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शनिवार, अप्रैल 11, 2020

बालिका को न पढाया तो: आर्यन


कन्या, बालिका का पर्यायवाची अर्थ है,
बालिका को न पढाया तो कमाना व्यर्थ है

जिस चीज को बालिका अर्जित करेगी, वो ज्ञान है,
जिसे अर्जित कर बालिका बनती विद्वान् है

शिक्षा की भावना समत्व है,
बालिका शिक्षा का इस संसार में बहुत महत्व है

बालिकाओं का शिक्षा लेना इस समाज में बाल अधिकार है,
इसीलिये सरकार को इनकी मदद करना स्वीकार है

इस देश की बेटियों को हम सबने सरस्वती देवी माना है,
तो आज हम सबने भी यह ठाना है कि इस देश की बेटियों को पढ़ाना है

जो गलती हमने पहले की उसे न हमें दोहराना है,
बालिकों को उनका शिक्षा का अधिकार दिलाना है

बालिका लक्ष्मी, सरस्वती जैसी देवियों की अवतार है,
उसमें झलकते अच्छे परिवार के संस्कार हैं

हमें बालिका शिक्षा को बनाना जरूरी है,
इसे कभी न बनने देना मजबूरी है

कई लोग बेटियों को नहीं पढ़ाते केवल पैसों के कारण,
इन समस्यों का मिल जुलकर करें निवारण

कुछ लोगों को लगता है पैसे जाते व्यर्थ में,
यह चीज बदल देती है समाज को अनर्थ में

यह समस्या अभी एक स्वरूपीय तालाब है,
यदि ध्यान न दिया तो यही बन सकता सैलाब है

इस मानसकिता को न बने रहने देना मेरा ख्वाब है,
मेरा दिल इन दिनों के लिए सदियों से बेतान है

आज उन्हीं बेटियों पर इस देश को नाज है,
फिर भी कई लोगों को इस बात से क्यों ऐतराज है? 
रचना: आर्यन पटेल,(ग्राम-पोस्ट बराछ)
ख्रिश्ता ज्योति मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल 
गोदावल रोड ब्यौहारी जिला-शहडोल (मध्यप्रदेश)
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गुरुवार, मार्च 26, 2020

कोरोना का रोना




हाहाकार मचा के रखा है,
सर्दी जुकाम कोरोना का प्रिय सखा है।

कोरोना से होती जीवन हानि है,
ये बन चुकी एक बड़ी परेशानी है

स्कूल एवं कालेज बन्द है,
जैसे कोरोना शिक्षा लेने आया है।
पता नहीं कोरोना किसका बदला ले रहा
जिसने चीन का भी दिल दुखाया है।।

108 से भी अधिक देशों में फैल चुकी ये बीमारी है।
यह कोई आम बात नहीं, यह महामारी है।

कोरोना की दवाई न मिलना, यह कैसा अनर्थ है।
क्या भारत इसकी औषधि बनाने में समर्थ है।।

चीन से फैला कोरोना का जंजाल है।
जिसने सारे संसार में काटा बवाल है।।

मना है सब कुछ,
न बाहर जाना।
हाथ जोड़ नमस्ते करना,
न हाथ मिलाना,
और चेहरे पर स्वच्छ नकाब लगाना।।

रचनाकार:आर्यन पटेल 

रविवार, जनवरी 05, 2020

आर्यन की कविता:सुनहरा भारत


सुनहरा भारत 
हम नागरिक हैं जो सुनहरा भारत है,
ताज महल भारत में ही बनायी गयी इमारत है।

भारत को हम बोलते हिन्दुस्तान है,
जो आज अमेरिकी देशों का भविष्य है उसे बनाना भारत का वर्तमान है।

भारतीय होने पर मुझे अत्यधिक गर्व है,
यह वही देश है जिसमें मानते हम ये ढेर सारे पर्व हैं।

भारतीय चमत्कार को देखने आते  कई अभ्यागत है,
मूल मंत्र ’’अतिथि देवो भव’’ से करते हम उनका स्वागत हैं।

भारत में 28 राज्य और 9 केन्द्रशासित प्रदेश है,
घूम लिया  सारी दुनिया लेकिन सबसे प्यारा स्वदेश है।

भारतीय भाई-बन्धुओं के बीच राष्ट्रीय एकता की भावना है,
भारत की सुख-शान्ति एवं भारत का प्यार सुहावना है।

