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बुधवार, फ़रवरी 08, 2023

संत शिरोमणि रविदास जी की पुण्य जयंती पर ....मनोज कुमार चंद्रवंशी की कविता

संत शिरोमणि रविदास जी के पुण्य जयंती पर ....
                            (१)
जाति  पांति  छुआछूत    उद्धारक अग्रदूत,
क्रांतिकारी    रविदास     जगत   महान हैं।

रवि संत  शिरोमणि  करें   चिंता  हर  घड़ी,
समाज   के  सुधार  में    बहु   योगदान है।

कर्म योगी ज्ञान वान उर  तल  स्वाभिमान,
ब्रम्हा  लीन  रविदास  पुण्य  शीलवान  है।

निर्मल  भाव  उनके  समदर्शी  थे  मन के,
अंध  भक्ति  नष्ट कर   दिए  सद्  ज्ञान है।

                          (२)
पाखंडवाद था व्याप गुरुजी किए समाप्त,
सामाजिक  अग्रदूत   अलख   जगाएं  हैं।

भेदभाव  ऊॅंच नीच धरा में मचा था कीच,
लिए   अवतार   गुरु   तिमिर   मिटाएं हैं।

कर्मनिष्ट  रविदास,  कहता  है  इतिहास,
उदार वान  व्यक्तित्व सुकीर्ति कमाएं हैं।

वो ज्ञान तर्क भंडार मानवता के आधार,
ईश्वरीय  भक्ति भाव जग  में  फैलाएं हैं।

                      रचना
            मनोज कुमार चंद्रवंशी

रविवार, जुलाई 04, 2021

वाणी (दोहा): मनोज कुमार चंद्रवंशी की कविता

वाणी (दोहा) 

ऐसी  वाणी  बोलिए,   जिसमें  होय मिठास।
सुनकर मधुरस सम लगे,आवे जिमे मिठास॥

वाणी रम्य आभूषण,    वाणी  है   अनमोल।
सबको  मनभावन  लगे,  ऐसी  वाणी बोल॥

सुडौल  वाणी बोलिए,  वाणी महिम अपार।
वाणी से झलकन लगे,  सदा सद् व्यवहार॥

वाणी  ही  श्रृंगार  है,   वाणी  औषधि मूल।
वाणी  से बन जाए,   ये  जीवन  अनुकूल॥

वाणी  जीवन मंत्र है,  सदा  दिलाता  मान।
कर्कश वाणी कटु लगे,मिले सदाअपमान॥

कोयल कूकत डार में,  करती कुहू पुकार।
काका वाणी कटु लगे,करते सभी दुत्कार॥

ऐसी वाणी बोलिए, खुशियाँ  मिले अपार।
मीठी वाणी मधु लगे, हो  वाणी   में सार॥

वाणी तन शोभित करे, वाणी है परिधान।
बदन झलके वाणी से,  वाणी है पहचान॥
कृपया इन्हें भी देखें:-  

सपना (कविता) : सुरेन्द्र कुमार पटेल


                         रचना:
               स्वरचित एवं मौलिक
              मनोज चन्द्रवंशी "मौन"
       बेलगवाँ जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश 

शनिवार, जुलाई 03, 2021

सावन आयो (मत्तगयन्द सवैया) मनोज चंद्रवंशी sawan aayo sawan par kavita

🌹मत्तगयन्द सवैया 🌹
sawan aayo sawan par kavita

विधान 211,211,211,211,211,211,211,22
भानस×7 +2 गुरु= एक चरण

मेघ चले  अब  बारिस लेकर,
              अंबर में  अब  बादल  छायो।
शीतल मंद चले  अब मारुत,
              भू पर  पावन  सावन आयो॥

सावन  माह  लगे   मनभावन,
              कूकत कोयल कानन  भायो।
नाचत  मोर   चराचर  मोहित,
              मेघ  सुहावन  बारिश  लायो॥

कोकिल तान सभी सुनो अब,
             कोयल की सुर मीठ जुबानी।
भीग गयी अब भू तल अंबर,
             सावन का बरसात सुहानी॥

सावन गीत अली मिल गावत।
             मीठ मनोहर गीत सुहायो।
डारन में सखियाँ सब झूलन,
            मोहक झूलनियाँ मन भायो॥


                      रचना
            स्वरचित एवं मौलिक
     मनोज कुमार चन्द्रवंशी मौन
  बेलगवाँ जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश 

बुधवार, जून 30, 2021

बरसात पर मनोज कुमार चंद्रवंशी की एक अच्छी कविता

बरसात का मौसम

रिमझिम - रिमझिम बरसो घनश्याम,
प्यासी धरती माँ  का प्यास मिटाओ।
नन्हा सुप्त बीजअंकुरित हों खेतों में,
प्रकृति की  गोद में हरियाली लाओ॥

धरा  का  तीक्ष्ण  तपन  मंद हो गई,
सुखद  बरसात का मौसम आने से।
सर्व चराचर शीतलता की अनुभूति,
चहुँ ओर  काली घटा  छा जाने से॥

भीषण उष्णता का हुआ गृह गमन।
धरा  में  चहुँ  ओर  हरियाली छाई,
प्रकृति  परिदृश्य  अति मनभावन॥

काली   घटाओं  के  तीव्र गर्जना से,
कानन  में  नाचे   मोर  पंख  पसार।
द्रुम डाल पर कलियाँ प्रस्फुटित हुई,
विहग  फुदक  रहें हैं वृक्षों के डार॥

उमड - घुमड  कर  काले  मेघ चले,
शीतल,  मंद,  सुगंध  चले  पुरवाई।
टप टिप-टप टिप धरा में मेघ बरसे,
सकल वसुंधरा में हरियाली छायी॥

हरित - हरीतिमा धरा  की  परिधान,
कृषक खेतों में श्रम साधना करतें हैं।
खग,मृग,मोर, पपीहा, मुदित होकर ,
कानन में स्वच्छंद विचरण करते हैं॥

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बारिश barish, बारिश और धरती barish aur dharti

                 ✍रचना
         स्वरचित एवं मौलिक
          मनोज चन्द्रवंशी मौन
बेलगवाँ जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश 

