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सोमवार, मार्च 08, 2021

विश्व महिला दिवस (कविता)



📍विश्व महिला दिवस 2021📍
ओ भारत की नारी --कला तेरी जग में है न्यारी।
   दुर्गावती दलपत की रानी,
    मुगलों को की पानी पानी।
      झलकारी और लक्ष्मी बाई,
       अंग्रेजों से लड़ीं।  लड़ाई।।
रण में करीं किलकारी -कला तेरी जग में है न्यारी।।
    प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई,
     शिक्षा की ओ अलख जगाई ।
       कमला कस्तूरबा भीमाबाई,
        त्याग भावना सबको सिखाईं।।
गुण गाए जग सारी --कला तेरी जग में है न्यारी।।
   सरोजिनी नायडू प्रथम गवर्नर,
     भारत गर्वित होता है इन पर।
       दूरदर्शिता इंदिरा जी की,
        कविता सुभद्रा की लगे नीकी।।
इनसे है दुनिया हारी --कला तेरी जग में है न्यारी।।
   राष्ट्रपति थीं प्रतिभा ताई,
     संसद में मीरा धाक जमाई।
      मुख्यमंत्री रही माया ललिता,
        बंगाल शेरनी बनी है ममता।
सुषमा थीं संसद में भारी --कला तेरी जग में है न्यारी।।
  ऐसी तुम भी बन सकती हो,
     इनसे भी आगे बढ़ सकती हो।
       शर्त यही है पढ़ो   पढ़ाओ,
        खुद भी बढ़ोऔर सब को बढ़ाओ।।
यही है सीख हमारी --कला तेरी जग में है न्यारी।।
   माना शर्म तुम्हारी   गहना,
     पर अब जागो चुप ना रहना।
        कहें"कुशराम" जो मानो कहना,
         बन सकती हो   भारत रत्ना ।।
सब के हित में है जारी-- कला तेरी जग में है न्यारी ।
ओ भारत की नारी--कला तेरी जग में है न्यारी।।
               रचयिता-बी.एस.कुशराम बड़ी तुम्मी
                      जिला-अनूपपुर (म.प्र.)

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गुरुवार, फ़रवरी 11, 2021

📍क्रांतिवीर तिलका मांझी📍 : बी एस कुशराम



📍क्रांतिवीर तिलका मांझी📍
    (11फरवरी,जन्म दिवस)
वीर शिरोमणि तिलका मांझी, को करते हैं सेवा जोहार।
आज जन्म दिवस के अवसर, हम करते हैं जय जय कार।।
   ग्यारह फरवरी सत्तरह सौ पचास, में जन्मे थे जबरा-2
सुल्तानगंज के तिलकपुर गांव, प्रांत जानो रहा बिहार।वीर----।
   जबरा पहाड़िया नाम रखे थे, पिता   सुन्दरा   मुर्मू-2
आदिवासियों के हित साधक, इनका रहा संथाल परिवार।वीर-----।
   नाम रख दिए अंग्रेजों ने, इनका तिलका मांझी-2
शब्दार्थ तिलका का गुस्सैल और, मांझी का ग्राम सरदार।वीर----।
   सत्तरह सौ इकहत्तर से चौरासी,जंग लड़े अंग्रेजों से-2
थर्राये अंग्रेजी सैनिक, सुनकर तिलका की ललकार।वीर------।
   मजिस्ट्रेट क्लीवलैंड को, चौरासी में मार दिया--2
उसे पकड़ने अंग्रेजों ने, किए बृहद खाका तैयार।वीर-----।
    अंग्रेजों ने उसे पकड़कर,मीलों मील घसीटे थे-2
घोड़ों के पीछे बांध उसे, जो गिनती के घोड़े चार।वीर----।
   तेरह जनवरी सत्तरह सौ पचासी, उन को दी गई फांसी-2
खुले आम चौराहे स्थित,था एक बट तरु डार ।वीर-----।
   प्रथम शहीद हुए थे मांझी, लेकिन ये दर्जा प्राप्त नहीं-2
नाम छिपाए क्रांतिवीर का, रहे हों जो भी कलमकार।वीर-----।
   आदि विद्रोही थे तिलका जी, स्वतंत्रता आंदोलन के-2
"कुशराम"उन्हें सम्मान न मिला, जिसके थे सच्चे हकदार।
वीर शिरोमणि तिलका मांझी,को करते हैं सेवा जोहार ।।
                    रचयिता-बी एस कुशराम बड़ी तुम्मी
                          जिला-अनूपपुर (मध्य प्रदेश)
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सोमवार, जनवरी 25, 2021

