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मंगलवार, जून 16, 2020

आज की रीति: कौशल प्रसाद पटेल


आज की रीति
आया अजब जमाना रे।
सत्त की चाल चले ना कोई,
झूठ का सबै दीवाना  रे।।
मात पिता गुरु हो चाहे,
दुखियों को भी ठुकराना रे।
मन का रंगी फिरै बिहंगी,
बिगड़ी चाल के हैं संगी,
तिरिया से नेह लगावै,
सोना चांदी खूब बनावै,
स्वारथ भरा तन माना रे।
झूठ का सबै दिवाना रे।
आया अजब जमाना रे।।
फिल्मी चाल चले सब कोई,
बढ़ता देख आंसुओं में रोई,
अच्छी संस्कृति न ॶपनावे, 
पुरानी रीति कह कर ठुकरावे,
आज का शिक्षा करें बेगाना रे।
झूठ का सबै दिवाना रे।
आया अजब  जमाना रे।
धन का लोभी सब जग हैं,
न्याय मार्ग में बहुत कम हैं,
उल्टी चाल चले यह दुनिया,
मानवता भरे सब के पनिया,
उल्टी गंगा आज बहाना रे।
झूठ का सबै  दिवाना रे।
आया अजब जमाना रे।।

रचनाकार:-
कौशल प्रसाद पटेल
समाजसेवी पुरैना, ब्योहारी
ज़िला शहडोल (म.प्र.)

बुधवार, जून 10, 2020

प्रकृति से प्रेम: रमेश प्रसाद पटेल


प्रकृति से प्रेम

प्रकृति से है जीवन
सृष्टि का संचालन।
अनवरत से चल रहा
उसी के हाथ में नियंत्रण।
सर्वशक्तिमान है
जीवो का महाकाल है।
प्रकृति को नगण्न न समझ
हथियारों का भी ढाल है।
प्रकृति में सभी समाये
जानते हुए बने अनजान।
परिणाम आया मिटा शान
ज्ञानी बनकर हुई अज्ञान।
जो सत्य है जो अनंत है
निज हित में करते प्रहार।
स्वार्थपरता में डूबे
तन मन में भरा अहंकार।
क्रोध में अंधा बने हुए
हृदय में प्रेम हुआ नष्ट।
बादलों की गरज जैसे
परिणाम में छाया कष्ट।
प्रकृति से प्रेम करिये
जीवन में हर्ष छाएगा।
परिवार का मुखिया
समझे उद्धार हो जाएगा।
ऋषि-मुनियों ने गायी
दैवी प्रकृति प्रेम की।
स्वार्थ त्यागें हृदय से
जीवन को जीने की।


रचना: रमेश प्रसाद पटेल
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मंगलवार, मई 12, 2020

मां: न्यायदीप पटेल

🌸मां🌸
मां शीश झुकाता हूं,
              चरणों में बालि बालि जाता हूं।
मां की शिक्षा को,
               अमृत सा दूध पी पी जाता हूं।
उपकार हजारों हैं तेरे,
                जिसे कभी नहीं भुला सकता।
स्नेह प्रेम करुणा को,
                मैं मन से नहीं डुला सकता।
अंधकार भरे जीवन में,
                 प्रकाश मिल नहीं सकता।
बिपदओं में पड़े हो,
                  छुटकारा मिल नहीं सकता।
मां तुमने सर्वस्व दिया,
                मैं   ऋण चुका नहीं सकता।
तेरे बिछुड़ जाने पर,
                 बालक मुस्कुरा नहीं सकता।
मां की दुआ बिन,
                 जीवन सवर  नहीं   सकता।
मां की दुआएं मिल जाए,
                  कष्ट कभी हो नहीं सकता।










रचना: 
न्यायदीप पटेल कक्षा 7
पुरैना,ब्योहारी जिला
(शहडोल) मध्य प्रदेश
मो.8966093082 

रविवार, मई 10, 2020

मां:मीनाक्षी


मां
मां के चरणों में चारो धाम है,
मां को मेरा नमन बारंबार है।
मां दुआ से बिगड़े काम बन जाते हैं,
जैसे खेतों में फसल लहलहाते हैं,

मां के आंचल में ही स्वर्ग धाम है
मां को मेरा नमन बारंबार है
कष्ट  सह नव महीने पेट में पालती है मां,
जन्म से  गीले में सो सूखे में सुलाती है मां,
मां छड़ में कष्टों से  देती आराम है
मां को मेरा नमन बारंबार है
उंगली पकड़कर चलना सिखाती है मां,
अज्ञान हटा ज्ञान भंडार दिलाती है मां,
मां सेवा से ही तेरा नाम है
मां को मेरा नमन बारंबार है
त्याग करुणा ममता की मूर्ति है मां,
दुखों का सहारा कामना पूर्ति है मां,
मां की सेवा में मानो सुबह शाम है
मां को मेरा नमन बारंबार है।
जीवन जीने की कला  सिखाती है मां,
अमृत जैसा दूध पीला बड़ा बनाती मां,
मां का ऋण देने का न दाम है
मां को मेरा नमन बारंबार है।
 रचना:  मीनाक्षी पटेल
पुरैना , व्योहारी जिला
शहडोल मध्य प्रदेश
मो. 9981415300
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मां: रमेश प्रसाद


