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शुक्रवार, मई 01, 2020

कोरोना वायरस आय(आल्हा गीत):राम सहोदर

कोरोना वायरस आय(आल्हा गीत)
चीन देश में जन्म लियो है, नाम कोरोना वायरस आय।
खतरनाक बीमारी पनप्यो, जग में पैर पसारौ जाय।
कोविड नाइनटीन नाम है दूसर, जग में है कोहराम मचाय।
बालक वृद्ध न काहू छाडै,खौफ से सारे जन थर्राय।
हाहाकार मचाया जग में, बात किसी के समझ ना आय।
छिपा हुआ यह दुश्मन भारी, त्राहि त्राहि कर सब घबराय।
नहीं मुलाजिम अफसर मानै, वैद हकीम न बचने पाय।
औषधि अउ उपचार न सूझे, मानहु महाकाल है आय।
मातम छायो सारे जग में, किसी की अकल ठिकानो नाय।
लाखो जीवन ले बैठा है, फिर भी उधम बढ़ती जाय।
कर्मवीर भी पस्त हुए हैं, धर्मवीर की चलती नाय।
स्वास्थ्य कर्मी ना पार हैं पावै अन्य किसी की गिनती नाय।
आर्थिक उन्नति चौपट कर दी, काम-धाम को ठप्प कराय।
कोई हस्ती उबर न पावै, सब पर गई सनाका छाय।
महाप्रलय के लक्षण दिखते, दिन-दिन विकट रूप दिखलाय।
भीषण विपदा छायो जग पर, नरसंहार है बढ़ती जाय।
इससे डरना नहीं मुनासिब, संयत हो धीरज अपनाय।
विजय मिलेगी निश्चय हमको, परब्रह्म भी होंय सहाय।
कुछ ही दिन की मानो कहना, नेम धेम को लो अपनाय।
बिना डरे घर बैठो अपने, यदि चाहो मुक्ति मिल जाय।
निश्चित दूरी करके रहियो, अपन पराया मानहुं नाय।
हैंडवॉश है पुनि पुनि करियो सैनिटाइज में ध्यान लगाय।
आसान तरीका इससे बचना, सावधान रहियो हर्षाय।
लाकडाउन उपचार है इसका, कोरेंटीन में ररहियो जाय।
कर्मवीर योद्धाओं के बल, जीतेंगे हम संशय नाय।
जन समुदाय भी संयम रखें नियम उल्लंघन हो न पाय।
मंत्री प्रधान की कहना मानो, बेड़ा पार शीघ्र हो जाय।
विकास गति जो रुकी हुई है,उसी तरह पटरी पर आय।
कहे सहोदर इस दुनिया में, यदि रहना चाहो मन हर्षाय।
शासन के सारे नियमों का, पालन करियो ध्यान लगाय।
रचनाकार:
राम सहोदर पटेल,एम.ए.(हिन्दी,इतिहास)
स.शिक्षकशासकीय हाई स्कूल नगनौड़ी
गृह निवास-सनौसीथाना-ब्योहारी जिला शहडोल(मध्यप्रदेश)

  • आपसे अनुरोध है कि कोरोना से बचने के सभी आवश्यक उपाय किये जाएँ।
  • बहुत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर जाएँमास्क का उपयोग करें और शारीरिक दूरी बनाये रखें।
  • कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से अच्छी तरह अपने हाथों को धोएं। ऐसा कई बार करें।
  • आपकी रचनाएँ हमें हमारे ईमेल पता akbs980@gmail.com पर अथवा व्हाट्सप नंबर 8982161035 पर भेजें। कृपया अपने आसपास के लोगों को तथा विद्यार्थियों को लिखने के लिए प्रोत्साहित करने का कष्ट करें।

शनिवार, अगस्त 31, 2019

बघेली प्रहसन - बुधिया मान गई



बघेली प्रहसन - बुधिया मान गई
(इस प्रहसन में प्रयुक्त घटना एवं नाम पूरी तरह काल्पनिक हैं) 
पात्र-परिचय
1. मटकू -परिवार का मुखिया उम्र-40 वर्ष
2. बुधिया-मटकू की पत्नी उम्र- 35 वर्ष
3. आश्रित-5 बच्चे क्रमशः 12, 10, 8, 6,एवं 4 वर्ष
4. बैजू- परिवार कल्याण कार्यक्रम का प्रचारक उम्र- 40 वर्ष
5. मैकू- परिवार नियोजन करा चुका परिवार का मुखिया
(संध्या का समय. मटकू अपने घर में रस्सी कांत रहा है. बुधिया रसोई की तैयारी कर रही है तभी बैजू का प्रवेश)

