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सोमवार, अगस्त 03, 2020

रक्षाबंधन: अविनाश सिंह

रक्षाबंधन

*******
राखी के बंधन में बंध कर
भाई खूब है इठलाता
बहिन तेरी मैं रक्षा करूंगा
वचन यही है दोहराता।
भाई बहिन के सम्बंध में
आई है आज बहार
राखी के धागों में बंधु
होता बहिन का प्यार।
इन धागों पर न्योछावर 
खुशियां कई हजार
बाँध के धागा प्रेम का
मनाये हर वर्ष हर बार।

अविनाश सिंह
8010017450
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रविवार, अगस्त 02, 2020

हाइकु:-विषय-दोस्ती: अविनाश सिंह

हाइकु:-विषय-दोस्ती
*******
दोस्ती दिवस
आता साल में एक
लगे फरेब।

मित्र बनाओ
मन से अपनाओ
साथ निभाओ।

दोस्त हो ऐसा
बिन आंख वो देखे
तुम्हारे आँसू।

मित्र हो ऐसा
न करे भेदभाव
रहे समान।

दोस्ती हो ऐसी
कृष्ण सुदामा जैसी
देखें दुनिया।

सुख या दुःख
हो आंखों के सम्मुख
सच्चा वो मित्र।

सच के साथ
आजीवन चलता
दोस्ती का रिश्ता।

पिता का हाथ
दोस्त का दिया साथ
रहे हमेशा।

धूप में छाव
मुसीबत में साथ
रहते दोस्त।

दोस्त की बात
रहे हमेशा याद
होते है खास।

 जो हँसा देता
आँसू को सुखा देता
वही हैं मित्र।

लगाता गले
पढ़े दिल की बात
असली मित्र।

सच्ची मित्रता
दूर करता शूल
बिछाए फूल।

बाँट लो दुःख
खोल दो हर राज
दोस्तों के बीच।

मित्रता होती
सहारा जीवन का
भूल न यारा।

रखना तुम
पवित्रता से रिश्ता
चलेगी दोस्ती।

कैसे हो मित्र
जैसे भी रहे मित्र
मन पवित्र।

रहे जो साथ
पर्वत सा अडिग
वही है मित्र।

बीते जो पल
बचपन की याद
कैसे भुलाऊँ।

भूले न भूले
बचपन की बात
थे दोस्त साथ।

गिरने न दे
कभी झुकने न दे
वो यार दोस्त।

करो झगड़ा
हो जाना फिर साथ
यही है दोस्ती।

दोस्ती का धागा
मोतियों से पिरोना
दिखे सुंदर।

अविनाश सिंह
8010017450
मित्रता दिवस की ढेरों शुभकामनाएं
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सोमवार, जुलाई 20, 2020

शिक्षा सफलता के दरवाज़े खोलती है-अविनाश सिंह

शिक्षा सफलता के दरवाज़े खोलती  है-अविनाश सिंह
जिस प्रकार हमें जीने के लिए वायु की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार जीवन में सफल व्यक्ति बनने के लिए शिक्षा का बेहद महत्व है, शिक्षा के बिना जीवन में सफलता की किसी भी सीढ़ी को नही चढ़ा जा सकता है। यह किसी बच्चे के सर्वांगीण विकास से लगाये देश के विकास और सशक्तिकरण का स्तम्भ होता है।

शिक्षा का मतलब सिर्फ किताबी ज्ञान से न होकर वास्तविक ज्ञान से होना चाहिए, शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य के नैतिक मूल्यों का विकास होना चाहिए। भारत के संविधान रचयिता बाबा साहेब डॉ भीम राव अम्बेडकर जी का तीन ही सूत्र था- शिक्षा, संगठन और संघर्ष। वे आह्वान करते थे, शिक्षित करो, संगठित करो और संघर्ष करो। पढ़ो और पढ़ाओ। शिक्षा में कभी भी भेद भाव नही होता है यह सबके लिए समान होती है।