                             
मां
सुखबा  अपने भंडारे भरीला हो
मां का दर्शन करीला।
माता जी के चरणो में है चारों धाम,
बन जाएंगे तुम्हारे बिगड़े सब काम,

अमृत की गगरिया भरीला हो
मां का दर्शन करीला।
माताजी हैं सब सुखियों की खानी,
मां सेवा करे नहीं व्यर्थ जिंदगानी,

मातृशक्ति से स्नेह हैं करीला हो
मां का दर्शन करीला।
इस जग में जननी की महिमा न्यारी,
मां सेवा से दुखों से मिले छुट कारी,

अच्छे संस्कार भरीला हो
मां का दर्शन करीला।
त्याग करुणा समर्पण साक्षात मूर्ति है मां,
जीवन जीने की कला व इच्छा पूर्ति है मां,

हृदय में अपने ज्ञान भरी ला हो
मां का दर्शन करीला।।

रचना: रमेश प्रसाद पटेल
पुरैना ब्योहारी जिला
शहडोल मध्य प्रदेश
मो.9981415300
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गुरुवार, मई 07, 2020

महुआ देव:कौशल प्रसाद


महुआ देव
जय जय महुआ देव तुम्हारी लीला अपरंपार है।
हम तुम्हें नमन करते बारंबार हैं॥
कोई तुम्हें पकाकर खाता कोई तुम्हें चबाके खाता।
कोई तुम्हारी रस को उठा झकाझक पी जाता॥ 
तुम्हारे भक्त  तुमको करते इंतजार हैं।
हम सब तुम्हें नमन करते बारंबार हैं॥
                                                                   
जय जय महुआ देव  तुम्हारी लीला अपरंपार है।
हम सब नमन करते बारंबार हैं।

कोई तुम्हें खा गाना गाते,
कोई तुम्हें खा हँसते जाते।
कोई तुम्हें खा लेट जाते,
कोई तुम्हें खा गाड़ी से लुढुक जाते॥
अमृत से भी ज्यादा करते प्यार है,
हम सब नमन करते बारंबार है॥

जय जय महुआ देव  तुम्हारी लीला अपरंपार है।
हम सब तुम्हें नमन करते बारंबार है॥

बहुत से लोग तुम्हें ढूंढते,
पाकर देवों जैसे पूजते।
तुम्हारी पोल नहीं खोलते,
पीकर तुम्हें हमेशा  डोलते॥
तनधन  की इज्जत नहीं  बहुत होशियार हैं।
हम सब  तुम्हें नमन करते बारम्बार हैं॥



रचना: कौशल प्रसाद  पटेल
समाज  सेवी    
पुरैना , ब्योहारी
जिला  शहडोल  (म. प्र.)

  • आपसे अनुरोध है कि कोरोना से बचने के सभी आवश्यक उपाय किये जाएँ।
  • बहुत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर जाएँमास्क का उपयोग करें और शारीरिक दूरी बनाये रखें।
  • कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से अच्छी तरह अपने हाथों को धोएं। ऐसा कई बार करें।
  • आपकी रचनाएँ हमें हमारे ईमेल पता akbs980@gmail.com पर अथवा व्हाट्सप नंबर 8982161035 पर भेजें। कृपया अपने आसपास के लोगों को तथा विद्यार्थियों को लिखने के लिए प्रोत्साहित करने का कष्ट करें।

बुधवार, मई 06, 2020

दो कविताएँ:अमृता पटेल



(1) संतुलित भोजन
हर मानव स्वास्थ्य की कुंजी अपनाएं।
संतुलित आहार से शरीर स्वस्थ बनाए॥

पांच मूल रूप से पौष्टिक तत्व होते।
तन का संतुलित आहार कहलाते॥

प्रोटीन से शरीर का निर्माण होता।
दूध डाल व सोयाबीन में मिलता॥

कार्बोज काम करने की ताकत देता।
अनाज कंदमूल गुड़ शक्कर से मिलता॥

वसा से तन में चिकनाई व शक्ति आता।
घी तेल मछली मांस से मिलता॥

विटामिन में रोगों से लड़ने की ताकत आता।
फल सब्जियां आंवला अंकुरित दाल में मिलता॥

खनिज व लवण से तन में खून बनता।
पत्तेदार हरी सब्जियां दूध से मिलता॥

इन पांच तत्वों को जो मानव खाएगा।
अपने तन को वह स्वस्थ बनाएगा॥
(2) एकता का मन्त्र
सब मिलजुल कर हम जग में आगे बढ़ सकते।
एकता के  मंत्र से हम देश का उद्धार कर सकते॥
बाधक तत्वों का मुकाबला हम कर सकते।
जीवन का हर कार्य सहज ढंग से कर सकते॥
लक्ष्य अपनाएं  व सुख शांति को ला सकते।
एकता के मन्त्र से हम देश का उद्धार कर सकते॥
तुम सोचोगे मैं बहुत बड़ा बलशाली हूँ।
बड़ा  सा कार्य कर सकता समझो बाली हूँ॥
बिना एकता के महान कार्य नहीं कर सकते।
एकता के मन्त्र से हम देश का उद्धार कर सकते॥
दुःख को सुख में तुम बदल सकते।
कठिन से कठिन कार्य तुम कर सकते॥
सितारों के समान जग में जगमगा सकते।
एकता के मंत्र से हम देश का उद्धार कर सकते॥
-अमृता पटेल, आशा कार्यकर्त्ता
पुरैना, ब्योहारी जिला शहडोल (मध्यप्रदेश)

