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रविवार, जून 21, 2020

करें योग, रहें निरोग: नरेन्द्र पटेल


21 जून 2020
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष
करें योग, रहें निरोग
योग एवं प्राणायाम व्यायाम के प्राचीन रूप हैं, जो भारतीय समाज में हज़ारों साल पहले विकसित हुआ था। लगभग 5000 वर्ष पुरानी इन परंपराओं का तब से लगातार अभ्यास किया जा रहा है। इनसे किसी व्यक्ति के बीमारियों और अक्षमताओं के विभिन्न रूपों से छुटकारा पाने के लिए विभिन्न प्रकार के अभ्यास शामिल हैं। ये ध्यान के लिए एक मज़बूत तरीके भी माने जाते हैं, जो मन को शांत एवं शरीर को स्वस्थ करने मे सहायक होते हैं।
        आज दुनिया भर में योग का अभ्यास किया जा रहा है। दुनिया भर के लगभग  दो सौ करोड़ लोग योगाभ्यास और प्राणायाम करते हैं। इन प्राचीन पद्धति के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय  योग दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 2015 में हुई थी।

     
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का इतिहास
        11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय  योग दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की। इसके बाद 2015 से अंतर्राष्ट्रीय  योग दिवस दुनिया भर में मनाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए योग के महत्व पर चर्चा की थी।
      हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी योग दिवस को एक थीम दी गई है।
आइए जाने -"अंतर्राष्ट्रीय  योग दिवस की वर्षवार थीम"

2015-
      सद्भाव और शांति के लिए योग ।
2016-
             युवाओं को  जोड़ें ।
2017
            स्वास्थ्य के लिए योग ।
2018
           शांति के लिए योग ।

2019
          पर्यावरण के लिए योग ।
 2020
           घर में रहते हुए अपने परिवार के साथ योग करना ।
योग का महत्‍व
           आज के समय में सभी के जीवन में योग का बहुत बड़ा महत्‍व है। वर्तमान समय में बढ़ती बीमारियों से निपटने के लिए योग बहुत आवश्यक है। जिस प्रकार मधुमेह से ग्रसित व्यक्ति के लिए दवा आवश्यक है, ठीक उसी प्रकार हमारे जीवन में योग बहुत आवश्‍यक है।
     सुबह का समय, योग करने का सही समय माना जाता है। सुबह के समय योग करने से व्‍यक्‍ति के मस्‍तिष्‍क की सभी इंद्रियां भलीभंति गतिमान होती हैं, जिससे व्‍यक्‍ति का मन एकाग्र होकर कार्य करता है। योग एक ऐसी साधना है, जिसका जीवन में होना बहुत जरूरी है।
      योग एक ऐसा इलाज है, जो बिना पैसा खर्च किए रोगियों का इलाज करने में सक्षम है। वहीं यह शरीर को ऊर्जावान बनाए रखता है।
 योग से जुड़ी महत्वपूर्ण सावधानियां:-
3-   योग प्रातः या सायं के समय करना ज्‍यादा उचित रहता है।
2-योग हमेशा खाली पेट करना चाहिए।
 3-योग अपने शरीर के सुविधा के हिसाब से करें।
 योग करने से लाभ:-
 1-मन रहेगा प्रसन्‍न-
        प्रतिदिन सुबह के समय योग करने से मन दिन भर प्रसन्‍न रहता है, साथ ही मानसिक शांति भी मिलती है। मानसिक रोगों को दूर कर प्रसन्न रहने के लिए यह एक सस्ता और सरल उपाय है।
 2-आत्‍मविश्‍वास बढ़ाने में सहायक-
     योग से मस्‍तिष्‍क सक्रिय होता है और शारीरिक ऊर्जा में वृद्धि होती है, जिससे व्‍यक्‍ति का मन किसी भी कार्य में व्यवस्थित रूप से लगा रहता है एवं उसके सभी काम समय पर होने से उसका आत्‍मविश्वास भी बढ़ता है।
 3-मधुमेह रोगियों के लिए आवश्यक-
     ऐसा कहा जाता है कि मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जो कभी ठीक नहीं होती है, किंतु यह सच नहीं है।योग और प्राणायाम से इस बीमारी का इलाज भी संभव है। योग के नि‍यमित अभ्यास से मधुमेह जैसी बीमारी से राहत पाई जा सकती है।
4-मानसिक तनाव से छुटकारा-
     प्रातः काल के समय योग करने का सबसे ज्‍यादा असर व्‍यक्‍ति की मानसिक स्‍थिति पर होता है। प्रात: योग करने से दिन भर के मानसिक तनाव से छुटकारा मिल जाता है एवं सभी कार्य आसानी एवं सरलता से हो जाते हैं।
 5-वजन कम करने में सहायक-
   नियमित रूप से योग एवं प्राणायाम करने से व्यक्ति के वजन में कमी आती है जो स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
प्रस्तुतकर्ता:-
नरेंद्र प्रसाद पटेल 
(राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक)
शासकीय हाई स्कूल दुलहरा
जिला अनूपपुर म.प्र.
[इस ब्लॉग में रचना प्रकाशन हेतु कृपया हमें 📳 akbs980@gmail.com पर इमेल करें अथवा ✆ 8982161035 नंबर पर व्हाट्सप करें, कृपया देखें-नियमावली

