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रविवार, अगस्त 02, 2020

हाइकु:-विषय-दोस्ती: अविनाश सिंह

हाइकु:-विषय-दोस्ती
*******
दोस्ती दिवस
आता साल में एक
लगे फरेब।

मित्र बनाओ
मन से अपनाओ
साथ निभाओ।

दोस्त हो ऐसा
बिन आंख वो देखे
तुम्हारे आँसू।

मित्र हो ऐसा
न करे भेदभाव
रहे समान।

दोस्ती हो ऐसी
कृष्ण सुदामा जैसी
देखें दुनिया।

सुख या दुःख
हो आंखों के सम्मुख
सच्चा वो मित्र।

सच के साथ
आजीवन चलता
दोस्ती का रिश्ता।

पिता का हाथ
दोस्त का दिया साथ
रहे हमेशा।

धूप में छाव
मुसीबत में साथ
रहते दोस्त।

दोस्त की बात
रहे हमेशा याद
होते है खास।

 जो हँसा देता
आँसू को सुखा देता
वही हैं मित्र।

लगाता गले
पढ़े दिल की बात
असली मित्र।

सच्ची मित्रता
दूर करता शूल
बिछाए फूल।

बाँट लो दुःख
खोल दो हर राज
दोस्तों के बीच।

मित्रता होती
सहारा जीवन का
भूल न यारा।

रखना तुम
पवित्रता से रिश्ता
चलेगी दोस्ती।

कैसे हो मित्र
जैसे भी रहे मित्र
मन पवित्र।

रहे जो साथ
पर्वत सा अडिग
वही है मित्र।

बीते जो पल
बचपन की याद
कैसे भुलाऊँ।

भूले न भूले
बचपन की बात
थे दोस्त साथ।

गिरने न दे
कभी झुकने न दे
वो यार दोस्त।

करो झगड़ा
हो जाना फिर साथ
यही है दोस्ती।

दोस्ती का धागा
मोतियों से पिरोना
दिखे सुंदर।

अविनाश सिंह
8010017450
मित्रता दिवस की ढेरों शुभकामनाएं
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मंगलवार, जुलाई 14, 2020

हाइकु:-श्रावण मास: अविनाश सिंह


हाइकु:-श्रावण मास
******************

श्रावण मास
रिमझिम बारिश
मनमोहक।

कोयल कूक
रंग बिरंगे खेत
आया सावन।

गरजे मेघ
कड़कती बिजली
चले पवन।

कजरी गाये
रोपे धान के खेत
मन को भाये।

चले बहार
रिमझिम फुहार
मिले ठंडक।

सजनी ओढ़े
हरी भरी चुनरी
खोजे साजन।

सूखी धरती
हुई जल से धन्य
आये सुगंध।

सावन माह
भोलेनाथ की पूजा
चढ़ाओ जल।

श्रावण बेला
रिमझिम फुहार
मेघ मल्हार।

साजन देख
सजनी इठलाई
खूब रिझाई।

भोले की भक्ति
राखी का है त्योहार
आया सावन।

पपीहा बोले
कहाँ हो रे साजन
आओ आँगन।

पुतरी पीटे
सखिया झूले झूला
गगन नीला।

हुआ सपना
कागज़ वाली नाव
फिर बनाओ।

दिखे नभ में
काले घने बादल
फिर उजाला।

हे भोलेनाथ
तुमसे है ये भक्ति
दो हमें शक्ति।

Ⓒअविनाश सिंह
गोरखपुर
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रविवार, जुलाई 05, 2020