गुरुवार, अप्रैल 30, 2020

कोरोना का प्रभाव:रमेश प्रसाद पटेल



कोरोना का प्रभाव
(सकारात्मक प्रभाव)
कोरोना महामारी के आने से
विश्व में बहुत बड़ा सुधार हुआ
प्रकृति की सुरक्षा करना
सब जीवों से मानव का प्यार हुआ
अपने घरों में रहकर जीना
बिछड़े हुए इकट्ठा परिवार हुआ
साफ सफाई करना एवं मास्क
लगाना 1 मीटर दूरी रहना अनिवार्य हुआ
शिक्षा में सुधार करना
स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार हुआ
अच्छी शिक्षा को जागृत कर 
शोध करें वैज्ञानिक ही आधार हुआ
प्राणों की बलि वेदी में चढ़ने
स्वास्थ्य सेवकों व सैनिकों का इतिहास हुआ
सर्दी खासी और बुखार से
अपने तन को बचाएं मानो आपका उद्धार हुआ
कोरोना से बचाने में लगे
मानव समझे यह बहुत बड़ा उपकार हुआ
चापलूसों से सतर्क हुआ
सभी राष्ट्रों ने समझा भारी अनजान हुआ
विश्व धर्म एवं जाति पाति
इस जंग में सभी मानव एक साथ हुआ
सादगी जीवन अन्न जल वायु
कम खर्चों में ही मानव का श्रृंगार हुआ
परिवार में बच्चों की खुशियाँ 
मानों घर में आनंद का पारावार हुआ
इंसानियत के भाव रखना 
जग में मानव को पहली बार एहसास हुआ 
प्रकृति ही परमात्मा है
विश्व को प्रकृति से मिलकर चलना आगाज हुआ
योग करना मुसीबत से न डरना 
ऋषियों के पथ में चलना सभी को आसान हुआ
सूर्य की तपन लगने से
कोरोना वायरस जलकर निराधार हुआ
धन बचत से आपत्ति में 
सदा हमारा खर्च सुविधानुसार हुआ 
अनमोल जीवन को बचने में 
सावधानी में रहें कदम इजहार हुआ 

(नकारात्मक प्रभाव)
जग में मानव जीवन को
इस घटना से बहुत भारी नुकसान हुआ
करोड़ों मानवों को चपेट में
ला सकता बचना और बचाना दुश्वार हुआ
अर्थव्यवस्था चरमरा गई 
जग में आर्थिक संकट से जीना लाचार हुआ
बेरोजगारी की समस्या से
जूझ रहा और भी अधिक आज बेरोजगार हुआ
इस भयावह दशा को देख 
वैज्ञानिकों की दवा का न आविष्कार हुआ
आपदा की ऐसी घड़ी में
कोरोनावायरस के  जलवे से जग लाचार हुआ
निर्धन बच्चे व बूढों का रोना,
दुखों को देख धनिकों को न शर्मसार हुआ
भूख से तड़पते मजदूरों का
प्राणों को बचाने का ना कोई मझधार हुआ
अदृश्य वायरस से कर रहा युद्ध
जग में इस भारी हलचल से गुहार हुआ
मिलना जुलना बंद करो
दानवों से भी बढ़कर बड़ा आकार हुआ
आज विश्व को डुबोने चला
गहरे सागर में भी तूफान से तेजधार हुआ
समीर भी वायरस से दूषित
पर्यावरण को बचना यह संकट अंगार हुआ
प्रकृति की अनुपम छवि में
स्वार्थी मानव का बहुत बड़ा प्रहार हुआ
बिछड़ गए जीवन के सफ़र
इस जंग से बहुत यह नरसंहार हुआ
जग ने भयावह हादसा
का सदा के लिए मुसीबतों में ऋण भार हुआ
इस अपार क्षति के साथ
विश्व में महंगाई का कदम इजहार हुआ 
अब न अस्त्र-शस्त्र से
यह वायरस जंग में बहुत बड़ा हथियार हुआ
दुश्मनों को मार गिराने का
यह तलवारों का भी तलवार हुआ

रचनाकार: रमेश प्रसाद पटेल  माध्य. शिक्षक, पी. एच. डी. (शोध  अध्ययनरत) नेट हिन्दी  पुरैना, ब्योहारी  जिला शहडोल (म. प्र.) 

॥ दगाबाजों से सावधान ॥ चौपाई जब बारी ही फसल उजारे। कर दीजै तब उसे किनारे॥ विश्वासघात अंगरखा होई। त...