वृक्ष पर कविता : मनोज कुमार चंद्रवंशी

वृक्ष (चौपाई)


पादप   जगत   हरे  परितापा।
मिटे  दुख अरु  मिटे  संतापा॥
विटप दल  लता  महि  श्रृंगारा।
तरु तृण मनुज प्राण आधारा॥

                        तरुवर  भूषण   बहुत  सुहाई।
                        बेला  हरित  पर्ण  मन  भायी॥
                        झुरमुट कानन दल मन मोहा।
                        सुरम्य  वन  प्रसून दल सोहा॥
 
पादप   जगत  जीव  रखवारे।
कानन  तरु  दल प्रानन प्यारे॥
तरुवर सरस सुहृद फल दीन्हा,
सकल अंग प्रमुदित कर दीन्हा॥

                      मिलकर एक एक वृक्ष लगावा।
                      मेदिनीआँचल अति मन भावा॥
                      अवनि   हरीतिमा अति सुहाई।
                      रोपित   तरु  जीवन सुखदाई॥

         तरु सलिलअरु समीर प्रदाता।
         सकल  चराचर   हरते  त्राता॥
         हरित  वृक्ष  सौ  पुत्र  समाना।
         करे बखान"मनोज" सुजाना॥
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                     रचना
         स्वरचित एवं मौलिक
       मनोज कुमार चन्द्रवंशी 
बेलगवाँ जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश 

कविता(काव्य): मनोज कुमार चंद्रवंशी की कविता पर कविता

'कविता' पर कविता 


कविता अनमोल भावों से सुसज्जित,
वसुंधरा  में   पीयूष  होकर  बहती है।
हृदय के  असीम  गहराइयों से उपजे,
भाव -भंगिमाओं  को  बयां करती है॥

सुधि पाठक काव्य का रसपान कर,
रसस्वादन   को हृदयंगम   करते हैं।
अलौकिक  आनंद  की अनुभूति को,
 कवि वृंद  लेखनी से  बयाँ  करते हैं॥

प्रस्फुटित  काव्य  की  प्रत्येक  बूंद में,
साहित्य  का  अथाह  वेग  समायी है।
मृद कविता साहित्य को उत्कृष्ट  कर,
साहित्य  को भाव  प्रधान बनायी है॥

कोमल  कविता  में  शब्द अगणित हैं,
काव्य भाव प्रवाह का आदि न अंत।
कविता  सरस,  सुहृद  मधुरस  सम,
काव्य  सौंदर्य  का  अनुभूति अनंत॥

काविता में  कवि का मर्म तिरोहित,
कविता मार्मिक भावों का चित्रण है।
कविता की हर पंक्तियां हृदयस्पर्शी,
काव्य जीवन यथार्थ का चित्रण है॥
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                     रचना
          स्वरचित एवं मौलिक
        मनोज कुमार चन्द्रवंशी
बेलगवाँ जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश
 

रविवार, नवंबर 15, 2020

दीपोत्सव: मनोज कुमार चंद्रवंशी

🎆दीपोत्सव🎆

आओ पावन  धरा में  अंतर्मन  का दीप  जलाएँ,
हृदय   से   कलुषता,  पापाचार   अवसान  करें।
धरा  में  समरसता, सद्भाव   का  रसधार बहायें,
हर दीन - हीन के  घर में  दीप  प्रज्वलित  करें॥

दीपोत्सव का सकल वसुधा में खुशियाँ छाया है,
घर-द्वार में दीपों का झिलमिल  असंख्य कतार।
दीप  ज्योत्सना  से हृदय  तिमिर अवसान  करें,
हर्षोल्लास से मनाएँ दिवाली का पावन त्यौहार॥

दिवाली  के  शुभ  मुहूर्त  में   उत्तुंग  उमंग  तरंग,
हर शोषित, वंचित  जनों  के  घर  में दीवाली हो।
कुम्हार  कृत  के  सौंधी  मिट्टी  का  दीप जलाएँ,
हर  असहाय  निबलों  के घर  में  खुशहाली हो॥

एक दीप  प्रज्वलित  करें  उन  शहीदों के नाम,
जो मातृभूमि के रक्षार्थ सरहद में बलिदान हुए।
भारत भूमि  की  सेवार्थ  अटल  प्रहरी बनकर,
जो सर्वस्व न्योछावर कर सरहद में कुर्बान हुए॥

पटाखों के धूम से  पर्यावरण  प्रदूषित  ना करें,
अंतर्मन का दीप प्रज्वलित कर दैदीप्यमान हो।
उम्मीदों का  चिराग  जीवन में कभी बुझे नहीं,
सौहार्द,भ्रातृत्व अपनाकर स्व प्रकाशमान हो॥


                      ✍रचना
               स्वरचित एवं मौलिक
              मनोज कुमार चंद्रवंशी
      बेलगवाँ जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश

रविवार, नवंबर 01, 2020

दहेज प्रथा: मनोज कुमार चंद्रवंशी

दहेज प्रथा

दहेज प्रथा जग में  आतंकवाद  का  पर्याय,
बेटी निष्ठुर,  निर्मम दरिंदों  के  शिकार  हुई।
बेटी    सिसकियाँ   हरदम   लेती   रहती है,
पावन  सी  धरा  में  बेटी  की अपकार हुई॥

बेटी  पितृ  हृदय   आँगन  की    राजकुमारी,
पर  घर  में  कुछ  अरमान  लेकर  आई  थी।
कातिलों   के   द्वारा   बेटी  अपमानित  हुई,
बेटी  पति के घर  मेहंदी  रचा कर आई थी॥

बेटी    की    जीवन    चमन   उजड़    गया,
बेटी   की   हृदय  में   अंतर्द्वंद  चल  रहा है।
बेटी   की   जीवन   उमंग   गमगमीन  हुआ,
नित  हृदय  में  क्रोध  की  अग्नि  जल रहा॥