भारत की सेना का हौसला बुलन्द है,
भारतीय होने में मिलता अलग-सा आनन्द है।

हिन्दुस्तानी मिट्टी का अलग-सा सुगन्ध है,
भारत एक ऐसा विषय हैे जिस पर लिखा जा सकता असीमित निबन्ध है।
रचना: आर्यन पटेल,
कक्षा-9वीं
ख्रिश्ता ज्योति मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल 
गोदावल रोड ब्यौहारी जिला-शहडोल (मध्यप्रदेश)
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आर्यन की कविता:दोस्त


दोस्त
दोस्त वही है जिसने मेरी जिंदगी सवारी मुझको गले लगाके,
बैठा दिया फलक पे मुझे खाख से उठाके।

दोस्त का पर्यायवाची शब्द सखा है,
झूठ दोस्त से मत बोलो क्योंकि उसने तुम्हारे साथ दुश्मनों की मार चखा है।

दोस्त को जीवन में कभी मत समझो कलंक,
क्योंकि वही तुमको चमकाता है जैसे कोई मयंक।

एक दोस्त का दूसरे दोस्त से होता ऐसा बंधन है,
यह आडम्बर नहीं भगवान का उपहार वाला प्रबंधन है।

दोस्त वही है जिसका मैं हूँ आभारी, उसके लिए ये कविता सजाके,
क्योंकि दोस्त वहीं है जिसने मेरी जिंदगी सवारी मुझको गले लगाके।

दोस्त को हम प्यार से बुलाते मित्र हैं।
दिखावा दोस्त से नहीं, क्योंकि उसको मालूम है आपका कैसा चरित्र है।

दोस्ती में किसी चीज का पहरा नहीं होता,
सच में मान लो दोस्ती में धोखे का रंग गहरा नहीं होता।

दोस्ती ने हर संबंध को दिया अलग-सा नजरिया,
जैसे तिरंगे का संबंध गहरा रंग केशरिया।

दोस्ती में होता अलग-सा प्रेम, अलग सा विश्वास है।
कृष्ण जी और सुदामा जी के जैसे इस का गवाह इतिहास है।

सुदामा के सगे मित्र हैं कृष्ण मुरारी, सारे भेदभाव हटाके।
क्योंकि दोस्त वही है जिसने मेरी जिंदगी सवारी, मुझको गले लगाके।
रचना: आर्यन पटेल,
कक्षा-9वीं
ख्रिश्ता ज्योति मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल 
गोदावल रोड ब्यौहारी जिला-शहडोल (मध्यप्रदेश)
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गुरुवार, दिसंबर 26, 2019

प्रतिभा खोज परीक्षा:आर्यन पटेल

झाॅंपर उत्कर्ष युवक मण्डल समिति द्वारा आयोजित प्रतिभा खोज परीक्षा पर प्रस्तुत है आर्यन की ये पंक्तियाँ-
प्रतिभा खोज परीक्षा
आर्यन पटेल 
झाॅंपर उत्कर्ष युवक मण्डल समिति,
इसमें नहीं है कोई सोची समझी राजनीति।

आइए दोेस्तो भर दीजिए इस परीक्षा के आवेदन को, 
तो कृपया मान लीजिए अपने स्वजातीय साथियों एवं वंदनीय महिलाओं सहित पधारने के निवेदन को ।

विनम्र भाषण, जवाबदेही,सत्यनिष्ठा, कार्यनीति, सहयोग 
समग्रता, प्रोत्साहन, समर्पण, पारदर्शिता अनुशासन है,
उत्कर्ष होने के लिए ये दस सिंहासन है।

झाॅंपर प्रतिभा खोज परीक्षा पाॅच स्तरों में विभाजित है,
समिति  पूरी कोशिश कर रहा है कि भेदभाव न हो क्योंकि अच्छाई अपराजित है।

हमें मिला यह एक उत्कर्ष पंचांग है,
यह सुनहरे भारत की ओर एक लंबी छलांग है।

साथ ही हमें मिला यह निमंत्रण पत्र है, 
आगे चलकर इस परीक्षा को देने वाला हर परीक्षार्थी चमकेगा जैसे कोई नक्षत्र है।

परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए हमें मिला यह पाठ्यक्रम,
27 दिसम्बर 2019 तारीख को होगा यह प्रतिभा खोज की परीक्षा का कार्यक्रम।

