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सोमवार, अगस्त 31, 2020

गुजारिश: एफ. शिव

गुजारिश: एफ. शिव 
आसान से सवाल का, 
  आसान सा जवाब चाहता हूँ |
महकते हुए मंजर ए गुल से, 
   एक गुलाब चाहता हूँ |

 रूठो ना मेरे सवाल पर, 
     बस एक हॅसी  सा ख्वाब चाहता हूँ |
 सफर कठिन है जिंदगी का, 
    मैं तो बस तुम्हारा साथ चाहता हूँ |

 थम थम  कर चल रही है जिंदगी, 
          बस इसे परवाज चाहता हूँ |
 दो चार कदम चल कर थक जाता हूं मैं, 
         हमसफर बनने का एहसास चाहता हूँ |

 हमसफर बन  कर चलो मेरे साथ, 
       बस इसका जवाब चाहता हूँ |
 मिलकर लिखेंगे नया 
      फलसफा जिंदगी का, 
 साथ चलने के लिए, 
 बस एक हमसफर चाहता हूँ |

 मुमकिन है कि तुम दो साथ मेरा, 
 तुम्हारे साथ अपनी एक पहचान चाहता हूँ |
 क्या दोगी तुम साथ मेरा? 
 बस इसका जवाब चाहता हूँ |

                                एफ. शिव 
               शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय कटंगी
                    जिला बालाघाट मध्य प्रदेश
[इस ब्लॉग में रचना प्रकाशन हेतु कृपया हमें 📳 akbs980@gmail.com पर इमेल करें अथवा ✆ 8982161035 नंबर पर व्हाट्सप करें, कृपया देखें-नियमावली] https://apaskibaatsune.blogspot.com/p/blog-page_21.html

बुधवार, अप्रैल 29, 2020

मेरा सपना: शिव एफ


यह कविता एक व्यंग्य के रूप में है जो आज के ताजा परिदृश्य में बिल्कुल सटीक बैठती है। अगर वर्तमान परिदृश्य को देखा जाए तो यथार्थ और धरातल में उतना ही अंतर है जितना सैद्धांतिक भाग और प्रायोगिक भाग में! उम्मीद करूंगा यह कविता आप सभी को पसंद आएगी | यह कविता एक वार्तालाप के रूप में है जिसके दो पात्र हैं एक मैं और दूसरा मेरी अंतरात्मा।

मेरा सपना

नींद नहीं आ रही, 
क्यों? 
परेशान हूँ, 
क्यों? 
पता नहीं,
गर्मी होगी, 
थोड़ी है, 
शायद बिजली नहीं होगी, 
है, 
कूलर नहीं चल रहा, 
चल रहा है, 
फिर? 
नींद नहीं आ रही 
क्यों? 
पता नहीं 
किसी की याद आ रही होगी? 
नहीं, 
किसी से नाराज हो? 
हाँ 
किससे? 
खुद से, 
क्यों?
जब देखता हूँ मैं, 
खुली निगाहो से सपना, 
देश, भारत देश सबका हो अपना, 
पर सबने 
अपने अपने नजरिए से बाट लिया है इसे, 
किसी ने धर्म के नाम पर, 
किसी ने कर्म के नाम पर, 
किसी ने क्षेत्र के नाम पर, 
तो किसी ने संस्कृति के नाम पर, 
तो कुंठित हो उठता हूँ 
मेरा सपना टूट रहा है, 
सोचने लगता हूँ 
क्या मै उस धरा का वासी हूँ 
जहाँ राम, रहीम हुआ करते थे 
जहाँ गंगा जमुना तहज़ीब हुआ करती थी 
जहाँ नानक अपना सन्देश दिया करते थे 
जहाँ नारी के सम्मान के लिए, 
शीश कट जाया करते थे, 
पर आज तो
नारी सरे आम लूट ली जाती है 
और हम भीष्म पितामह की तरह, 
धृतराष्ट्र की तरह, 
‌राजनीति में बट कर 
मौन व्रत धारण कर जाते हैं 
लुटती है तो लुट जाने दो द्रोपदी को,
कृष्णा ने एक बार बचा लिया द्रोपदी को, 
इस नारी को कौन बचा पायेगा।
उस विश्वास का क्या? 
भूखे मरते किसान का क्या?
कर्ज में डूबे खलिहान का क्या 
बस सपने हैं 
टूटने लगते हैं 
और नींद नहीं आती है
सोचने लगता हूँ 
क्या करुँ
किसी के सामने अपनी बात नहीं रख पाता 
क्यों की मैं ट्रोल हो जाता हूँ. 
फिर चुप हो कर सो जाता हूँ 
पर नींद नहीं आती है, 
नींद में फिर वही सपने दिखाई देते हैं
कभी तो पूरा होगा मेरा सपना 
जब भारत देश सबका होगा अपना 

रचना: शिव एफ.
शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय कटंगी

सोमवार, अप्रैल 27, 2020

चलो एक खत लिखें: एफ. शिव

चलो एक खत लिखें,
उनके नाम
जो मेरे अपने थे
बिछड़ गये जीवन के सफर में,
कोई था ऐसा

आपके भी जीवन में,
ज़ब नन्हा सा था
कोई भी उठा लेता था गोद में,
मेरे रोने की आवज पर सब चले आते
गोद में उठा कर चुप करा जाते,
अब रोता हूँ तो तन्हाई में,
डरता हूँ कोई देख न ले,
पर चाहत तो है,
सब चले आएं मेरे अपने,
और चुप करा जाएं
जब हुआ खेलने लायक,
सब चले आते थे बेरोकटोक
खेलते थे, लड़ते थे,
रूठकर चले जाते थे
कभी न आने की कस्में खाते थे
फिर चले आते
अब तो हर कोई रूठ गया
कभी न आने की कसमें खा गया हर कोई,
दोस्त भी बनते हैं मतलब से
तरस गये हैं सच्चे दोस्तों को,
फिर चलने लगे स्कूल
न होम वर्क की चिंता,
न स्कुल जाने की चिंता
बस सर की बेंत का डर
बेंत ने वहाँ पंहुचा दिया
जो कल्पना से परे था
आज भी वो हमारे प्रिय शिक्षक हैं
जो दुश्मन हुआ करते थे
अब तो दूसरों की सीख से भी डर लगता है
कहीं मतलब न हो कहीं
फिर खो गये किसी के इश्क में
क्या वो एकतरफा तो नहीं था
समय बदलता गया
आ गया वह दौर
जहाँ लग गया हूँ आपाधापी में
बीवी के साथ बच्चों की परवरिश में,
पर छूट गये हैं
कुछ सच्चे से, कुछ अपने से
जब याद करता हूँ इन्हे
बस तन्हा पाता हूँ
सोचता हूँ पत्र लिखूँ इन्हे
पर डरता हूँ
खुद से, अपने अहम से,
कहीं चोट ना लग जाये इसको
और चुपचाप जीता हूँ ख़ामोशी से।

रचनाकार:एफ. शिव
‌उत्कृष्ट विद्यालय कटंगी 

॥ दगाबाजों से सावधान ॥ चौपाई जब बारी ही फसल उजारे। कर दीजै तब उसे किनारे॥ विश्वासघात अंगरखा होई। त...