बैजूः सुना थ हो मटकू भाई..., 
मटकूः हाॅं बैजू भाई...राम-राम, राम-राम।
बैजूः त जना तोहांर परिवार बहुत बड़ा है, इ घरे मं बहुत लरिका बच्चा भरे हैं
मटकूःहाॅं बैजू भाई, भगवान द्यात है त का करी। इ भगवान केर खेती आय।जे आय गे त आय गे।
एक बच्चाः (अर्धनग्न) दादा रे, भूख लगी है।
दूसरा बच्चाः(अर्धनग्न) दादा काल्ह पाॅंच रुपिया चाही। पेन खरीदैं का है।
तीसरा बच्चाः दादा रे हमहीं सल्ट बनवा दे। ह-ह, ह-ह,
चैथा बच्चाः ये दादा, ये दादा ह-ह, ह-ह,
मटकूः चुप्प रहा रे। दुआरे मं जो कोऊ बड़ा मनई आ जाय त इनके मारे कुछ सुनैं का नहीं मिलै। बताई बैजू भाई अपना आपन हाल चाल बताई....
बैजूः मटकू भाई पहिले अपने लरिकन केर सुन ले फेर त हम बताउबै करब।
पाॅंचवां बच्चाः दादा-दादा, हमका मेला से फीता लेत अइहा, हाॅं!
सभी बच्चे एक साथः भूख लगी है दादा, भूख लगी है।
मटकूः देख रे कुछ होय त खबा-पिया दे इनहीं। ईं त परानन का खाये लेत हैं।
बुधियाः यहंकै आवा रे, (सब बच्चा दाई के पास चले जा थे)
   (मटकू की पत्नी सब लडकों को दरिया बांटती है)
सभी बच्चे एक साथः ह-ह, ह-ह, हमहीं थोर क मिला है, ह-ह थोड़ी अउर, ह-ह थोड़ी अउर।मटकू (गुस्से से बच्चों को घूॅंसा लगाता है)ः  चला ससुरौ, यतना खा लिहा तउऔ तोहार पेट नहीं भरै। लई जा रे इनहीं, सोबाव।
         (मटकू की पत्नी बुधिया बच्चों का सुला देती है) 
मटकूः (बैजू से) अब कह सुनाबा बैजू भाई। ईं लरिका त कोहू से बातौं तक नहीं करैं द्यात आंय।
बैजूः न मटकू भाई, एक बात कही, नागा त न मनिहा
मटकूः कही बैजू भाई, अपना कोऊ दूसर कोऊ थोड़े आहेन कि हम नागा मानब।
बैजूः मटकू भाई अब त खूब एक क लरिका बच्चा होईगे। अब परिवार नियोजन काहे नहीं करा लेते आहा। बहुतै लरिका बच्चा पइदा करबौ ठीक नहीं होय....
मटकूः बैजू भाई, अपनैं का ईं अधिक लागाथोइहैं, हमहीं त अबहूं कमैं लागाथैं।
बैजूः काहे, कम लागाथै भाई...
मटकूः देखी, एकठे तेल के लाइन मं, एकठे पानी के लाइन मं, एकठे बकरी चराई। एकठे पड़वा चराई।एकठे नागर फांदी। अब अपनै बताई बैजू भाई कि य राशन के दुकान मं कोऊ लाइन लागी? ंअउर, फेर जब भगवान देतै हय त हम काहे ओहमां ब्रेक लगाई। कल के कुछ ऊंच-नींच होइगा त को देखी?

