शोभा तिवारी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शोभा तिवारी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, मई 28, 2021

प्रकृति (कविता) : शोभा तिवारी 'समीक्षा'


  
शीर्षक  -  प्रकृति (कविता)
प्रकृति के ये नजारे 
            कितने सुंदर कितने प्यारे ,
नौका मे  करूँ विहार 
          कभी इस आर कभी उस पार,
नीले  गगन तले 
                    चले  ठंडी -ठंडी पवन,
देख कर दृश्य यह
              भाव विभोर हो रहा मन  ।
नदियॉ रहती अपनी धुन में 
              आसमान नीला - नीला 
खुबसूरत इन वादियों में 
                पक्षी उड़ते मस्तमौला
मन करता  हैं मै भी 
                  पक्षी  बन उड़ जाऊँ 
छू   लूँ  जाके गगन 
            हवा के साथ लहराऊँ ।
सुबह का सूरज उगता जैसे 
               नयी प्रेरणा  लाये 
उठो , जागो ,काम करो
            आलस त्यागो यही  सिखायें 
  इन बहारों  को देख 
                 खुशी मिल गयीं 
लगता  है जैसे 
           दिल की कली खिल गयी 
 कितनी सुंदर , कितनी प्यारी 
              लगती  हैं धरती  हमारी ,
 प्रकृति का श्रृंगार कर  सुन्दरता 
              हो जाती और भी  न्यारी।
इसी प्रकृति  के प्रेम मे
             आओ कही खो जाएँ ,
करते  रहे  प्रयत्न  हम अपनी 
         प्रकृति  को खुशहाल  बनाये ।
रचना:-
शोभा तिवारी "समीक्षा "  
          कोटाबाग , 
   नैनीताल , उत्तराखंड
[इस ब्लॉग में रचना प्रकाशन हेतु कृपया हमें 📳 akbs980@gmail.com पर इमेल करें अथवा ✆ 8982161035 नंबर पर व्हाट्सप करें, कृपया देखें-नियमावली

शनिवार, मई 01, 2021

मजबूरी मे भी हँस कर काम करता है मजदूर : शोभा



सादर नमन माँ शारदा 🙏
सादर नमन मंच 🙏
 
दिन  - शनिवार 
दिनांक  - 01 - 05 - 2021 
विधा - कविता  


मजदूर दिवस पर विशेष 
****************

दूसरों के घरों को बनाता
       है मजदूर 
 पर खुद झोपड़ी में रह लेता है
      मजदूर,
  बनाता है जो अपने हाथों से
      शहर  को 
 उससे भी पराया हो जाता
      है मजदूर ।

दुनिया का बोझ ढोता है मजदूर 
 पर उसके पास कुछ नही होता है ,
 चैन की नींद हम सोते हैं घरों में 
 पर कल की आस मे रोता है मजदूर ।

परिवार के लिए अपने हर दुःख 
   सहता है मजदूर 
ठंड मे ठिठुरता और गरमी मे 
   तपता है मजदूर  ,
अपनी इच्छाओ को जलाकर भी
फिर से काम पर निकलता है मजदूर ।

हमेशा चुप रह कर , बिना  लड़े  
मेहनत और लगन से काम करता
  है मजदूर , 
क्यों उसे उसका हक नही मिल 
   पाता है 
क्यों बनाया गया उसे हर पल 
     मजबूर ।

ग़रीबी मे जी कर भी उसके पास
   ईमानदारी हैं 
पर इंसानियत भूल लोगो ने उसे नीचा
     दिखाया हैं  ,
कभी ठुकराकर  , कभी दुत्कार कर
हमेशा मजाक बनाया हैं 
 पर मजबूरी मे भी  हँस कर काम  
    करता है मजदूर  । 


शोभा " समीक्षा "
उत्तराखंड 

सभी मेहनतकश लोगो को समर्पित कविता  जिनकी वजह से हम अपने घरों मे आराम से रह पाते है ,,,, 

धन्यवाद 🙏🙏 💐💐
[इस ब्लॉग में रचना प्रकाशन हेतु कृपया हमें 📳 akbs980@gmail.com पर इमेल करें अथवा ✆ 8982161035 नंबर पर व्हाट्सप करें, कृपया देखें-नियमावली] https://apaskibaatsune.blogspot.com/p/blog-page_21.html

सोमवार, मार्च 29, 2021

होली विशेष: शोभा तिवारी "समीक्षा"