अविनाश सिंह: हाइकु:-गुरु को समर्पित

अविनाश सिंह: *हाइकु:-गुरु को समर्पित*
**************************************

गुरु सम्मान
मिले स्वर्ग में स्थान
बनो महान।

जिसकी डाँट
लगती आशीर्वाद
कहते गुरु।

गुरु महिमा
दे कोयले से सोना
करो सम्मान।

राह दिखाए
अंधकार मिटाए
मान बढ़ाए।

रंक से राजा
अंधेरे से प्रकाश
गुरु बनाते।

लेना है कुछ
गुरु के आगे झुको
विन्रम बनो।

गुरु का हाथ
होता कलम समान
लिखे भविष्य।

गुरु की मार
खींचे जीवन रेखा
होता प्रसाद।

ज्ञान का बीज
कीचड़ में कमल
उगाये गुरु।

मिट्टी से घड़ा
दूधिया से भविष्य
लिख दे गुरु।

भाग्य विधाता
अंधकार मिटाता
मेरा उस्ताद।

गुरु की शिक्षा
सबसे बड़ी दीक्षा
बांध लो मुट्ठी।

मैंने जो पाया
गुरु मार्ग दिखाया
सुख ही सुख।

माँ और पिता
आरंभिक शिक्षक
अंतिम गुरु।

हुआ मैं बड़ा
पर आज भी झुकूँ
गुरु तो गुरु।

हे! गुरू (वर्ण पिरामिड विधा)
हे!
गुरु
आप हैं
भगवान
मार्गदर्शक
जीवन रक्षक
हमारे संरक्षक।

रचना :
अविनाश सिंह
गोरखपुर
8010017450 

सोमवार, जून 29, 2020

हाइकु (भारत में कविता की नयी विधा): अविनाश सिंह


1. हाइकु:-पिताजी संबंधित
*******************
पेड़ की छाया
उसके फल-फूल
होते हैं पिता।

धूप में छांंव
गागर में सागर
होते हैं पिता।

उठाये बोझ
जिम्मेदारी से दबे
होते हैं पिता।

घर की खुशी
मंदिर के देवता
होते हैं पिता।

पिता हमारे
है चाँद और तारे
लगते न्यारे।

पिता महान
दे वो जीवन दान
करो सम्मान।

पिता का प्यार
न दिखता हमेशा
है एक जैसा।

मुश्किल कार्य
हो जाते है आसान
पिता के साथ।

घर की नींव
भोजन का निवाला
जुटाये पिता।

पिता का रूप
अदृश्य महक सी
चारों तरफ।

पिता दुलारे
करे मार्गप्रशस्त
गुरु समान।

पिता की डाँट
सफलता का राज
रखना ध्यान।

घर की शान
रखे सभी का ध्यान
करो सम्मान।

2. *हाइकु:-हार या जीत*💐
********************
हार या जीत
सिक्के के दो पहलू
ना करो भेद।