बेटी   धरा  में   अभिशाप  नहीं   वरदान  है,
गुनाहगारो बेटी के सह अत्याचार  बंद करो।
दहेज के  लोभी  बेटी को  प्रताड़ित  ना कर,
बेटी   के   साथ  कुकृत्य  करना  बंद  करो॥

हाय!बेटी जीवन चमन की  प्रस्फुटित कली,
तुम्हारी  जीवन  करुण  क्रंदनमय  हो गया।
स्वार्थ सिद्धि के कारण तुम अपमानित हुई,
दहेज की ज्वाला  से तन, मन, बेदग्ध हुआ॥

                        रचना
             स्वरचित एवं मौलिक
           मनोज कुमार चंद्रवंशी
  बेलगवाँ जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश गान : मनोज कुमार चंद्रवंशी

🌹मध्य प्रदेश गान🌹

स्वर्णिम   भारत   के   हृदय   स्थल  में  बसा,
जिसकी गौरव गाथा सकल जग में अशेष है।
जहाँ पर  ज्ञान - विज्ञान   का  अनुपम संगम,
आश्रय   का   दाता   अपना  मध्य  प्रदेश है॥

धन -  धान्य,  तांबा,   मैग्नीज   से   परिपूर्ण
जहाँ की  मनोहारी  प्रकृतिक छटा विशेष है,
माँ  नर्मदा  की   शुचि   निर्मल  धारा  बहती
कला, शिल्प का संगम अपना मध्यप्रदेश है॥

कालिदास,  भृतहरी   साहित्य  सृजन  किये,
जहाँ पर समरसता सद्भाव ना राग ना द्वेष है।
महाकालेश्वर,  कपिल   मुनि  का  तपोस्थली,
संस्कृति  का  यश गान अपना मध्य प्रदेश है॥

साहित्य   साधकों  का  पावन  कर्म  स्थली,
माखनलाल,भवानी प्रसाद का कीर्ति विशेष।
बहुमूल्य खनिज संपदा का अतुलित भंडार,
वेदों की वाणी,कल्याणी अपना मध्यप्रदेश है॥

खजुराहो शिल्प  तीर्थ  का रम्य उद्भव स्थल,
जहाँ  सिद्धि  विनायक  मंदिर भग्नावशेष है।
महेश्वरम,भृगु कमंडल,सोनमुड़ा, सांची स्तूप,
सुख समृद्धि का  दाता अपना  मध्यप्रदेश है॥

                        ✍रचना
                  स्वरचित एवं मौलिक
                 मनोज कुमार चंद्रवंशी
        बेलगवाँ जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश

शनिवार, अक्टूबर 31, 2020

भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल (कविता): मनोज कुमार चंद्रवंशी

भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल
                          (कविता)

            सरदार   जी   का  जीवन  दर्शन,
            हम  सबके  लिए अनुकरणीय है।
            कर्मयोगी लौह पुरुष का योगदान,
            सियासत की धरा में अतुलनीय है॥
सरदार   पटेल    युग  प्रवर्तक  के   सच्चे  अवतारी थे।
दूर दृष्टा,   देशभक्त   मातृभूमि   के   परम   पूजारी थे॥

            प्रतिभा  के बहुमुखी  सरदार पटेल,
            बारडोली सत्याग्रह  में  आगे आए।
            महिलाएं   पटेल  को  उपनाम दिये,
           भारत में पटेल"लौह पुरुष"कहलाए॥
मन, वचन, कर्म से  भारतीय  संस्कृति  के संवाहक थे।
सरदार  अटल, निर्भीक  वर्ग विरोध  के  जननायक थे॥

           न्याय  प्रिय,   यथार्थवादी  पटेल,
           युग  दृष्टा,   साहित्य  साधक  थे।
           दीन- हीन वर्गों के मसीहा  पटेल,
           निज  मातृभूमि  के  आराधक थे॥
पटेलअनुशासन प्रिय,त्वरित निर्णय लेने की क्षमता था।
राज्य  एकीकरण  के अग्रदूत के हृदय में मानवता था॥

          राजनीति    एकता   के  सूत्रधार,
          संगठन शक्ति को  मजबूत किए।
          परतंत्रता की आंधी को रोक कर,
          "लौह पुरुष" होने का सबूत  दिए॥
सेवाभावी  पटेल "बिस्मार्क" के  नाम  से  प्रसिद्ध  हुए।
तन, मन से सियासत  एकीकरण यज्ञ को सिद्ध  किए॥

          अखंड भारत के स्वर्णिम सपनों को,
          सरदार   पटेल   जी  साकार  किये।
          प्रथम गृह मंत्री के पद में सुशोभित,
          राष्ट्रीय  एकता  को  मजबूत  किए॥
कर्मनिष्ट, मितभाषी, मृदुभाषी  जन-जन के  नायक थे।
प्रतिभावान, विराट व्यक्तित्व पटेल सब  के लायक थे॥

                         ✍रचना
                 (स्वरचित एवं मौलिक)
                 मनोज कुमार चंद्रवंशी
        बेलगवाँ जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश

सोमवार, सितंबर 14, 2020

"हिंदी राष्ट्र धरोहर है" (कविता): मनोज कुमार चंद्रवंशी

हिंदी राष्ट्र धरोहर है

हिंदी  संस्कृति  सुता बहु  भाषाओं की  जननी है,
हिंदी नव विवाहिता सदृश्य मस्तक में सोहे बिंदी।
हिंदी  भाषा  की  सुरम्य  लय, ताल, यति, गति है,
हिंद भूमि में मधुरस  सम  सरस  सुवासित हिंदी॥

हिंदी कोमल कविता, छंद, गजल, गीत सोहर है।
हिंदी भाषा सहज, सरस,सुवाच्य राष्ट्र  धरोहर है॥

हिंदी  कभी  स्वतंत्रता की  ज्वालंत  चिंगारी बनी,
हिंदी  से   हिंद  की  धरती   में  फैला  अति  हर्ष।
हिंदी  आंदोलन में  क्रांतिकारियों  का भाषा बनी,
हिंदी भाषा  से  कामयाब  हुआ  स्वतंत्रता संघर्ष॥