प्रत्येक स्तर के लिए परीक्षा 50 रुपए निर्धारित है, 

झाॅंपर उत्कर्ष के उद्देश्य सुविचारित है।

समिति   का उद्देश्य है बनवाना केन्द्रीय पुस्तकालय का,
समिति  बन चुकी है विषय कौतूहल का।

आज मैंने कुछ कहा है इन पंक्तियों से।
इस रचना को लिखा है मैने स्वयं की दिमागी शक्तियों से।
रचना: आर्यन पटेल,
कक्षा-9वीं

ख्रिश्ता ज्योति मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल 
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बुधवार, अक्टूबर 02, 2019

आजादी की डोर बाँधी है:आर्यन


आजादी की डोर बाँधी है:आर्यन
गाँधी जी का पूरा नाम मोहन दास करमचंद  गाँधी है,
इन्होंने ही आजादी की डोर बाँधी है

दो अक्टूबर सन अठारह सौ उनहत्तर को जन्म हुआ इस स्वतंत्रता सेनानी का, 

सम्मान करते हैं हम इस बलिदानी का

गाँधी जी पर इस देश को गर्व है, 

उनके जन्म दिन पर मनाते हम पर्व है

तेरह वर्ष की उम्र में स्वयं  की शादी करायी थी,  

वह महिला कोई और नहीं कस्तूरबा बाई थी 

गाँधी जी ने इंग्लैंड में  की  कानून की पढाई  थी,

1930 में नमक आन्दोलन में अंग्रेजों से की मुश्किल लड़ाई  थी 

1942 में भारत छोडो आन्दोलन का बहुत बोलबाला था, 

आख़िरकार भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी दिला डाला था 

गाँधी जी का कपडा बनाने वाला चरखा मशीन था,

गाँधी जी का रामराज्य का सपना कितना हसीन था

नाथूराम गोडसे से गलती हुयी थी, उसे न  माफ़ किया जाय,  

गाँधी जी के रामराज्य से गंदगी साफ़ किया  जाय
रचना: आर्यन पटेल,
कक्षा-9वीं
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मंगलवार, अक्टूबर 01, 2019

विद्या तू महान है



विद्या तू महान है

ओ रे! विद्या तू महान है।

तू है तो जिन्दगी में नहीं कोई गम है,
तू नहीं तो तेरे बिना न हम हैं।
तू है तो जिन्दगी में आनन्द व सम्मान है,
ओ रे! विद्या तू महान है।

ओ रे! विद्या तूने ही बोलना सिखाया है,
और तूने ही 'रोबोट' का जमाना दिखाया है।
गरीब हो या अमीर हो तू करती सबकी 'केयर' है,
तुझको ललकारना इन्सान की सबसे बड़ी 'डेयर' है।
सिखाया यही है कि
तुझे पाने के बाद न करना हमें अभिमान है,
ओ रे! विद्या तू महान है।

विद्या तुझसे ही बनती हमारी जिन्दगी है,
तुुझे न पाया तो सारा जीवन शर्मिन्दगी है।
विद्या है तो हमारा स्वागत फूलों के हार से होता है,
विद्या न हुई तो हर इन्सान रह-रह के रोता है।
इतिहास गवाह है,
और इस बात का हर इन्सान देता बयान है,
ओ रे! विद्या तू महान है।
रचना: आर्यन पटेल,
कक्षा-9वीं
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मंगलवार, सितंबर 24, 2019

माॅं से होती दुनिया शुरू है:आर्यन की कविता


माॅं से होती दुनिया शुरू है

आर्यन पटेल 
माॅं दुनिया की सबसे पहली गुरू है,
माॅं से होती दुनिया शुरू है।

माॅं ने मुझको खुश रखने के लिए कई कष्ट झेले हैं,
माॅं ने मुझको साथ रखने के लिए कई खेल खेले हैं।

माॅं मारती जरूर है पर प्यार भी करती है,
माॅं स्कूल भेजती जरूर है पर घर आने का इंतजार भी करती है।

माॅं से बड़ा परोपकारी इस विश्व में नहीं है कोई
लेकिन बच्चे को डाॅंटने के बाद अकेले में माॅं बहुत रोई।

मेरी माॅं त्याग एवं बलिदान करने वाली है
मेरी माॅं हर तरफ बाॅटती खुशहाली है।

माॅं चलना सिखाती है हमको
माॅं प्यार से सहलाती है हमको।

माॅं खाना खिलाती है हमको
माॅं दुनिया के साथ चलने के काबिल बनाती है हमको।

माॅं से सुन्दर, माॅं से प्यारा इस दुनिया में न कोई आया है, न कोई आएगा,
अगर हमने माॅं की सेवा न की तो कोई सुख न मिल पाएगा।