हार या जीत
होते मन के भ्रम
भरे अहम।

हार या जीत
कर्म के होते फल
कम या ज्यादा।

जीत या हार
जीवन के दो मंत्र
रहो तैयार।

हार या जीत
गाड़ी-चक्का समान
उलट फेर।

हार या जीत
सावधानी से चुनो
आगे को बढ़ो।

हार या जीत
परिवर्तन शील
नही अडिग।

हार या जीत
न मिले लगातार
करो संघर्ष।

हार या जीत
मिलेगा एक दिन
मान या ठान।

हार या जीत
दे गम या अहम
रहना दूर।

हार या जीत
देगा दुख या सुख
पहले उठ।

हार या जीत
है दीपक के रूप
देता प्रकाश।

©अविनाश सिंह, नई दिल्ली।
8010017450 

बुधवार, जून 24, 2020

हाइकु : अविनाश सिंह


🌱🌱 *हाइकु*🌱🌱🌱
*---------------*

निभाना रिश्ते
निःस्वार्थ के भाव से
सच के साथ।

प्यारी दुल्हन
पूछे बड़े भाई से
कब है ब्याह।

नेता भाषण
होते कही कड़वे
गोली बम से।

मिटा दो नाम
करे जो बदनाम
देश महान।।

कोरोना काल
प्रकृति खुशहाल
लोग बेहाल।

गाँव की हवा
नही उसमें धुँआ
दे सुख चैन।

बेटी सा धन
फिर भी लोग बेचे
लोग खरीदे।

बाग बगीचे
हुए रंग बिरंगे
मन को भाए।

स्वर्ग नरक
जीवन के दो द्वार
स्वयं से चुनों।

वक़्त की मार
झेलते मजदूर
है बेकसूर।

©अविनाश सिंह
नई दिल्ली।

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सोमवार, जून 15, 2020

हाइकु:-जीवन: अविनाश सिंह


🌱🌱 हाइकु:-जीवन🌱
==============
सफेद झूठ
काले सच का रंग
से रहो दूर।

डिप्रेशन हो
सबसे बात करो
यही उपाय।

पानी हो शांति
बैठो परिवार में
करो विचार।

खुद में जीना
घुट घुट मरना
बाते करना।

समस्या बड़ी
हिम्मत नही हारो
उखाड़ फेंको।

खोज लो हल।
समस्या समाधान
दूर व्यधान।

व्यर्थ न कर
जिंदगी अनमोल
रास्ते को खोज।

जीवन त्याग
नही कोई विकल्प
बनो सबल।

हारों या जीतों
नही पड़ता फर्क
आगे को बढ़।

है घोर पाप
आत्मदाह करना
कायर होना।

करो प्रयास
मिलेगी सफलता
न हो उदास।

अविनाश सिंह
8010017450
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गुरुवार, जून 11, 2020

हाइकु(जापानी विधा): अविनाश सिंह


हाइकु(जापानी विधा): अविनाश सिंह

(1)

दिखावे लोग
लगे मन को प्रिय
रहो सक्रिय।

बाग बगिया
बने स्विमिंग पूल
इंसानी भूल।

कोयल कूक
इंसानी करतूत
हुए विलुप्त।

वाणी के गुण
मिले धन सम्मान
रखना ध्यान।

कोख में हत्या
होता कानूनी जुर्म
नर्क में जन्म।

बेटी के काम
झाड़ू चौका बर्तन
बेटों से भेद।

होती पराई
गैरो के घर आई
लाडली बेटी।

कोमल हाथ
कालिख से है सने
फफोले पड़े।

सौदा में धोखा
बेटी के साथ खेल
जीवन हेल।

सपना टूटा
आकर ससुराल
हुई बेहाल।

(2)

नाम कमाओ
स्वार्थी मत हो जाओ
मान बढ़ाओ।

हाथ की रेखा
बदलते कर्मों से
ना की तंत्रों से।

धार्मिक ग्रंथ
देते शांति की शिक्षा
न करे भ्रांति।

बेटी के रूप
दुर्गा लष्मी सम्मुख
होती है पूज्य।

गंगा का जल
करे सबको निर्मल
स्वयं दूषित।

कैद परिंदे
आजाद है मनुष्य
फिर नाख़ुश।

गिर के उठो
तेजी से आगे बढ़ो
न पीछे मुड़ो।

बेटी का जन्म
खिले बाग उद्यान
समाज दुःखी।

© अविनाश सिंह
लेखक
मो. नम्बर 8010017450
पता:- लक्ष्मी नगर, नई दिल्ली 110092
संक्षिप्त परिचय:-
नाम-अविनाश सिंह    
पिता- श्री विनोद सिंह
माता-श्रीमती सुषमा सिंह
मोबाइल -8010017450   ईमेल-kaviavi8400@gmail.com
प्रकाशित संकलन:-
1-भाव्य कलश 2-अलकनंदा,3 -एहसास प्यार का,4-नीलाम्बरा5-सम्यक 6-काव्यदीप वार्षिकी 7-वो सुनहरा पल
प्राप्त सम्मान:-
युवा कवि सम्मान 2018  अलकनंदा सम्मान 2019 प्रतिभाशाली रचनाकर सम्मान साहित्य अलंकार सम्मान 2018 काव्यदीप सम्मान 2019 अमलताश सरस्वती सम्मान 2019
संपादक :-नव पल्लव साझा काव्य संकलन।
एनसीआर कोऑर्डिनेटर:- आगमन संस्था

सह जन संपर्क सचिव :- काव्यदीप संस्था 
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मंगलवार, जून 09, 2020

कुछ तो परिवर्तन होना चाहिए: अविनाश सिंह



कुछ तो परिवर्तन होना चाहिए



यूँ ही कुछ मन में आज ये ख्याल आया।  
देख  संग्रहालय  को एक सवाल आया॥
क्यों न इसका रूप ही बदल दिया जाए।
इसमें रखी चीजों  में ये जोड़ दिया जाए॥

क्या है संग्रहालय यह जानना जरूरी है।
इसके मकसद को पहचानना जरूरी है॥
रखें जाते इसमें इतिहास के प्रमुख अंश।
जो दिखाते है हमें अतीत के हमारे कर्म॥