सादर नमन मंच 🙏

होली विशेष

कौन सा रंग लगाओगे 
     जो हमेशा के लिए चढ़ जाये
क्योंकि भाँति  भाँति के रंग हैं,
             और है रंग रंग के लोग ,
     रंगों में सब आज रंगे हुए है 
                        हुए लाल गुलाबी लोग  ।
  अपने प्यार का रगं चढ़ाने 
                  आये  है सब हमजोली ,
 सारे मतभेद भूलाकर 
            आओं खेले हम भी होली  ।
Happy holi all of you..🙏🙏
[इस ब्लॉग में रचना प्रकाशन हेतु कृपया हमें 📳 akbs980@gmail.com पर इमेल करें अथवा ✆ 8982161035 नंबर पर व्हाट्सप करें, कृपया देखें-नियमावली] 

रविवार, मार्च 28, 2021

प्यार के रंग (कविता) : शोभा तिवारी



...............................................................
दिन.... बुधवार 
दिनांक  ...17 - 03 - 2021

" कर्ज़ चुकाना पड़ता हैं  
              यहाँ फ़र्ज निभाता पड़ता  हैं  ,
   दुनिया का दस्तूर यही है 
        यहाँ गम में भी मुस्कुराना पड़ता है " ।
...............................................................
दिन  - शुक्रवार 
दिनांक  - 26 - 03 - 2021

नहीं होता अब यकीन किसी पर 
जीवन मे हर इंसान  नया सबक दे जाता हैं ,
पहने हैं चेहरे पर सबने नकाब 
कोई  पराया तो कोई  अपना बन धोखा दे जाता है ।
झूठ की बुनियाद  पर टिकी है दुनिया  
सच को कोई पहचान नही पाता  है ।
स्वार्थ  और मतलब के लिए जीते हैं  लोग 
तभी तो आज इंसान ही इंसान  का दुश्मन बन जाता  है।
..............................................................
सादर नमन माँ शारदा 
सादर नमन मंच 
दिनांक   -  28 - 03 - 2021
दिन -   रविवार 


प्यार के रगं हजार 
जिससे है जीवन मे बहार ,
खुशियों से झूमो ,नाचो , गाओ 
और मनाओ  रंगो  का त्यौहार  ।
जला के आज अपनी सारी बुराई 
होगी जीत हमेशा सच्चाई और अच्छाई की ,
गुजिया  और नमकीन की ख़ुशबू के साथ 
मुबारक हो आपको होली का त्यौहार  ।


शोभा तिवारी "समीक्षा" 
उत्तराखंड  

आप सभी को मेरी और मेरे परिवार की ओर से आपको व आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई  🙏🙏💐💐😊😊
....................................................................
[इस ब्लॉग में रचना प्रकाशन हेतु कृपया हमें 📳 akbs980@gmail.com पर इमेल करें अथवा ✆ 8982161035 नंबर पर व्हाट्सप करें, कृपया देखें-नियमावली

सोमवार, मार्च 08, 2021

स्त्री और स्त्रीत्व : शोभा तिवारी



सादर नमन माँ शारदा 🙏
सादर नमन मंच 🙏
दिन - सोमवार 
दिनांक  - 08 -03-2021

स्त्री और स्त्रीत्व
स्त्री और स्त्रीत्व 
दोनो है महान ,
दो घरों को रोशन करने
का करती है ये काम ।
संजोए रखती घर को 
तो कभी संभालती देश को 
अपनी हर जिम्मेदारी को 
ये बख़ूबी निभाए 
कभी माँ सरस्वती तो 
कभी ये काली बन जायें ,
इसके हर रूप को है मेरा है प्रणाम
नमन है हर स्त्री को जो है देश की शान ।

आप सभी को महिला दिवस की हार्दिक
शुभकामनाएं और बधाई  🙏🙏💐💐

शोभा तिवारी " समीक्षा  "✍
उत्तराखंड  😊
[इस ब्लॉग में रचना प्रकाशन हेतु कृपया हमें 📳 akbs980@gmail.com पर इमेल करें अथवा ✆ 8982161035 नंबर पर व्हाट्सप करें, कृपया देखें-नियमावली

शुक्रवार, फ़रवरी 26, 2021

मुझ पर हँसते हो (कविता)


मुझ पर हँसते हो 

मुझ पर हँसते हो 
क्यूं मेरा मजाक बनाते  हो ,
जितना मै खुद को समझती हूँ 
इतना तुम कहाँ समझते हो ।
मेरा क़ाबिलियत पर भरोसा है मुझे 
क्योंकि खुद के लिए जीना है मुझे ,
इस बात को तुम कहाँ समझते हो 
मुझे नादान समझकर तुम खुद को 
कितना सयाना समझते हो ? 

