बातन से गौरव मिले, बातन लात दिलाय।।
ताल नीर मैलो दिखा, प्यास भगे तत्काल।।
कूड़ा दरवाजा पड़ी, भीतर की क्या बात।।
भीतर वाहर एक सम, जान परत सब कोय।।
जबरा केरी मित्रता, निश्चित करें विहाथ।।
एक रहे दूजा भगे, या होबेगा जंग।।
फल चाखे नर तोष से, सिद्ध जनम फल होय।।
मोहि सहोदर मान कर, राख सहोदर खास।।
चंचल जल की भांति है, संयम से रख ध्यान।।
पानी जतन बचाबहू, गर चाहो निज मौर।।
अंबर भी भीगा नहीं, इंद्रदेव गे हार।।
सुंदर फूल गुलाब के, कांटे खींचें खाल।।
धन्य मात वह जन्म दे, किया बड़ा एहसान।।
अलग किया सिर काटकर, निंदत हैं सब कोय।।
धरा रह गया राजपद, दुर्योधन के पास।।
चीर हरण के कारणे, दुर्योधन गया खोय।।
ओछे की ज्यों दोस्ती, स्थाई न रह पाय।।
गर सीमा बाहर हुए, हंसी करें सब कोय।।
धन-बल यश का नाश हो, प्रेम सबों से छूट।।
समय गये मिलता नहीं, फिर जीवन निस्सार।।
जीरो यदि खोया नहीं, हीरो चकनाचूर।।
अच्छा करना कर्म सब, बुरा न रखना सोच।।
बना बेशरम लाज ताज, गया बेशर्म सोंट।।