हमारे समाज में बेटियों को शिक्षा से वंचित किया जाता, उसे घर के कामों में उलझाया जाता है पिता को उसके जन्म से उसकी शादी की चिंता होती है किन्तु वही पिता उसकी शिक्षा के बारे में नही सोचता। ऐसा करना किसी पाप से कम नही है, शिक्षा शेरनी के दूध की तरह होती है जो जितना पिएगा उतना ही दहाड़ेगा। इसलिए आधी रोटी कम खाओ लेकिन अपने बच्चों को जरूर पढ़ाओ।

शिक्षा जीवन की वह कुंजी है जो सारे सफलता के दरवाजे खोल देती है,शिक्षित व्यक्ति हर जगह पूजे जाते हैं, हर जगह उन्हें सम्मान मिलता है, शिक्षा के बिना जीवन का कोई भी उद्देश्य नही है। कोई व्यक्ति गरीब या अमीर नही होता है यह शिक्षा ही है जो किसी को गरीब या अमीर बनाती है। ‘सा विद्या या विमुक्तये’ अर्थात शिक्षा वही है जो हमे मुक्ति दिलाती है। जो हमें उचित अनुचित का ज्ञान प्रदान करती है।

शिक्षा वह साधन है जिसके माध्यम से हर समस्या का हल निकाला जा सकता है हर युद्ध लड़ा जा सकता है हर कार्य को सरल और सहज बनाया जा सकता है।जो देश जितना प्रगति कर रहा है उस देश की शिक्षा का स्तर भी उतना ही ऊपर है चाहे वो अमेरिका ही क्यों न हो।

जीवन में शिक्षा का कोई अंत नही है,आप जब तक जीवित है तक तक शिक्षा ले सकते है चाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में। मैं अविनाश सिंह पूरे समाज वर्ग से यह प्रार्थना करता हूं की भले आप एक रोटी कम खाइए किन्तु अपने आने वाले भविष्य को शिक्षित जरूर करियेगा ताकि हमारा देश एक समृद्धशाली देश बन सके।

आलेख:
अविनाश सिंह
8010017450
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शुक्रवार, जुलाई 17, 2020

परीक्षा में कम अंक आने पर भी नही होना निराश या परेशान :-अविनाश सिंह


परीक्षा में कम अंक आने पर भी नही होना निराश या परेशान :-अविनाश सिंह।

जी हां,जैसा कि आपको विदित है कि बोर्ड के रिजल्ट आने  शुरू हो गए हैं और हर बोर्ड में एक से एक धुरंधर निकल रहे हैं। कोई 100 प्रतिशत तो कोई 99 प्रतिशत अंक प्राप्त कर रहा है और इसमें कुछ ऐसे भी हैं जो कि विभिन्न परिस्थितियों के कारण अनुत्तीर्ण हो रहे या कम अंक प्राप्त कर कर रहे हैं। किन्तु इसका यह मतलब नही कि जिंदगी यही खत्म हो गयी है या इसके आगे कुछ नही है।
यह तीन घंटे का पेपर आपकी जिंदगी नहीं बदल देगा, किन्तु आप यदि प्रयास करेंगे तो अनेक सफलताएं हासिल कर सकते हैं।
अक्सर अखबारों में यह पढ़ने को आ रहा कि कम अंक आने की वजह से वह डिप्रेशन या आत्मदाह कर लिया,यह एकदम अनुचित कदम है जीवन में सफल सिर्फ 90 प्रतिशत अंक लाकर नही हुआ जा सकता है इसके अन्य माध्यम भी हैं सफल होने के, जो अध्यापक आपकी कॉपी की जाँच कर रहा होगा वह भी जीवन में आपसे कम अंक प्राप्त किया होगा किन्तु आज वह इस लायक है कि आपको अंक दे रहा है।