मतदाता दिवस 25 जनवरी (कविता) : बी एस कुशराम




















































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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या (कविता) : बी एस कुशराम








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शनिवार, सितंबर 05, 2020

🌷 शिक्षक दिवस🌷:बी.एस. कुशराम

 
🌷 शिक्षक दिवस🌷
शिक्षक दिवस आज है,
  हम सबको  बड़ा नाज है,
    शिक्षक से ही   कायम है,
      गरिमामयी    समाज है।
सर्वपल्ली राधाकृष्णन,
  इन्हें करें हम सब नमन,
    जन्मदिन है पांच सितंबर,
      शिक्षक दिवस   आज है।
शिक्षक युग निर्माता है,
  सभी को यही सिखाता है,
    सद्कर्म,सद् व्यवहार से,
      बन जाए सबके  काज है।
अभी कोरोना काल  है,
  शिक्षक का हाल बेहाल है,
    घर घर जाकर बताओ तुम,
      यह शासन की आवाज है।
"कुशराम"करता है आह्वान,
  शिक्षक का सब करो सम्मान,
    शिक्षक के दिव्य ज्ञान से ही,
      उभरेगा सभ्य समाज है,
        शिक्षक दिवस आज है।।
रचनाकार- बी.एस. कुशराम बड़ी तुम्मी
         जिला -अनूपपुर (मध्य प्रदेश)
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रविवार, अगस्त 02, 2020

वक्त (कविता): बी एस कुशराम


वक्त (कविता)

वक्त बड़ा बलवान हैयह तो बहुत महान है।

वक्त की धारा जो अपनाता,वहीं खरा इंसान है।।

सुख में हंसाता दुख में रुलातावक्त वक्त की बात है,

वक्त चक्र तो चलता रहतावक्त सदा गतिमान है।वक्त की---।

वक्त से होता ऋतु परिवर्तनवक्त से ही दिन रात है,

बीता वक्त बहुरि ना आतावक्त की महिमा महान है। वक्त की-----।

बालापन यौवन बुढ़ापा,वक्त ही तो बताता है,

जीवन चक्र वक्त भरोसेकहते सभी सुजान है। वक्त की-----।

वक्त भला है वक्त बुरा हैवक्त ये देता परिचय है,

अच्छा बुरा तो आता रहतावक्त चक्र गतिमान है। वक्त की-----।

व्यर्थ गंवाओ नहीं वक्त को,वक्त के सब पाबंद रहो,

सद प्रयत्न परिश्रम करिएवक्त क्षणिक मेहमान है। वक्त की-----।

वक्त बड़ा अनमोल हैइसका कोई मोल नहीं,

सदुपयोग वक्त का करिएबन जाएंगे काम है। वक्त की-----।

वक्त सफलता की कुंजी है,वक्त पकड़ सब काम करो,

कामयाबी मिलके रहेगीयह कहता "कुशराम" है।।

वक्त बड़ा बलवान हैयह तो बहुत महान है।

वक्त की धारा जो अपनातावही खरा इंसान है।।

रचनाकार-बी एस कुशराम बड़ी तुम्मी

जिला अनूपपुर (मध्य प्रदेश)

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मंगलवार, जुलाई 21, 2020

बचपन (कविता) : बी एस कुशराम

‼️"बचपन"‼️
काश बहुरि के दुबारा,आ जाता मेरा बचपन।
झमेला न झेलता, सदा रहता खेलता, यही तो है बचपन।।
   बार-बार आता है याद, दस-ग्यारह का मियाद,
   परिवार की परवरिश में, अब उम्र पार पचपन।
   काश बहुरि के----------------
मातु-पिता से जिद करना,बात-बात में मचलना,
बिन रोष मांग पूरी करते, हों चाहे निर्धन।
काश बहुरि के-----------------
   भाई- बहनों से रूठ जाना, तुरंत फिर मान जाना,
   बचपन में दोस्तों से, कई बार हो जाता अनबन।
   काश बहुरि के-----------------
अमराई में पहुंच जाते, पके आम तोड़ लाते,
माली से छुपते छुपाते, खाते मिल सखा जन।
काश बहुरि के-------------------
   लुका- छुपी का खेलते खेल,गुल्ली डंडा का मेल,
   आपस में होता हेलमेल, ऐसा होता है बालपन।
   काश बहुरि के--------------------
"कुशराम" की है नसीहत, करो ना कभी शरारत,
लिखाओ सु- इबारत,कोरा कागज है बाल मन।
काश बहुरि के दुबारा,आ जाता मेरा बचपन,
झमेला न झेलता ,सदा रहता खेलता, यही तो है बचपन।।
रचनाकार-बी एस कुशराम बड़ी तुम्मी
जिला-अनूपपुर (मध्य प्रदेश)
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मंगलवार, जुलाई 14, 2020