अलख जागृति का  मिसाल हिंदी  राष्ट्र धरोहर है।
हिंदी लेखनी की आवाज,जग में अति मनोहर है॥

हिंदी राष्ट्र की सुरम्य, सरल, सुहृद,सुग्राह्य  भाषा,
हिंदी    भाषा   अखिल   विश्व   में   सिरमौर  है।
हिंदी भाषा पीयूष बनकर बहती है जीवन तल में,
सुंदर, सुबोध भाषा, जग  में  क्या  कोई  और है॥

हिंदी भाषा अति मनभावन, हिंदी राष्ट्र धरोहर है।
हिंदी  भाषा   सुवाच्य,  सुलेख  अति  मनोहर है॥

हिंदी   कवि    वृंदो    का   लेखनी   की    भाषा,
हिंदी भाषा में साहित्य का अथाह वेग समाया है।
भारतेंदु  हरिश्चंद्र  हिंदी  में  साहित्य  सृजन  कर,
हिंदी  को  हिंद  में  उत्तुंग श्रृंग  तक  पहुंचाया है॥

हिंदी  जन-जन की  भाषा, हिंदी  राष्ट्र  धरोहर है।
हिंदी  प्रतिष्ठित, कीर्तिमान  विश्व   का  जौहर है॥

हिंदी भाषा  में  स्वराष्ट्र  का स्वाभिमान  छिपा है,
हिंदी भाषा का सर्वजन सहृदय  से करें सम्मान।
हिंदी राष्ट्र की विविधता को एक सूत्र में समेटी है,
विश्व  में  हिंदी  को  नहीं  होने  देना है अपमान॥

अंतःकरण की यही पुकार, हिंदी  राष्ट्र धरोहर है।
हिंदी भाषा सरल,सुबोध,जग में अति मनोहर है॥
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हिंदी दिवस के पावन अवसर पर सादर समर्पित।
                     ✍ रचना
               स्वरचित एवं मौलिक
               मनोज कुमार चंद्रवंशी
                      (शिक्षक)
           जिला अनूपपुर मध्य प्रदेश
           रचना दिनांक-13/09/2020

शनिवार, सितंबर 05, 2020

गुरु वंदना (कविता): मनोज कुमार चंद्रवंशी

🌹गुरु वंदना🌹

वंदन         को           आतुर,
रोली       अक्षत    चंदन   है।
परम    पूज्य   गुरुजनों    का,
शत  -  शत   अभिनंदन    है॥

गुरु    के    चरणारविंदो    में,
श्रद्धा     सुमन     अर्पित  है।
नतमस्तक   गुरु   चरणों   में,
तन,   मन,   धन  समर्पित है॥

अज्ञान    तिमिर   नाश   कर,
जीवन  में  सुपथ  दिखलाया।
प्रकाश   पुंज    विकीर्ण  कर,
सद् मार्ग में चलना सिखाया॥

गुरु अखिल ब्रह्मांड शिरोमणि,
परहित  में जीवन को तपाया।
ज्ञान गंगा का रसधार बहाकर,
जीवन   को सुरभित बनाया॥

दिव्य   ज्ञान   का  भंडार  गुरु,
शिष्य के अंतस  को गढ़ता है।
जीवन    को  ज्योतिर्मय  कर,
नव  नूतन   संस्कार भरता है॥

गुरु  जगत में  महिमा  मंडित,
जन - जन     के      उपकारी।
गुरु  ज्ञान  का  अथाह संमदर,
त्रैलोक्य   में   महिमा  न्यारी॥

अखिल विश्व में नभ  से ऊँचा,
गुरु  जगत   में   सूर्य  समान।
गुरु    है      त्रिलोक     दर्शी,
गुरुवर  है    धरा   में   महान॥

             ✍ रचना
         स्वरचित एवं मौलिक
        मनोज कुमार चंद्रवंशी
बेलगवाँ जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश
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सोमवार, अगस्त 31, 2020

भूली बिसरी यादें (संस्मरण): मनोज कुमार चंद्रवंशी

"भूली बिसरी यादें" (संस्मरण)
             

उन दिनों की बात है। जब मैं कक्षा पांचवी में पढ़ता था। मेरे साथ मेरे सहपाठी रामशरण, मुनेश, जग्गू, जी पढ़ते थे। मेरा विद्यालय मेरे गाँव से लगभग 1 किलोमीटर दूर था। जो चारों तरफ से प्रकृति के स्वच्छंद वातावरण जंगलों से गिरा हुआ था। जहाँ की प्राकृतिक सुंदरता आज भी देखने लायक है। मैं जब भी विद्यालय का 'मनोहरी सुंदरता' की यादों को तरोताजा करता हूँ तो मेरा ह्रदय आनंदित हो उठता है। मेरी माँ मुझे हमेशा पढ़ने के लिए प्रातः 4:00 बजे उठाया करती थी। मैं नित्य क्रिया करके अध्ययन में लग जाया करता था। मेरी माँ मुझे लगभग 10:00 बजे तैयार कर टिफिन देकर विद्यालय को रवाना कर थी। माँ की अद्भुत करुणा एवं प्रेम को मैं जब भी याद करता हूँ। मेरा ह्रदय प्रफुल्लित हो जाता है।

मैं विद्यालय पहुँचकर सभी सहपाठियों से आलिंगन  करता था। फिर सभी गुरुजनों का प्रणाम करता था। इसके पश्चात प्रार्थना हुआ करता था। विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की प्रार्थना करने के पश्चात मेरा पठन काल शुरू होता था। मेरे विद्यालय में एक ही "गुरुजी" थे जो बहुत ही 'कर्तव्यनिष्ठ' समय के पाबंद एवं बहुत ही उच्च कोटि के विचारधारा वाले थे। जिनका "छवि एवं व्यक्तित्व" आज भी मुझे झलकता हुआ दिखाई देता है। मेरे विद्यार्थी काल में गुरुजी ने मेरे सभी सहपाठियों को विद्यालय प्रांगण में क्यारी बनाने का कार्य सौंपे। हम सभी क्यारी बनाकर विभिन्न प्रकार के पुष्पीय पौधे कुछ पेड़ रोपित किए वे पेड़ पौधे आज भी अपने मनोहरी दृश्य को प्रस्तुत करते हैं।