जीवन में सफल होने का मतलब है आप एक अच्छे नागरिक बनिये, एक अच्छा बेटा बनिये, एक अच्छा शिष्य बनिये, एक अच्छा पिता बनिये, यही असली सफलता है।
परीक्षा के अंक आपको कहीं पर काम आएंगे वह भी आज के कंपीटिशन के दौर में एक काजग के टुकङे समान हैं।
अनेक ऐसे महान पुरुष हुए जो असफलता को सफलता की कुंजी माने। जिसके प्रत्यक्ष उदहारण थे राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी जो स्वयं आर्मी के चयन बोर्ड से कई बार बाहर हुए थे, किन्तु वह हिम्मत नही हारे थे और आज उन्हें मिसाइल मैन के नाम से जाना जाता है।
मैं अविनाश सिंह स्वयं एक कवि होने के नाते अपनी बात बताऊँ तो मैं शुरू से 90 प्रतिशत के ऊपर अंक प्राप्त किया अनेको बोर्ड में। किन्तु आज सारी डिग्री एक कोरे कागज के समान हैं जिसका कुछ ही महत्व है। आप स्वयं में एक यूनिक इंसान है आपके अंदर अनेक छमताएं हैं जिन्हें आपको स्वयं पहचानना है और उसपर कार्य करना है और एक दिन सफलता आपके कदमों को चूमेगी।
यदि इन सब बातों पर भी आपको विश्वास नही है तो आप अपने अभिभावकों से उनके बोर्ड के अंक पूछियेगा वो आपको स्वयं बताएंगे कि वो कितने अंक अपने समय में प्राप्त किये थे। आप यह सोचिये जो आपने पाया है वह आपकी मेहनत का फल है और मेहनत का कोई अंत नही तो इस बार कम किये मेहनत तो कम फल, अगली बार और दुगने रफ्तार से मेहनत करके और अच्छा फल प्राप्त करना है।
कभी गलत कदम उठाने से पहले अपने परिवार के सदस्यों के बारे में सोचिएगा,मैं अभिभावकों से भी अनुरोध करता हूं कि यदि आपके बच्चे के कम अंक आये हैं तो उसे प्रोत्साहित करिये कि आगे और अच्छा करें न कि उस पर दबाव बनायें या उसे प्रताड़ित करें। मैं कुछ पंक्तिया देता हूं जिसे अपने जीवन में उतारिएगा:-
सफलता दूर है पर नामुमकिन नहीं,
 कदम छोटे हों पर रुकें नहीं।
जरूरी नहीं हर किसी को मुकाम मिल जाये,
सफलता के परचम भी हर कोई फहरा जाए। मिलेगी सफलता कुछ प्रयासों के बाद,
होगी खुशी दोगुनी इसी मंजिल के साथ।
प्रयास करो, प्रयत्न करो भूल करो, अभ्यास करो,
मिलेगी सफलता  बस थोड़ा तुम विश्वास रखो।
न हारो हिम्मत बस कदम को तुम आगे बढ़ाओ,
लड़खड़ाओ अगर तो अडिग होके खड़े हो जाओ।

आलेख:-अविनाश सिंह
चलभाष: 8010017450
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मंगलवार, जुलाई 14, 2020