बैजूः देखा, मटकू भाई। य जउन कहत्या ह कि भगवान देत है। त सुना जिनका भगवान नहीं देय उनका डाक्टर दवाई दई के लरिका पइदा करा देथैं। त का डाॅक्टर लरिका देत है? लरिका त तोहरे इच्छै से पइदा होईहैं न?
     (तभी मैकू का प्रवेश, बीच में मैकू हस्तक्षेप करता है)
बैजूः आबा-आबा, मैकू भाई। बहुत सही समय मं आया ह।
मैकूः बहुत लम्बी बहस चलाथी।
बैजू: इनहीं बतावा मैकू भाई। तोहरे मेहरारू के लरिका-बच्चा नहीं होत रहा त का कर्या।
मैकूः कुछ न पूछी बैजू भाई। अपना केर व सलाह न होत त हम त आज हम बिन बच्चा के रहित।
मटकूः कइसन......
मैकूः मटकू भाई, हमरे मेहरारू का लरिका न होय, त हम सोचेन कि हम दूसर बियाह कर लेई। त एक दिन य बात हम बैजू भाई का बतायन। त बैजू भाई कहिन कि तु एक बेर डाॅक्टर का देखा ल्या। हमहीं नाम,पता दिहिन। हम डाॅक्टर से मिलेन। डाॅक्टर हमार दोनौं क्या खून जाॅंच करिन। फेर कुछ दिना केर दवाई चला। दवाई के कुछै महिना मं हमहीं हमरे मेहरारू से खुशखबरी मिल गा। हम आज दुई लरिकन क्या बाप हन।
मटकूः मात्र दुई?(आश्चर्य से पूछा)
मैकूः जब दुई लरिकन केर बाप बन गयन त ईं बैजू भाई फेर हमहीं डाॅक्टर के भेजिन। कहिन डाॅक्टर से कहा- अब अइसन उपाय कर द्या कि दुई से ज्यादा न होंय...
मटकूः फेर.....
मैकू- फेर का? डाॅक्टर, हमार नशबन्दी करैं का सलाह दिहिन। पहिले त डर लागै। पर जब उ समझाइन त हम मान गयन अउर आपन नसबन्दी करा लिहिन।
मटकूः पै हम त मेहरारुन केर सुने रहयन।
मैकूः अब दुनहुन केर होत है...हम अपनै करा लिहेन?
बैजूः त समझ माहीं बात आई मटकू भाई कि लरिका तोंहरे इच्छा से होथैं।भगवान केर इच्छा से नाहीं। अब कऊनौ दिन आपन नशबन्दी करा ल्या।
मटकूः देखा, हम अपने मेहरारू से समझे बगैर त कुछू न कराउब।
बैजूः त अपने मेहरारू से पूछ ल्या। काहे मैकू भाई...
मैकूः हां, हां बैजू भाई।
मटकू (अपनी पत्नी बुधिया से)ः अरे सुनते हये। बैजू भाई अउर मैकू भाई नशबन्दी का कहि रहे हैं।
बुधियाः त तुम करा ल्या। हम त न कराउब। हमहीं जिन्दगी भर का कमजोर नहीं होंय काय। नहीं त हमहीं कोऊ एक लोटिया पानी न देई।
बैजूः सुना हो मटकू भइया औ बुधिया बाई। झगड़ा झै करा। मटकू आपन नशबन्दी करा लें वहै सबसे नीक है।
बुधियाः काहे, उईंन कमजोर होइ जइहैं त खेती-पाती को करी। नहीं दादा, उईं न कराइइैं। हम मर जाॅब भ्ूाखे-पियासे।
मैकूः अरे भाई अइसन नहीं आय।सब काम-काज होत रहत है। न जिव कमजोर होई, न कउनौ काम हरजा होई।तोंहरे गाॅमैं मांही अउर लोग य नशबन्दी करा चुकिन्हीं। उनहीं कउनौ परेशानी नहीं भा। आगे ध्यान रख्या अउर ज्यातना जल्दी होय डाॅक्टर से सलाह लइके नशबन्दी करा ल्या। (मैकू आसमान की तरफ देखता है) बहुत दरबार होइगा, अब चलैंका चाही। काहे बैजू भाई।
बैजूः हाॅं, मैकू भाई। हमहूं चलब अब।
(दोनों उठ खडे होते हैं। मटकू दरवाजे के बाहर तक छोड़कर लौटकर आते ही बुधिया से...)
मटकूः बैजू अउर मैकू भाई ठीक कहत हैं बुधिया। हमरौ जिऊ कबहूं-कबहूं उबिया जाथै। बिचारे हरेन का न प्याट भर खांय का मिलै न पहिनैं का। लागा थै नशबन्दी कराइन लेई।
बुधियाः ठीक है। पै डाॅक्टर से जब मिलैं जइहा त हमहूॅं चलब। हम पूछब कि तोहरे नशबन्दी से कउनौ नुकसान त न होई। 
मटकूः ठीक है त दिन बेरा बद लेई।
बुधियाः हां त दिन बेरा त बदइन का परी। घर केर व्यवथ्था बनइन के न जइहा
मटकूः हौ।


(परदा गिरता है)


(इस रचना के बारे में- यह रचना लेखक की बाल्यकाल की रचना है. किसी स्कूली कार्यक्रम के लिए उन्होने इसे तैयार किया था. आपने इस रचना के लिए अपना बहुमूल्य समय दिया, इसके लिए "आपस की बात सुनें" टीम की और से आपका बहुत-बहुत साधुवाद)


प्रस्तुति एवं रचना: प्रमोद कुमार पटेल, वार्ड क्रमांक 4, भोगिया टोला ब्योहारी जिला शहडोल मध्यप्रदेश
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