सोमवार, मार्च 08, 2021
विश्व महिला दिवस (कविता)
गुरुवार, फ़रवरी 11, 2021
📍क्रांतिवीर तिलका मांझी📍 : बी एस कुशराम
सोमवार, जनवरी 25, 2021
मतदाता दिवस 25 जनवरी (कविता) : बी एस कुशराम

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या (कविता) : बी एस कुशराम
शनिवार, सितंबर 05, 2020
🌷 शिक्षक दिवस🌷:बी.एस. कुशराम

रविवार, अगस्त 02, 2020
वक्त (कविता): बी एस कुशराम
वक्त
(कविता)
वक्त बड़ा बलवान है, यह तो बहुत महान है।
वक्त की धारा जो अपनाता,वहीं खरा इंसान है।।
सुख में हंसाता दुख में रुलाता, वक्त वक्त की बात है,
वक्त चक्र तो चलता रहता, वक्त सदा गतिमान है।वक्त की---।
वक्त से होता ऋतु परिवर्तन, वक्त से ही दिन रात है,
बीता वक्त बहुरि ना आता, वक्त की महिमा महान है। वक्त की-----।
बालापन यौवन बुढ़ापा,वक्त ही तो बताता है,
जीवन चक्र वक्त भरोसे, कहते सभी सुजान है। वक्त की-----।
वक्त भला है वक्त बुरा है, वक्त ये देता परिचय है,
अच्छा बुरा तो आता रहता, वक्त चक्र गतिमान है। वक्त की-----।
व्यर्थ गंवाओ नहीं वक्त को,वक्त के सब पाबंद रहो,
सद प्रयत्न परिश्रम करिए, वक्त क्षणिक मेहमान है। वक्त की-----।
वक्त बड़ा अनमोल है, इसका कोई मोल नहीं,
सदुपयोग वक्त का करिए, बन जाएंगे काम है। वक्त की-----।
वक्त सफलता की कुंजी है,वक्त पकड़ सब काम करो,
कामयाबी मिलके रहेगी, यह कहता "कुशराम" है।।
वक्त बड़ा बलवान है, यह तो बहुत महान है।
वक्त की धारा जो अपनाता, वही खरा इंसान है।।
रचनाकार-बी एस कुशराम बड़ी तुम्मी
जिला अनूपपुर (मध्य प्रदेश)
मंगलवार, जुलाई 21, 2020
बचपन (कविता) : बी एस कुशराम

मंगलवार, जुलाई 14, 2020
तिरंगा: बी एस कुशराम

"तिरंगा"
भारतीयों का ये स्वाभिमान है तिरंगा।।
तिरंगा में है रंग तीन, घबरा गया है चीन-2
अब ना लेगा वह,भारतीय भूमि से पंगा।
भारत भू के लिए------------
केसरिया श्वेत हरित, संविधान में है पारित-2
भारतीय संविधान कहता, सभी रहे चंगा।
भारत भू के लिए----------
प्रतीक है ऑन का, जांबाजों के बलिदान का-2
जज्बा जगाएं जवानों का, ना होंगे तब दंगा।
भारत भू के लिए---------
श्वेत है सादगी रंग,स्वच्छता भी है संग-2
स्वच्छ रखो तटिनी,है जो पावन गंगा।
भारत भू के लिए------------
सोंधी माटी यहां की, प्रेरक है जहां की-2
कोई ना रहेगा अब, भूखा और नंगा।
भारत भू के लिए-----------
"कुशराम"करो सम्मान,यह तिरंगा है महान-2
लहराएगा तिरंगा, जिस में समाया त्रय रंगा।
भारत भू के लिए, वरदान है तिरंगा।
भारतीयों का ये, स्वाभिमान है तिरंगा।।
रचनाकार- बी एस कुशराम बड़ी तुम्मी
जिला-अनूपपुर (मध्य प्रदेश)
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वसुधा:बी एस कुशराम
इस का मान बढ़ाना है,पर्यावरण बचाना है।।
धरा धरातल धरनी धरती,
हम सबके ये उदर को भरती।
हमसे ना कुछ मांगे धरती,
बिन मांगे पालन है करती।।
धानी चुनर ओढा़ना है,पर्यावरण बचाना है।
वसुधा को हमेंसजाना है,पर्यावरण बचाना है।।
आओ सब मिल पेड़ लगाए ,
वसुधा में हरियाली लाएं।
वायु प्रदूषण करें नियंत्रण,
स्वच्छता का लेवें हम प्रण।।
ये प्रण हमें निभाना है, पर्यावरण बचाना है।
वसुधा को हमें सजाना है,पर्यावरण बचाना है।।
माना प्रगति है अति आवश्यक,
अति लोलुपता बना विनाशक।
सीमा रहित कर रहे हैं दोहन,
प्रदूषण को नहिं करते नियंत्रण।
उद्योगों को अब चेताना है,पर्यावरण बचाना है।
"कुशराम"ने यह ठाना है,पर्यावरण बचाना है।।
वसुधा को हमें सजाना है, पर्यावरण बचाना है।
इसका मान बढ़ाना है,पर्यावरण बचाना है।।
दिनांक 11/07/ 2020 दिन-शनिवार
Ⓒरचनाकार- बी एस कुशराम बड़ी तुम्मी
जिला अनूपपुर (मध्य प्रदेश)
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शनिवार, जुलाई 11, 2020
बी एस कुशराम की दो कविताएँ
मंगलवार, जुलाई 07, 2020
कुछ भी असंभव नहीं: बी एस कुशराम