हाइकु:-श्रावण मास: अविनाश सिंह


हाइकु:-श्रावण मास
******************

श्रावण मास
रिमझिम बारिश
मनमोहक।

कोयल कूक
रंग बिरंगे खेत
आया सावन।

गरजे मेघ
कड़कती बिजली
चले पवन।

कजरी गाये
रोपे धान के खेत
मन को भाये।

चले बहार
रिमझिम फुहार
मिले ठंडक।

सजनी ओढ़े
हरी भरी चुनरी
खोजे साजन।

सूखी धरती
हुई जल से धन्य
आये सुगंध।

सावन माह
भोलेनाथ की पूजा
चढ़ाओ जल।

श्रावण बेला
रिमझिम फुहार
मेघ मल्हार।

साजन देख
सजनी इठलाई
खूब रिझाई।

भोले की भक्ति
राखी का है त्योहार
आया सावन।

पपीहा बोले
कहाँ हो रे साजन
आओ आँगन।

पुतरी पीटे
सखिया झूले झूला
गगन नीला।

हुआ सपना
कागज़ वाली नाव
फिर बनाओ।

दिखे नभ में
काले घने बादल
फिर उजाला।

हे भोलेनाथ
तुमसे है ये भक्ति
दो हमें शक्ति।

Ⓒअविनाश सिंह
गोरखपुर
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रविवार, जुलाई 05, 2020

वर्ण पिरामिड (कविता की नवीन विधा) :अविनाश सिंह


वर्ण पिरामिड
(1)
हे!
गुरु
आप हैं
भगवान
मार्गदर्शक
जीवन रक्षक
हमारे संरक्षक।

(2)
मैं
बड़ा
तो हुआ
पर  झुका
चरण  स्पर्श
कर हुआ धन्य
ना अब कोई गम।
(3)
वो
देखो
गरीबी
रोड पर!
गरीब नही
देश का भविष्य
रोड पे सो  रहा है।
(4)
वो
सुन
हत्यारे
तू विजय
नाम रख के
होगा पराजय
लगेगी तुझे हाय

रचना :
अविनाश सिंह
गोरखपुर
8010017450 
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अविनाश सिंह: हाइकु:-गुरु को समर्पित

अविनाश सिंह: *हाइकु:-गुरु को समर्पित*
**************************************

गुरु सम्मान
मिले स्वर्ग में स्थान
बनो महान।

जिसकी डाँट
लगती आशीर्वाद
कहते गुरु।

गुरु महिमा
दे कोयले से सोना
करो सम्मान।

राह दिखाए
अंधकार मिटाए
मान बढ़ाए।

रंक से राजा
अंधेरे से प्रकाश
गुरु बनाते।

लेना है कुछ
गुरु के आगे झुको
विन्रम बनो।

गुरु का हाथ
होता कलम समान
लिखे भविष्य।

गुरु की मार
खींचे जीवन रेखा
होता प्रसाद।

ज्ञान का बीज
कीचड़ में कमल
उगाये गुरु।

मिट्टी से घड़ा
दूधिया से भविष्य
लिख दे गुरु।

भाग्य विधाता
अंधकार मिटाता
मेरा उस्ताद।

गुरु की शिक्षा
सबसे बड़ी दीक्षा
बांध लो मुट्ठी।

मैंने जो पाया
गुरु मार्ग दिखाया
सुख ही सुख।

माँ और पिता
आरंभिक शिक्षक
अंतिम गुरु।

हुआ मैं बड़ा
पर आज भी झुकूँ
गुरु तो गुरु।

हे! गुरू (वर्ण पिरामिड विधा)
हे!
गुरु
आप हैं
भगवान
मार्गदर्शक
जीवन रक्षक
हमारे संरक्षक।

रचना :
अविनाश सिंह
गोरखपुर
8010017450 

सोमवार, जून 29, 2020

हाइकु (भारत में कविता की नयी विधा): अविनाश सिंह


1. हाइकु:-पिताजी संबंधित
*******************
पेड़ की छाया
उसके फल-फूल
होते हैं पिता।

धूप में छांंव
गागर में सागर
होते हैं पिता।

उठाये बोझ
जिम्मेदारी से दबे
होते हैं पिता।

घर की खुशी
मंदिर के देवता
होते हैं पिता।

पिता हमारे
है चाँद और तारे
लगते न्यारे।

पिता महान
दे वो जीवन दान
करो सम्मान।

पिता का प्यार
न दिखता हमेशा
है एक जैसा।

मुश्किल कार्य
हो जाते है आसान
पिता के साथ।

घर की नींव
भोजन का निवाला
जुटाये पिता।

पिता का रूप
अदृश्य महक सी
चारों तरफ।

पिता दुलारे
करे मार्गप्रशस्त
गुरु समान।

पिता की डाँट
सफलता का राज
रखना ध्यान।

घर की शान
रखे सभी का ध्यान
करो सम्मान।

2. *हाइकु:-हार या जीत*💐
********************
हार या जीत
सिक्के के दो पहलू
ना करो भेद।