बचपन  का समय मेरे जीवन का "अनोखा काल था।" मेरे गुरुजी मुझे जब भी गृह कार्य दिया करते। मैं सबसे पहले ग्रह कार्य पूरा करके गुरुजी के टेबल में  रख दिया करता था। मेरे इस कार्य को देखकर तालियों की गुंजायमान हुआ करता था। मुझे गुरुजी बहुत  शाबाशी दिया करते थे। गुरूजी बहुत प्रशंसा किया करते थे। "बेटा तुम बहुत आज्ञाकारी, शिष्टाचारी एवं अनुशासन प्रिय हो।" तुम बहुत ऊंचाइयों को स्पर्श करोगे। गुरुजी का आशीर्वाद मेरे जीवन के लिए स्मरणीय है।

मेरे विद्यार्थी जीवन में मेरे गुरु मेरे लिए आदर्श थे। मैं और मेरे सहपाठी  गुरु के 'उदात्त चरित्र एवं विराट व्यक्तित्व' को देखकर आपस में वार्तालाप किया करते थे। हमारे गुरु जी हमारे लिए इस दुनियाँ में "अद्वितीय" हैं। उस समय विद्यालय शिक्षा के केंद्र के साथ-साथ संस्कार का केंद्र भी हुआ करता था। जहाँ पर नैतिक,  अध्यात्मिक एवं सदाचार का पाठ पढ़ाया जाता था। वो पल मेरे लिए अविस्मरणीय है।

जब मैं सायं विद्यालय से घर आता था।मेरी माँ हृदय की आगोश में बहुत  पुचकारा करती थी।माँ की करुणा एवं वत्सल मेरे जीवन के अनमोल था। मैं जब भी "भूली बिसरी यादें" को तरोताजा करता हूँ। मेरा मन मयूर नृत्य करने लगता है।"अतीत मेरे जीवन का स्वर्णिम काल था।"

                    ✍रचना
              स्वरचित एवं मौलिक
             मनोज कुमार चंद्रवंशी
         जिला अनूपपुर मध्य प्रदेश

शनिवार, अगस्त 15, 2020

मेरा भारत देश : मनोज कुमार चंद्रवंशी

मेरा भारत देश

मेरे    प्यारा   भारत   के    स्वर्णिम    धरा   में,
जहाँ    ज्ञान    विज्ञान   का    अभ्युदय   हुआ।
ऋषि   मुनियों  का  अनुपम   दिव्य  तपस्थली,
जहाँ  गौरवशाली  संस्कृति  का  उद्भव  हुआ॥

ध्रुव,  प्रहलाद,  वीर   जवानों   की   धरती  है,
जहाँ गौतम बुद्ध,महावीर स्वामीअवतार लिए।
जिनके   कीर्तियाँ   जग   में   अतीव   अपार,
धरा में  महान विभूतियाँ अद्भुत सृजन किये॥

हिंद  भूमि    बहु    सभ्यताओं   की    पलना,
जहाँ  कला, ज्ञान, शिल्प  का अद्भुत संगम है।
गंगा, यमुना  की   कल - कल  धारा  बहती है,
जहाँ जन हिंद के गौरव को करते हृदयंगम हैं॥

भारत में अतुलित  खनिज  संपदा  का भंडार,
जहाँ की उर्वर भूमि में हीरा, सोना  उगलता है।
पवन  सी   गंगा   बहकर  खेतों  में  आती  है,
जहाँ की  वैभव दृष्टिपात कर  रिपु  जलता है॥

हिंद  के   मस्तक   में    हिमाद्रि   मुकुट  सोहे,
जहाँ   पर   सप्त   गिरि  श्रृंग  सहोदर   बहना।
अथाह  सिंधु  माँ  भारती   के  सदा  पग धुले,
वतन  के   अनुपम  सौंदर्य  को  क्या कहना॥

हिंदआदि काल से सनातन धर्म का परिपोषक,
जहाँ समरसता, सद्भाव  का  रसधार  बहा  हो।
"वसुधैव कुटुंबकम"का भाव हर भारतवासी में,
जहाँ भाईचारा,सह अस्तित्व का भाव रहा हो॥

हिंद के पुण्य भूमि में काले-गोरे का भेद नहीं,
जहाँ    पर   सभी   माँ   भारती   के   संतान।
जाती-पातीं,छुआछूत ऊँच-नीच का भेद नहीं,
जहाँ   पर  स्वतंत्रता,  समानता  एक समान॥

                ✍ रचना
          स्वरचित एवं मौलिक
         मनोज कुमार चंद्रवंशी
      जिला अनूपपुर मध्य प्रदेश
    रचना दिनाँक-15/08/2020

हिंदुस्तान की मिट्टी : मनोज कुमार चंद्रवंशी

"हिंदुस्तान की मिट्टी"

              हिंद की मिट्टी में  अजब सुगंध,
              स्वर्णिम  मिट्टी  धरा  की चंदन।
              जिसमें  महावीर, गौतम जन्में,
             उस मिट्टी को शत - शत वंदन॥
हिंदुस्तान की सौंधी मिट्टी का, अजर,अमर कहानी है।
मातृभूमि की रक्षार्थ, जिसमें जन्में सच्चे हिंदुस्तानी हैं॥

            इस  मिट्टी   में  शौर्य, साहसी  जन्में,
            जिन्होंने मिट्टी को रक्त रंजित किया।
            वीरों  ने   प्राणों  की  आहुति  देकर,
            अपना   सर्वस्व   बलिदान    किया॥
हिंदुस्तान की सौंधी मिट्टी का, अजर,अमर कहानी है।
मातृभूमि की रक्षार्थ, जिसमें जन्में सच्चे हिंदुस्तानी हैं॥

            धरा की रज को तिलक लगाकर,
            रणधीर रणभूमि  में उतर जाते हैं।
            वीर  रिपु  दल  का  सर्वनाश कर,
            विजय  का   पताका  फहराते हैं॥