☀️कुछ भी असंभव नहीं☀️
मानव तन के लिए, कुछ भी असंभव नहीं,
जीत का जज्बा हो तो,कभी भी पराभव नहीं।
निराशा भाव छोड़ ,श्रम सदा करते रहें,
हतबल हाथों के लिए,कामयाबी संभव नहीं।
मानव तन के लिए---------
कामयाबी कदम चूमे,बुद्धि और कौशल से,
हताश वही होता,जिसके पास अनुभव नहीं।
मानव तन के लिए---------
श्रम सफलता की कुंजी,सद्बुद्धि से श्रम करें,
असफल वही है जिसमें, बुद्धि का उद्भव नहीं।
मानव तन के लिए---------
कुशराम कहें आलस्य छोड़, अपनावें सद्मार्गी जोश,
विफल वही है जिसके,सद्कार्य में सदाभव नहीं।
मानव तन के लिए,कुछ भी असंभव नहीं,
जीत का जज्बा हो तो,कभी भी पराभव नहीं।।
दिनांक07/07/2020
रचनाकार-बी एस कुशराम बड़ी तुम्मी
जिला अनूपपुर ( मध्य प्रदेश)
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शुक्रवार, जुलाई 03, 2020
डोली (कविता): बी एस कुशराम

उस में बैठकर एक नवेली चली।।
कंधे से उठाए हैं चार कहार,
संग में बारातियों की टोली चली।
बाबुल के घर से-------------
सजना से मिलने के सपने सजाए,
मासूम चेहरा एक भोली चली।।
बाबुल के घर से------------
सोलह शृंगार किए बैठी है दुल्हन,
गोटेदार चमकीली चोली सजी।
बाबुल के घर से-----------
अल्हड़ अठखेलियां करती थी नैहर,
स्तब्ध भाव लेकर हमजोली चली।
बाबुल के घर से------------
बाबुल का छुटा घर सखियों से बिछुड़ी,
गमगीन दशा में छोड़ खोली चली।
बाबुल के घर से-----------
कुशराम विदाई पल होती दुखदाई,
ऐसा लगे जिगर में गोली चली।
बाबुल के घर से एक डोली चली,
उस में बैठकर एक नवेली चली।
दिनांक- 03/07/ 2020
रचनाकार--बी०एस०कुशराम,
बड़ी तुम्मी जिला अनूपपुर (म०प्र०)
मो०-9669334330
7828095047
जिला अनूपपुर ( मध्य प्रदेश)
सधन्यवाद
।
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गुरुवार, जुलाई 02, 2020
श्रृंगार (कविता): बी.एस. कुशराम
स्वेत दंत जब खिल खिलाए,दर्शकों के मन को भाए,
मंगलवार, जून 30, 2020
कुदरत का करिश्मा: बी एस कुशराम
गुरुवार, जून 25, 2020
तकदीर की लिखावट: बी एस कुशराम
बुधवार, जून 24, 2020
वीरांगना महारानी दुर्गावती:बी एस कुशराम
24जून को वीरांगना महारानी दुर्गावती की बलिदान दिवस है। इस अवसर पर उनकी श्रद्धांजलि में प्रस्तुत है यह रचना:-
वीरांगना महारानी दुर्गावती
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