शुक्रवार, जून 05, 2020

आओ मिलकर धरा सजाएं: नरेन्द्र प्रसाद पटेल



दो कविताएं

               (1)
आओ मिलकर धरा सजाएं

शस्य श्यामला धरा हमारी,
अनुपम छटा, प्रकृति की प्यारी।
आओ मिलकर इसे सजाएं।
सब मिलकर हम पेड़ लगाएं।।

फैल रहा है बहुत प्रदूषण,
कट रहे सब जंगल वन।
कोई ऐसा यत्न करें हम,
बच जाएं सब जन और वन।।

विटप,जन्तु, सरिता अरु नाले,
ये सब हैं मित्र हमारे।
सूखी धरा आज कह रही,
इन्हें सम्हाले मिलकर सारे।।

आवश्यक है पर्यावरण सुरक्षा,
इनसे होगी मानवता की रक्षा।
परोपकार कर जीवजगत का,
मानव को देते परहित की शिक्षा।।
             
              (2)
एक पेड़ की व्यथा

मैं हूं तो
तुम हो।
मेरी छांव तले,
तुम्हारी कई पीढ़ियां
बीत गई।
यदि धरा को
बचाना है,
तो मुझे भी 
बचाना होगा।
यदि मुझे 
बचाओगे तो,
तुम भी बच पाओगे।
मैं हूं प्राण दायिनी,
जीवन रक्षक,
मुझ में है
सारा विश्व समाया।
आज पूरी मानवता
पुकार रही है।
मेरी ममता की छांव में
कई कहानी गढ़ी गई है।
मैंने सहे हैं 
चौमासा,
अंधड,
लूं ,
सिसकती असीमित ठंड,
तब भी,
नहीं डिगा हूं
मानवता की खातिर।
चाहे कितने जुल्म करो तुम
कहीं वन, 
कहीं उपवन,
कहीं अमराई
बनकर 
हरदम साथ दिया है तुमको।।

रचनाकार :
नरेंद्र प्रसाद पटेल 
(राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक)
शासकीय हाई स्कूल दुलहरा
जिला अनूपपुर म.प्र.
[इस ब्लॉग में रचना प्रकाशन हेतु कृपया हमें 📳 akbs980@gmail.com पर इमेल करें अथवा ✆ 8982161035 नंबर पर व्हाट्सप करें, कृपया देखें-नियमावली] 

शुक्रवार, सितंबर 06, 2019

जिन्दगी का सफ़र:नरेन्द्र पटेल


1. जिंदगी का सफर

राह पर बढ़ना मुश्किल है,
मगर बढ़ना ना भूलो दोस्तो।।


सीढ़ियां होंगी कठिन,
पर चढ़ना न भूलो दोस्तो।।


जिंदगी की राह पर,
मुश्किलें आएंगी बहुत।।


किंतु अपने आप से
लड़ना न भूलो दोस्तो।।

2. समय की कीमत


समय की कीमत रख
व्यर्थ न गवां एक पल,
मंजिलें तो आएंगी,
पहले घर से तो निकल



जग से जंग नहीं है
पहले मान तो ले तुम्हारा मन,

तुम्हारा कर्म हो उत्तम
तो सराहेगा तुम्हें जन-जन



उदास हो न बैठो
प्यास से हो विकल,
कोशिश करोगे तो
निर्झर फूटेगा कल-कल



चक्र हो, कुचक्र हो
इस फेर में तू 
न पड़,
लड़ने को और भी हैं
पहले उनसे तो लड़
  


डगमगा जाएं पांव तो
रुक, सम्हल फिर चल,
लक्ष्य का हो जाए वरण
तो चलता चल अविचल



कोई न चले साथ तो
निकाल ले पहला कदम,
साथ आएंगे सब
जब टूटेगा भरम
     

रचना:
नरेन्द्र पटेल
शिक्षक (राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त)
शासकीय हाई स्कूल दुलहरा
जिला-अनुपपुर (मध्यप्रदेश)
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