हिंदुस्तान की सौंधी मिट्टी का, अजर,अमर कहानी है।
मातृभूमि की रक्षार्थ, जिसमें जन्में सच्चे हिंदुस्तानी हैं॥

           हिंदी की मिट्टी  पतित पावन सी,
           जिसमें मीरा,तुलसी का भक्ति है।
           हिंद  का  मिट्टी  अजब   निराली,
           जिसमें वीर शिवाजी का शक्ति है॥
हिंदुस्तान की सौंधी मिट्टी का, अजर,अमर कहानी है।
मातृभूमि की रक्षार्थ, जिसमें जन्मे सच्चे हिंदुस्तानी हैं॥

          हिंद का मिट्टी वीरों का क्रीडा  स्थल,
          जिसमें  योद्धा लहू की होली खेले हैं।
          वतन  के  स्वाभिमान  की  रक्षा हेतु,
          रणबांकुरों  नाना   यातना  झेलें  हैं॥
हिंदुस्तान की सोंधी मिट्टी का, अजर,अमर कहानी है।
मातृभूमि की रक्षार्थ, जिसमें जन्में सच्चे हिंदुस्तानी हैं॥

         हिंदुस्तान   की    उर्वर    मिट्टी   में,
         धन-धान्य  की  बालियाँ खिलते हैं।
         धरती   माँ   हरित  चुनर  ओढ़ी है,
         जहाँ  नव नित कलियाँ खिलते हैं॥ 
हिंदुस्तान की सौंधी मिट्टी का, अजर,अमर कहानी है।
मातृभूमि के रक्षार्थ, जिसमें जन्में सच्चे हिंदुस्तानी हैं॥
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                                 रचना
                      स्वरचित एवं मौलिक
                      मनोज कुमार चंद्रवंशी
                   जिला अनूपपुर मध्य प्रदेश
                  रचना दिनांक-13/08/2020

21 वीं सदी का सुदृढ़ भारत : मनोज कुमार चंद्रवंशी

21वीं सदी का सुदृढ़ भारत

मुझे चंद पंक्तियाँ याद आ रही हैं -"हम बदलेंगे युग बदलेगा,हम बदलेंगे युग धारा यह संकल्प हमारा।"
हमें सर्वप्रथम विचार क्रांति लाना होगा। भारत का स्वरूप क्या है? भारत का स्वरूप क्या होना चाहिए?
आज हम भारत के जो वर्तमान स्वरूप को देख रहे हैं क्या यही स्वरूप कल भी होगा? जी नहीं  भारत नित दिन प्रगति पथ की ओर अग्रसर हो रहा है किन्तु भारत को अविकसित क्षेत्रों के विकास में अग्रणी भूमिका निभाने की आवश्यकता है। यदि उत्कृष्ट कार्य करेगा तो निश्चित रूप से भारत विश्व के विकसित देशों की पंक्ति में जल्द ही अपना पायदान जमा लेगा। भारत कृषि के क्षेत्र में, सुरक्षा के क्षेत्र में, आयुध के क्षेत्र में, चिकित्सा के क्षेत्र में  बेहतर काम करना होगा। तभी सुदृढ भारत की संकल्पना साकार होगा।

आज भारत रक्षा के क्षेत्र में विभिन्न मिसाइलें जैसे- नाग, त्रिशूल, पृथ्वी आदि का आविष्कार कर चुका है। किन्तु भारत रक्षा के कुछ मामलों आज भी आत्मनिर्भर नही है। क्योंकि भारत देश की इस पावन भूमि में महान वैज्ञानिक, अभियंता, चिकित्सक जन्म लेते हैं। जो अपने देश के प्रति समर्पण का भाव नहीं  रखते हैं। अधिक मुनाफा के लिए अन्य देशों में पलायन कर जाते हैं। यह बहुत बड़ी विडंबना है।
देश के प्रतिभावानों को कर्तव्यनिष्ठ होना चाहिए। देश प्रगति के पथ में लाने के लिए संकल्पित होना चाहिए। भारत प्रक्षेपाशास्त्र एवं अधिक मारक क्षमता वाले वैस्टविइक मिसाइलों के निर्माण करने की आवश्यकता है।

आज भारत खगोल विज्ञान के क्षेत्र में 'चंद्रयान 1' 'चंद्रयान 2' का सफलतापूर्वक परीक्षण कर विश्व के देशों में कीर्तिमान स्थापित किया है। हम मानते हैं कि यह भारत के समर्पित, निष्ठावान, कर्मठ वैज्ञानिकों का देन है। अभी इस क्षेत्र में और उत्कृष्ट कार्य करने की आवश्यकता है। जिससे भारत एक समुन्नत राष्ट्र बन सके। संचार के क्षेत्र में संचार क्रांति लाने की आवश्यकता है। जिससे देश प्रगति के पथ पर अग्रसर हो। भारत के वैज्ञानिकों ने सिद्धार्थ, परम जैसी अत्यधिक गति से चलने वाली कंप्यूटरों का निर्माण कर  विश्व में कीर्तिमान स्थापित किया है। नेटवर्क का संजाल बिछ दिया है। लेकिन अभी भी इस क्षेत्र में  अत्यधिक  कार्य करने की आवश्यकता है। भारत में   पूर्ण रूप से डिजिटलीकरण बनाने की आवश्यकता है। हर गांव से  शहर तक बैंकिंग व्यवस्था, सड़क की व्यवस्था, पानी की व्यवस्था आवागमन के साधन की व्यवस्था, शिक्षा की व्यवस्था उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।

हम भारत की बेरोजगारी एवं निर्धनता की ओर ध्यान केंद्रित करते हैं तो हमें पता चलता है कि भारत में आज भी निर्धनता की समस्या बहुत ज्यादा है। लोग जीविकोपार्जन के साधन ढूंढने के लिए गांव से शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। भारत में निर्धनता का आंकड़ा 27•5% हैं।यदि बेरोजगारी का आकलन करें तो भारत में बेरोजगारों की संख्या ग्रामीण क्षेत्र में 5•3% हैं। तथा शहरी क्षेत्र में 7•8% है जो कि अन्य देशों की तुलना में बहुत ज्यादा है। भारत में गरीबी दूर करने के लिए भारत सरकार के द्वारा निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जाये। बेरोजगारी को दूर करने के लिए योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाये। भारत के बेरोजगार नवयुवकों को बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान किया जाये। तब एक सुंदर एवं सशक्त भारत का निर्माण हो सकता है।

