले शुरुआत तो हो।

रहने दो तुम कुछ कहना, बेमन-बेमन।
कुछ भी कह देना, दिल में जज्बात तो हो।

कुछ हुआ नहीं, दिल को छुआ नहीं
रहने दो मिलना, दिलों की मुलाकात तो हो।

नींद उड़ा दूँगा इन भोली-भाली आँखों की, 
मैं भी इन्तजार में हूँ कि पहले रात तो हो।

फंसने से डरता कौन है, तुम्हारे खेल में,
तुम्हारी तरफ से बिछाई गई बिसात तो हो।

तुमसे पहले भी आये,गए निकल सब दिल से,
धुल जाता है कीचड़ भी, जमके बरसात तो हो।
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