शोभा तिवारी ✍
काशीपुर उत्तराखंड 😊
मौलिक स्वरचित और अप्रकाशित रचना

मंगलवार, जनवरी 26, 2021

भारत देश हमारा (कविता) : शोभा तिवारी उत्तराखण्ड



💐💐आप सभी को 72 वें  गणतंत्र दिवस की हार्दिक  शुभकामनाएं और बधाई💐💐
   जय हिंद,जय भारत
भारत देश हमारा
 
भारत देश हमारा,
हमें जान से है प्यारा

कल-कल करती गंगा, यमुना 
इसी के गुण गाती है। 
हमारी इस पुण्य धरा में 
अपनी गुंजार  सुनाती है। 
फक्र  से अपना परिचय देते 
हम तो हिंदुस्तानी हैं। 
रंग लाती हर कुबार्नी  यहाँ  पर
विकसित होता राष्ट्र हमारा
भारत देश हमारा, 
हमें जान से है प्यारा 

प्रहरी बना हिमालय बैठा, 
धरा सोने की गागर है।
चरणों को भारत माता के 
धोता हर पल सागर है।
माह छब्बीस को हम सब मिलकर  
गणतंत्र दिवस मनाते हैं। 
फहरा के तिरंगा प्यारा  
गीत ख़ुशी के गाते हैं।  
सत्य, अहिंसा, शांति  बाँटता,
ये तो  तिरंगा प्यारा   
भारत देश हमारा,
हमें  जान से है प्यारा   

गणतंत्र दिवस के इस शुभ दिन
एक नया सूरज आया। 
नव परिधान बसंती रंग का 
भारत  मां को पहनाया।
संविधान, आजादी वाला 
इस दिन हमने पाया।
इस दिन ही दुनिया में भारत 
नव गणतंत्र बन आया। 
रहें कहीं  भी हम, 
काम सभी कर सकते हैं।
पंचायत से एम पी तक 
हम चुनाव लड़ सकते हैं।
दुनिया में सबसे न्यारा 
आंखों का यह है तारा  
भारत देश हमारा,
हमें जान से है प्यारा

क्या करना, क्या नहीं करना 
संविधान यह बतलाता है। 
ऊँच-नीच का भेदभाव ना करना  
संविधान यह सिखाता है।
लेकिन संविधान को पढ़कर 
मानवता को तुम जान लो। 
अधिकार के साथ ही कर्तव्य 
अपने पहचान लो। 
लोकतंत्र जिसकी पहचान, 
देश गणतंत्र हमारा है 
भारत देश हमारा 
हमें जान से प्यारा है 
।।धन्यवाद।। 
//रचना//
शोभा तिवारी ✍
काशीपुर उत्तराखंड 😊

[इस ब्लॉग में रचना प्रकाशन हेतु कृपया हमें 📳 akbs980@gmail.com पर इमेल करें अथवा ✆ 8982161035 नंबर पर व्हाट्सप करें, कृपया देखें-नियमावली

सोमवार, जनवरी 25, 2021

प्रकृति : एक अनमोल उपहार (कविता) : शोभा तिवारी

           प्रकृति: एक अनमोल उपहार
                     शोभा तिवारी
कुदरत का दिया हुआ यह अनमोल उपहार है,
प्रकृति की खूबसूरती से सजा ये संसार है।
रंग-बिरंगे फूलों से छाई हुई बहार है ,
इनकी खुशबू से महका सब का द्वार है।

बारिश की पहली बूँदें जब धरती को छूती हैं ,
चारों तरफ फैली हरियाली पेड-पत्तियाँ झूमती है।
भोर भई जब सूरज की किरणें चमकती  हैं ,
धरती के माथे पर मानो बिंदिया सी सजती हैं।

नदियों में ना कोई सीमाएं हैं,
मस्त मगन सी बहती जाती हैं।
धाराओं की शोर सराहें ,
जैसै कोई गीत सुनाती हैं।
पर्वत की चोटी से छुता आसमां हैं
चारो तरफ अपनी शान फैलने  का
देता ये संदेश हैं।
धरती की खूबसूरती को
बर्फ़ और बादलों ने बढाया ।
कुदरत ने क्या यह अनमोल
उपहार बनाया ।
लगता  हैं  प्रकृति की खूबसूरती को
अपने  हाथों  से  सजाया ।
आओं इसकी रक्षा  में हम भी 
हाथ बढायें,
इस अनमोल उपहार को सुंदर स्वच्छ
बनायें।

//रचना//
शोभा तिवारी✍
उत्तराखंड
[इस ब्लॉग में रचना प्रकाशन हेतु कृपया हमें 📳 akbs980@gmail.com पर इमेल करें अथवा ✆ 8982161035 नंबर पर व्हाट्सप करें, कृपया देखें-नियमावली

॥ दगाबाजों से सावधान ॥ चौपाई जब बारी ही फसल उजारे। कर दीजै तब उसे किनारे॥ विश्वासघात अंगरखा होई। त...