कहीं राजा के तोप  देखने को हैं मिलते।
तो कहीं उनके पहनावे  के वस्त्र मिलते॥
देख इन सब को मन में  ये विचार आया।
क्यों  न किसी  ने इसमें परिवर्तन लाया॥

क्यों नहीं इसमें रेप के  कपड़े रखे जाएं।
जो समाज को ये असली चेहरा दिखाएं॥
क्यों नहीं  इसमें वे पत्थर रख दिये जाएं।
जो हत्या के उद्देश्य से प्रयोग किये जाते॥

आखिर यह भी तो हमारा इतिहास ही है।
जो  इस समाज के लिए एक मिशाल  है॥
लोगों को यह बात तो पता  होना चाहिए।
कितने कुकर्मी हैं लोग ये दिखना चाहिए॥

क्यों न खून से सने कपड़े रखे दिए जाते।
आखिर यह भी लोगों के कर्म का फल है॥
क्यों न उसके अस्थियों को संजोया जाए।
उसपे जो बीती है वो कहानी लिखी जाए॥

देख बंदूक हम अक्सर यह सोचने लगते।
आखिर कैसे लड़ते होंगे यह पूछने लगते॥
फिर जब ये मासूम के कपड़े लोग देखेंगे।
तो उसकी उम्र का सवाल तो जरूर पूछेंगे॥

असली मकसद  संग्रहालय का पूरा होगा।
इस पीड़ा  को देख मन आग बबूला होगा॥
फिर कल किसी  बेटी बहू का न रेप होगा।
यही  इस कविता का असली संदेश होगा॥

© अविनाश सिंह
लेखक
मो. नम्बर 8010017450
पता:-लक्ष्मी नगर, नई दिल्ली 110092
संक्षिप्त परिचय:-
नाम-अविनाश सिंह    
पिता- श्री विनोद सिंह
माता-श्रीमती सुषमा सिंह
मोबाइल -8010017450   ईमेल-kaviavi8400@gmail.com
प्रकाशित संकलन:-
1-भाव्य कलश 2-अलकनंदा,3 -एहसास प्यार का,4-नीलाम्बरा5-सम्यक 6-काव्यदीप वार्षिकी 7-वो सुनहरा पल
प्राप्त सम्मान:-
युवा कवि सम्मान 2018  अलकनंदा सम्मान 2019 प्रतिभाशाली रचनाकर सम्मान साहित्य अलंकार सम्मान 2018 काव्यदीप सम्मान 2019 अमलताश सरस्वती सम्मान 2019
संपादक :-नव पल्लव साझा काव्य संकलन।
एनसीआर कोऑर्डिनेटर:- आगमन संस्था

सह जन संपर्क सचिव :- काव्यदीप संस्था 
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शुक्रवार, मई 15, 2020

हाइकु (कविता): कोमल चंद


 हाइकु

1

आस लगाए
बीस लाख करोड़
भूखा गरीब।

      2

सतरंगी हैं
योजनाएं संसद
बेरंग देश।

       3

बांध बनाए
हरे-हरे बगीचे
सूखा किसान।

        4

मंत्री, संसद
सब लोक सेवक
बेवा औरत।

       5

सुविधा दिल्ली
सपने घर-घर
अंधेरा चांद।

        6

स्कूल, कॉलेज
सब साक्षर होगे
नई रोशनी।

        7

बेटा-बेटी हैं
मंत्री लोकसभा में
कई घोटाला।

        8

देश-सेवा में
शहीद होने वाला
गुमशुदा है।

        9

दूरी,नाप ली
मेहनत कारों ने
रोटी के वास्ते।

         10

छुआछूत है
जाति व्यवस्था भी है
छिनी सुविधा।

          11

कोरोना आया
कर दिया सबको
आत्मनिर्भर।

          12

बारिश बूंदें
पूछें जब खेत को
समस्या बड़ी।

          13

खुद खुशी के
गीत गाए उसने
खंडित प्रेम।

           14

श्रम बूंदें हैं
भूख से झुका हुआ
है! अन्नदाता

            15

बसंती हवा
अलसी की चादर
मिटती थाप।
रचना: कोमल चंद कुशवाहा
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॥ दगाबाजों से सावधान ॥ चौपाई जब बारी ही फसल उजारे। कर दीजै तब उसे किनारे॥ विश्वासघात अंगरखा होई। त...