हार या जीत
होते मन के भ्रम
भरे अहम।

हार या जीत
कर्म के होते फल
कम या ज्यादा।

जीत या हार
जीवन के दो मंत्र
रहो तैयार।

हार या जीत
गाड़ी-चक्का समान
उलट फेर।

हार या जीत
सावधानी से चुनो
आगे को बढ़ो।

हार या जीत
परिवर्तन शील
नही अडिग।

हार या जीत
न मिले लगातार
करो संघर्ष।

हार या जीत
मिलेगा एक दिन
मान या ठान।

हार या जीत
दे गम या अहम
रहना दूर।

हार या जीत
देगा दुख या सुख
पहले उठ।

हार या जीत
है दीपक के रूप
देता प्रकाश।

©अविनाश सिंह, नई दिल्ली।
8010017450 

बुधवार, जून 24, 2020

हाइकु : अविनाश सिंह


🌱🌱 *हाइकु*🌱🌱🌱
*---------------*

निभाना रिश्ते
निःस्वार्थ के भाव से
सच के साथ।

प्यारी दुल्हन
पूछे बड़े भाई से
कब है ब्याह।

नेता भाषण
होते कही कड़वे
गोली बम से।

मिटा दो नाम
करे जो बदनाम
देश महान।।

कोरोना काल
प्रकृति खुशहाल
लोग बेहाल।

गाँव की हवा
नही उसमें धुँआ
दे सुख चैन।

बेटी सा धन
फिर भी लोग बेचे
लोग खरीदे।

बाग बगीचे
हुए रंग बिरंगे
मन को भाए।

स्वर्ग नरक
जीवन के दो द्वार
स्वयं से चुनों।

वक़्त की मार
झेलते मजदूर
है बेकसूर।

©अविनाश सिंह
नई दिल्ली।

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हास्य कविता:-पति पत्नी संवाद:अविनाश सिंह

हास्य कविता-पति पत्नी संवाद

पति के संग हुआ बीवी का बवाल
बीबी ने दाग दिए  अनेको सवाल

करते नही  हो  तुम एक भी  काम
लगे रहते हो फ़ोन में सुबह से शाम

ऐसी क्या आफत आयी है फ़ोन में
जो लगे रहते तुम फ़ोन से सोने में

पति बेचारा शांत हो धीरे  से बोला
तुम्हारे पापा संग मैं पब्जी है खेला

बीवी को ये सुन और  गुस्सा आया
बिन कहे पति की और दौड़ लगाया

नही बनाऊंगी खाना देख लेना तुम
भूखे ही सो जाओगे  सुन लेना तुम

बेचारे पति को लगा डर लगा मनाने
शॉपिंग का लालच दे लगा बहलाने

बिन परमिशन नही  उठाऊंगा फ़ोन
कोई लड़े या कोई कर ले टेलीफोन

बस तुम्हारी  ही मैं अब बात सुनूंगा
नही किसी केसंग मैं पब्जी खेलूंगा

©अविनाश सिंह
8010017450
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शनिवार, जून 20, 2020