आज भारत में घरेलू हिंसा दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है भारतीय संविधान में घरेलू हिंसा अधिनियम ने बनाया  जाये तथा समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने के लिए भी अहम कदम उठाया जाये।आज देश में बलात्कार, अपहरण, तलाक जैसी घटित घटना  और रोजमर्रा की जिंदगी में देखने को मिलता है इन समस्याओं के निदान के लिए विभिन्न अपराध रोधी कानून बनाया जाय।जिससे महिलाएं यौन उत्पीड़न के शिकार न हो। भारतीय दंड संहिता में बने कानून  अक्षरशः लागू किया जाए। जिससे महिलाएं का संरक्षण हो सके एवं उनका स्वाभिमान जागृत हो सके।

यदि भारत के स्वर्णिम सपनों को साकार करना है।  सभी क्षेत्रों में अधिक से अधिक विकास के कार्य किया जाए तो निश्चित रूप भारत प्रगति के पथ पर और तीव्र गति से अग्रसर होगा। भारत को विभिन्न क्षेत्रों कीर्तिमान स्थापित करने की आवश्यकता है।ताकि भारत विकसित देशों की पहली पंक्ति में खड़ा हो सके।
भारत को समृद्ध एवं खुशहाल बनाने के लिए हमारा भी योगदान महत्वपूर्ण है। हमें भी तटस्थ रहकर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में अहम योगदान  देना चाहिए।
            सशक्त भारत समृद्ध भारत।
            सुदृढ़ भारत खुशहाल भारत।
                 जय हिंद जय भारत।

                       ✍आलेख
                  स्वरचित एवं मौलिक
                   मनोज कुमार चंद्रवंशी
                          (शिक्षक)
                जिला अनूपपुर मध्य प्रदेश

सोमवार, अगस्त 03, 2020

~राखी का मूल्य~ : मनोज कुमार चंद्रवंशी

~ राखी का मूल्य~

वतन का प्रहरी  बनकर अपना कर्तव्य निभाना  भैया।
स्वर्णिम स्वप्न सजायी हूँ राखी का मूल्य चुकाना भैया॥

       भाई-बहन का  प्यार न रहे  अधूरा,
       हृदय में  कुछ अरमान  सजायी हूँ।
       अडिग रहो विकट परिस्थितियों में,
       प्रेम का रक्षा कवच लेकर आयी हूँ॥

वतन का प्रहरी बनकर अपना कर्तव्य निभाना भैया।
कुछ अरमान  सजायी हूँ  राखी  में तुम  आना भैया॥

        सजल   नयन  टकटकी  लगाए,
        राह   निरखि  रही   हूँ   बारंबार।
        अनमोल पवन  रिश्तों का बंधन,
        भैया तुम हो मेरी जीवन पतवार॥

वतन का प्रहरी बनकर अपना कर्तव्य निभाना भैया।
स्वर्णिम स्वप्न सजायी  हूँ  राखी  में  तुम आना भैया॥

          कर्तव्य मार्ग  में  अविचल अटल,
          राखी के बंधन को निभाना भैया।
          दृढ़  संकल्प  का  गाँठ  बांधकर,
          स्नेह छाया  से दूर न जाना भैया॥

वतन का प्रहरी बनकर अपना कर्तव्य  निभाना भैया।
कुछ  अरमान  सजायी हूँ  राखी  में तुम  आना भैया॥

          सरहद  से  कब  आओगे  भैया,
          राखी का सुंदर थाल सजायी हूँ।
          पावन  रिश्तों   का  डोर  बांधने,
          तुम्हारे   आंगन   में   आयी   हूँ॥

वतन का प्रहरी बनकर अपना कर्तव्य निभाना भैया।
स्वर्णिम सपना सजायी हूँ  राखी  में तुम आना भैया॥

                         रचना✍
                स्वरचित एवं मौलिक
               मनोज कुमार चंद्रवंशी
            जिला अनूपपुर मध्य प्रदेश
           रचना दिनाँक-02|08|2020

रविवार, अगस्त 02, 2020

"गीत मल्हार"-मनोज कुमार चंद्रवंशी

"गीत मल्हार"

पिया गए  परदेश  सुनसान  हृदय  आँगन।
स्निग्ध  स्मित  नीरस   बिन  प्रिय  साजन॥
              कैसे गाऊँ मैं गीत मल्हार।

निष्ठुर  काली   कोयलिया  कुहुक  रही  है।
हृदय में अंतर्द्वंद कंठ स्वांस  सूख  रही  है॥
             कैसे गाऊँ मैं  गीत मल्हार।

दर्द  भरा  है  बदन  में सदन में  हूँ  अकेली।
हिंडोला झूलते दृष्टिगोचर न कोई अलबेली॥
              कैसे गाऊँ  मैं गीत मल्हार।

आशा  की  असंख्य  रश्मियाँ  बुझ  चुकी  है।
अब  स्वांस  डोर  अधर   में   रुक  चुकी   है॥
            कैसे गाऊँ मैं  गीत मल्हार।
क्रोध अग्नि ज्वलित हिय  में  मन  है बेहाल।
नित  दिन खटक  रहा कोरोना का  जंजाल॥
            कैसे गाऊँ मैं  गीत मल्हार।

बंद पड़े  हैं  मंदिर,  मस्जिद,  चर्च,  गुरुद्वारे।
चारु  चंचल  चित्त  स्थिर   मन  के  हूँ  मारे॥
          कैसे गाऊँ मैं  गीत मल्हार।
सावन  कजरिया  की  सुन मधुर  सुर ताल।
मन विक्षिप्त  तन अग्नि  ज्वलंत विकराल॥
         कैसे गाऊँ मैं  गीत मल्हार।