माॅं से प्यारी, माॅं से न्यारी न कोई अब तक आयी है,
आज फिर से माॅं हमेशा की तरह खाने का निवाला खिलायी है।
रचना: आर्यन पटेल,
कक्षा-9वीं
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गुरुवार, सितंबर 12, 2019

पेड़ ही हमारी जिंदगी हैं:आर्यन पटेल

पेड़ ही हमारी जिंदगी हैं
आर्यन पटेल
तरु, वृक्ष का अर्थ है,
इसे काटना व्यर्थ है।

पेड़ ही हमारी जिंदगी है,
पेड़ काटना सबसे बड़ी शर्मिंदगी है।

पेड़ हमें प्रदान करती कोमल छाया है,
इससे बढ़कर न कोई अब तक परोपकार दिखलाया है।

वृक्ष परोपकारी एवं खूबसूरत है,
जैसे भूमि से तराशी गयी  कोई मूरत है।

वृक्ष बचाना हमारा कर्तव्य है,
क्योंकि इसका दृश्य ही बहुत भव्य है।

वृक्ष का हर पत्ता उतना ही खास है,
जैसे वृक्ष से हमें मिलता हर्ष और उल्लास है।

यह हमारी सांस मुफ्त हमें देता है,
गंदी वायु  हमारी ले लेता है।

लकड़ी भी देता, जिससे कुर्सी मेज बनाते हैं,
इसी में तो पक्षी भी अपना घोंसला बनाते हैं।

फिलहाल तो मेरी ख्वाहिश अधूरी है,
क्योंकि वृक्ष हमारे लिए बहुत जरूरी है।

वृक्ष बहुत ही मनमोहक और बयूटीफुल है,
इसे नुकसान पहुंचाना इंसान की सबसे बड़ी भूल है।


(कृपया इस रचना को अपने मित्रों और परिचितों तक पहुंचाकर रचनाकर का मनोबल बढ़ाने का कष्ट करें)

रचना: आर्यन पटेल,
कक्षा-9वीं
ख्रिश्ता ज्योति मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल 
गोदावल रोड ब्यौहारी जिला-शहडोल (मध्यप्रदेश)

【यह ब्लॉग नौनिहालों के लिए समर्पित है। कृपया आपके आसपास के विद्यार्थियों की रचनाएँ हम तक पहुंचाने का कष्ट करें। उनकी रचनाएँ प्रकाशित करने में हमें प्रसन्नता होगी। यदि आपके पास जनोपयोगी कोई सामग्री या रचना हो तो आप भी अपनी रचनाएँ हमें भेज सकते हैं।】
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मंगलवार, सितंबर 10, 2019

पानी है ऐसा: बालमन आर्यन की कविता

पानी है ऐसा
             आर्यन पटेल
पानी हमारे लिए बहूत खास है,
पानी जिंदगी के लिए एक आश है।

पानी है ऐसा,
जैसे अमीरों के लिए पैसा।

पानी बुझाती हमारे गले की प्यास है,
जैसे जिंदगी के लिए श्वास है।

पानी को बचाना मेरी ख्वाहिश है,
यहीं से शुरू होती मेरी छोटी-सी आजमाइश है।

पानी हमारे लिए बहुत ही 'मेन' है,
क्योंकि भैया ये प्रकृति की देन है।

पानी का अपव्यय क्यों करते हो
यह बहुत ही है कम,
फिर नहीं बोलना कि हम क्यों हो गए खतम।

दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है,
लेकिन पानी बिना कुछ भी संभव नहीं है।

पानी के बिना जिंदगी है अधूरी,
क्योंकि ये जिंदगी के लिए है जरूरी।

पानी से बढ़ रही है इंसान की दूरी,
इसे कभी न बनने देना मजबूरी।

पानी को करें एकत्रित उसको व्यर्थ न बहाएँ,
चलो आज  हम पानी के लिए एक नारा लगाए।

"गली-गली में शोर है,
पानी न बचाने वाला हर व्यक्ति चोर है।"

रचना: आर्यन पटेल,
कक्षा-9वीं
ख्रिश्ता ज्योति मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल 
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॥ दगाबाजों से सावधान ॥ चौपाई जब बारी ही फसल उजारे। कर दीजै तब उसे किनारे॥ विश्वासघात अंगरखा होई। त...