बीबी करती है मनमानी(हास्य कविता): अविनाश सिंह

हास्य कविता
बीबी करती है मन मानी
--------------------------
बीबी करती है मन मानी
नही बनाती है खानापानी।
कहती है कि घूमने ले चलो
पार्क की सैर कराने ले चलो।
कैसे उसे अब समझाऊँ मैं
कोरोना का डर दिखाऊँ मैं।
कहती नई साड़ी दिलाओ
मैचिंग की मास्क ले आओ।
करती घर में वो है मनमानी
नही बनाती है खाना पानी।
उसे नही किसी का भी डर है
न कोरोना का कोई भय है।
उसे तो चाहिए शॉपिंग करना
कॉस्मेटिक्स का है ढेर करना।
बहुत बड़ी घर में विपदा आयी
बीबी आज ही जिद पर आई।
कहती कोरोना से नही मैं डरती
जैसे तुमपे बेलन से वार करती।
वैसे ही कोरोना भी मैं लड़ लूँगी
उसे भी मैं घर से बाहर कर दूँगी।
बहुत बड़ी आयी घर में परेशानी
बीबी करती घर में ही मनमानी।

अविनाश सिंह
8010017450
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सोमवार, जून 15, 2020

हाइकु:-जीवन: अविनाश सिंह


🌱🌱 हाइकु:-जीवन🌱
==============
सफेद झूठ
काले सच का रंग
से रहो दूर।

डिप्रेशन हो
सबसे बात करो
यही उपाय।

पानी हो शांति
बैठो परिवार में
करो विचार।

खुद में जीना
घुट घुट मरना
बाते करना।

समस्या बड़ी
हिम्मत नही हारो
उखाड़ फेंको।

खोज लो हल।
समस्या समाधान
दूर व्यधान।

व्यर्थ न कर
जिंदगी अनमोल
रास्ते को खोज।

जीवन त्याग
नही कोई विकल्प
बनो सबल।

हारों या जीतों
नही पड़ता फर्क
आगे को बढ़।

है घोर पाप
आत्मदाह करना
कायर होना।

करो प्रयास
मिलेगी सफलता
न हो उदास।

अविनाश सिंह
8010017450
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गुरुवार, जून 11, 2020

हाइकु(जापानी विधा): अविनाश सिंह


हाइकु(जापानी विधा): अविनाश सिंह

(1)

दिखावे लोग
लगे मन को प्रिय
रहो सक्रिय।

बाग बगिया
बने स्विमिंग पूल
इंसानी भूल।

कोयल कूक
इंसानी करतूत
हुए विलुप्त।

वाणी के गुण
मिले धन सम्मान
रखना ध्यान।

कोख में हत्या
होता कानूनी जुर्म
नर्क में जन्म।

बेटी के काम
झाड़ू चौका बर्तन
बेटों से भेद।

होती पराई
गैरो के घर आई
लाडली बेटी।

कोमल हाथ
कालिख से है सने
फफोले पड़े।

सौदा में धोखा
बेटी के साथ खेल
जीवन हेल।

सपना टूटा
आकर ससुराल
हुई बेहाल।

(2)