असहनीय कसक  सकल बदन अकुलाए।
स्वर्णिम  स्वप्न  अधूरी  कुछ  न  मन भाये॥
          कैसे गाऊँ मैं  गीत मल्हार।
सजल नयन टकटकी  पिय पथ की ओर।
सुहागन उजड़ा मिटा  काजल  दृग  कोर॥
        कैसे गाऊँ  मैं  गीत मल्हार।

पग रंग  बिरंगी  महावर  फीकी  पड़ गई।
अब हाथों की सुवासित  मेहंदी मिट गई॥
         कैसे गाऊँ मैं  गीत मल्हार।

                  रचना✍
        स्वरचित एवं मौलिक
       मनोज कुमार चंद्रवंशी
     जिला अनूपपुर मध्य प्रदेश
    रचना दिनाँक-25/07/2020
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*रिश्तों का बंधन राखी* : मनोज कुमार चंद्रवंशी

*रिश्तों का बंधन राखी*

अटूट  पावन   रिश्तों   का   पर्व  राखी,
अनुराग, समर्पण   का  अनुपम  बंधन।
रक्षा सूत्र से कलाइयाँ  पावन   होती  हैं,
मस्तक  शुभग  शुचि   कुमकुम  चंदन॥

दृढ़  प्रतिज्ञा  हो  निज  हृदय  पटल  में,
सहोदरा   विकट  काल में रक्षा  हो।
प्रेम समर्पण हो नित  प्रगाढ़ संबंधों में,
सुहागिन  बहन की  प्राणों  से  रक्षा हो॥

पुनीत  सनेह  सुमन  प्रस्फुटित   हुआ।
भगिनी  की  निर्मल  हृदय  आँगन  में,
नेह गंध से सुवासित  हृदय का  कोना,
तन,मन प्रमुदित स्नेह के अवलंबन में॥

भ्रातृत्व भाव सदा बना रहे  जीवन में,
सहोदरा दैव यही  कामना करती है।
भाई अडिग रहे  सदा विकट घड़ी  में,
भाई के दीर्घायु  का   विनय  करती है॥

अनुजा के लिए रक्षा अमूल्य उपहार,
सदा  स्वर्णिम  चिर स्वप्न  सजाती है।
खुशहाल   हो   मेरे   भाई   प्रतिपल,
भगिनी का नित यही भाव सुहाता  है॥

हे!  भगिनी  शपथ है  मातृभूमि   की,
मैं  तन्मयता  से  कर्तव्य  निभाऊँगा।
समरसता, सद्भाव सदा  रहे  हृदय में,
वतन  के  रक्षार्थ बलि-बलि जाऊँगा॥

त्याग,  समर्पण   संकट की   घड़ी  में,
प्रेम,करूणा,सौहार्द हृदय सेअर्पित है।
निजता  का  भाव मिटा कर हृदय  से,
तन, मन, वतन  के  लिए  समर्पित है॥

विपदाओं में  कर्तव्य  पथ  में  अटल,
पावन रिश्तों को दृढ़ता से निभाना है।
भगिनी,  माँ   भारती  के  सम्मान  में,
पावन रक्षा सूत्र का मूल्य  चुकाना है॥
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                   रचना✍
        स्वरचित एवं मौलिक
        मनोज कुमार चंद्रवंशी
     जिला अनूपपुर मध्य प्रदेश
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सोमवार, जुलाई 27, 2020

गीत मल्हार: मनोज कुमार चंद्रवंशी

"गीत मल्हार"

पिया गए  परदेश  सुनसान  हृदय  आँगन।
स्निग्ध स्मित नीरस विरह वेदना है साजन॥
              कैसे गाऊँ मैं गीत मल्हार।

निष्ठुर  काली   कोयलिया  कुहुक  रही  है।
हृदय में अंतर्द्वंद स्वास  कंठ सूख  रही  है॥
             कैसे गाऊँ मैं  गीत मल्हार।

दर्द  भरा  है  बदन  में सदन में  हूँ  अकेली।
हिंडोला झूलते दृष्टिगोचर न कोई अलबेली॥
              कैसे गाऊँ  मैं गीत मल्हार।

आशा  की  असंख्य  रश्मियाँ  बुझ  चुकी  है।
अब  स्वास  डोर  अधर   में   रुक  चुकी   है॥
            कैसे गाऊँ मैं  गीत मल्हार।
क्रोध अग्नि ज्वलित हिय  में  मन  है बेहाल।
नित  दिन खटक  रहा कोरोना का  जंजाल॥
            कैसे गाऊँ मैं  गीत मल्हार।

बंद पड़े  हैं  मंदिर,  मस्जिद,  चर्च,  गुरुद्वारे।
चारु  चंचल  चित्त  स्थिर   मन  के  हूँ  मारे॥
          कैसे गाऊँ मैं  गीत मल्हार।
सावन  कजरिया  की  सुन मधुर  सुर ताल।
मन विक्षिप्त  तन अग्नि  ज्वलंत विकराल॥
         कैसे गाऊँ मैं  गीत मल्हार।

असहनीय कसक  सकल बदन अकुलाए।
स्वर्णिम  स्वप्न  अधूरी  कुछ  न  मन भाये॥
          कैसे गाऊँ मैं  गीत मल्हार।
सजल नयन टकटकी  पिय पथ की ओर।
सुहागन उजड़ा मिटा  काजल  दृग  कोर॥
        कैसे गाऊँ  मैं  गीत मल्हार।

पग रंग  बिरंगी  महावर  फीकी  पड़ गई।
अब हाथों की सुवासित  मेहंदी मिट गई॥
         कैसे गाऊँ मैं  गीत मल्हार।

                  रचना✍
        स्वरचित एवं मौलिक
       मनोज कुमार चंद्रवंशी
     जिला अनूपपुर मध्य प्रदेश
    रचना दिनाँक-25/07/2020
नोट- मैं घोषणा करता हूँ कि मेरा यह रचना अप्रकाशित एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।

॥ दगाबाजों से सावधान ॥ चौपाई जब बारी ही फसल उजारे। कर दीजै तब उसे किनारे॥ विश्वासघात अंगरखा होई। त...