नाम कमाओ
स्वार्थी मत हो जाओ
मान बढ़ाओ।

हाथ की रेखा
बदलते कर्मों से
ना की तंत्रों से।

धार्मिक ग्रंथ
देते शांति की शिक्षा
न करे भ्रांति।

बेटी के रूप
दुर्गा लष्मी सम्मुख
होती है पूज्य।

गंगा का जल
करे सबको निर्मल
स्वयं दूषित।

कैद परिंदे
आजाद है मनुष्य
फिर नाख़ुश।

गिर के उठो
तेजी से आगे बढ़ो
न पीछे मुड़ो।

बेटी का जन्म
खिले बाग उद्यान
समाज दुःखी।

© अविनाश सिंह
लेखक
मो. नम्बर 8010017450
पता:- लक्ष्मी नगर, नई दिल्ली 110092
संक्षिप्त परिचय:-
नाम-अविनाश सिंह    
पिता- श्री विनोद सिंह
माता-श्रीमती सुषमा सिंह
मोबाइल -8010017450   ईमेल-kaviavi8400@gmail.com
प्रकाशित संकलन:-
1-भाव्य कलश 2-अलकनंदा,3 -एहसास प्यार का,4-नीलाम्बरा5-सम्यक 6-काव्यदीप वार्षिकी 7-वो सुनहरा पल
प्राप्त सम्मान:-
युवा कवि सम्मान 2018  अलकनंदा सम्मान 2019 प्रतिभाशाली रचनाकर सम्मान साहित्य अलंकार सम्मान 2018 काव्यदीप सम्मान 2019 अमलताश सरस्वती सम्मान 2019
संपादक :-नव पल्लव साझा काव्य संकलन।
एनसीआर कोऑर्डिनेटर:- आगमन संस्था

सह जन संपर्क सचिव :- काव्यदीप संस्था 
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मंगलवार, जून 09, 2020

कुछ तो परिवर्तन होना चाहिए: अविनाश सिंह



कुछ तो परिवर्तन होना चाहिए



यूँ ही कुछ मन में आज ये ख्याल आया।  
देख  संग्रहालय  को एक सवाल आया॥
क्यों न इसका रूप ही बदल दिया जाए।
इसमें रखी चीजों  में ये जोड़ दिया जाए॥

क्या है संग्रहालय यह जानना जरूरी है।
इसके मकसद को पहचानना जरूरी है॥
रखें जाते इसमें इतिहास के प्रमुख अंश।
जो दिखाते है हमें अतीत के हमारे कर्म॥

कहीं राजा के तोप  देखने को हैं मिलते।
तो कहीं उनके पहनावे  के वस्त्र मिलते॥
देख इन सब को मन में  ये विचार आया।
क्यों  न किसी  ने इसमें परिवर्तन लाया॥

क्यों नहीं इसमें रेप के  कपड़े रखे जाएं।
जो समाज को ये असली चेहरा दिखाएं॥
क्यों नहीं  इसमें वे पत्थर रख दिये जाएं।
जो हत्या के उद्देश्य से प्रयोग किये जाते॥

आखिर यह भी तो हमारा इतिहास ही है।
जो  इस समाज के लिए एक मिशाल  है॥
लोगों को यह बात तो पता  होना चाहिए।
कितने कुकर्मी हैं लोग ये दिखना चाहिए॥

क्यों न खून से सने कपड़े रखे दिए जाते।
आखिर यह भी लोगों के कर्म का फल है॥
क्यों न उसके अस्थियों को संजोया जाए।
उसपे जो बीती है वो कहानी लिखी जाए॥

देख बंदूक हम अक्सर यह सोचने लगते।
आखिर कैसे लड़ते होंगे यह पूछने लगते॥
फिर जब ये मासूम के कपड़े लोग देखेंगे।
तो उसकी उम्र का सवाल तो जरूर पूछेंगे॥

असली मकसद  संग्रहालय का पूरा होगा।
इस पीड़ा  को देख मन आग बबूला होगा॥
फिर कल किसी  बेटी बहू का न रेप होगा।
यही  इस कविता का असली संदेश होगा॥

© अविनाश सिंह
लेखक
मो. नम्बर 8010017450
पता:-लक्ष्मी नगर, नई दिल्ली 110092
संक्षिप्त परिचय:-
नाम-अविनाश सिंह    
पिता- श्री विनोद सिंह
माता-श्रीमती सुषमा सिंह
मोबाइल -8010017450   ईमेल-kaviavi8400@gmail.com
प्रकाशित संकलन:-
1-भाव्य कलश 2-अलकनंदा,3 -एहसास प्यार का,4-नीलाम्बरा5-सम्यक 6-काव्यदीप वार्षिकी 7-वो सुनहरा पल
प्राप्त सम्मान:-
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संपादक :-नव पल्लव साझा काव्य संकलन।
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॥ दगाबाजों से सावधान ॥ चौपाई जब बारी ही फसल उजारे। कर दीजै तब उसे किनारे॥ विश्वासघात अंगरखा होई। त...