तिरंगा: बी एस कुशराम



"तिरंगा"
भारत भू के लिए  वरदान है तिरंगा।
भारतीयों का ये स्वाभिमान है तिरंगा।।
   तिरंगा में है रंग तीन, घबरा गया है चीन-2
   अब ना लेगा वह,भारतीय भूमि से पंगा।
   भारत भू के लिए------------
केसरिया श्वेत हरित, संविधान में है पारित-2
भारतीय संविधान कहता, सभी रहे चंगा।
भारत भू के लिए----------
   प्रतीक है ऑन का,  जांबाजों के बलिदान का-2
   जज्बा जगाएं जवानों का, ना होंगे तब दंगा।
   भारत भू के लिए---------
श्वेत है सादगी रंग,स्वच्छता भी है संग-2
स्वच्छ रखो तटिनी,है जो पावन गंगा।
भारत भू के लिए------------
   सोंधी माटी यहां की, प्रेरक है जहां की-2
   कोई ना रहेगा अब, भूखा और नंगा।
   भारत भू के लिए-----------
"कुशराम"करो सम्मान,यह तिरंगा है महान-2
लहराएगा तिरंगा, जिस में समाया त्रय रंगा।
भारत भू के लिए, वरदान है तिरंगा।
भारतीयों का ये, स्वाभिमान है तिरंगा।।
   रचनाकार- बी एस कुशराम बड़ी तुम्मी
   जिला-अनूपपुर (मध्य प्रदेश)
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वसुधा:बी एस कुशराम


🌲वसुधा🌲
वसुधा को हमें सजाना है,पर्यावरण बचाना है।
इस का मान बढ़ाना है,पर्यावरण बचाना है।।
   धरा धरातल धरनी धरती,
   हम सबके ये उदर को भरती।
   हमसे ना कुछ मांगे धरती,
   बिन मांगे पालन है करती।।
धानी चुनर ओढा़ना है,पर्यावरण बचाना है।
वसुधा को हमेंसजाना है,पर्यावरण बचाना है।।
   आओ सब मिल पेड़ लगाए ,
   वसुधा में हरियाली लाएं।
   वायु प्रदूषण करें नियंत्रण,
   स्वच्छता का लेवें हम प्रण।।
ये प्रण हमें निभाना है, पर्यावरण बचाना है।
वसुधा को हमें सजाना है,पर्यावरण बचाना है।।
   माना प्रगति है अति आवश्यक,
   अति लोलुपता बना विनाशक।
   सीमा रहित कर रहे हैं दोहन,
   प्रदूषण को नहिं करते नियंत्रण।
उद्योगों को अब चेताना है,पर्यावरण बचाना है।
"कुशराम"ने यह ठाना है,पर्यावरण बचाना है।।
वसुधा को हमें सजाना है, पर्यावरण बचाना है।
इसका मान बढ़ाना है,पर्यावरण बचाना है।।
दिनांक 11/07/ 2020 दिन-शनिवार
Ⓒरचनाकार- बी एस कुशराम बड़ी तुम्मी
         जिला अनूपपुर (मध्य प्रदेश)
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शनिवार, जुलाई 11, 2020

बी एस कुशराम की दो कविताएँ


🌹प्रशंसा🌹
यह सत्य है प्रशंसा से, बढ़ता है हौसला,
विरोधी की प्रशंसा से, घटता है फासला।
   प्रशंसा करो ऐसी कि, दिखावा ना होवे-2
   सच्ची हो प्रशंसा तो, सुलझता है मसला।
  यह सत्य है---------
झूठी प्रशंसा तो,चापलूसी कहलाती-2
भेद खुल जाने से, बढ़ जाता है फासला।
यह सत्य है-----------
   चापलूसी भरी प्रशंसा, गुलामी की निशानी-2
   आज की प्रशंसा में, झलकती है यह कला।
   यह सत्य है-----------
सच्ची प्रशंसा से, निखरता है कौशल-2
झूठी प्रशंसा से, होता नहीं है भला।
यह सत्य है----------
   प्रशंसा करो वीरता,कर्मठता व साहस की-2
   प्रशंसा स्वीकारो नहीं,जो होवे दिलजला।
   यह सत्य है-------------
"कुशराम" कहें प्रशंसा करो, कवियों कलमकारों की-2
जिनमें विविध आयामों में, लिखने की है कला।
यह सत्य है प्रशंसा से, बढ़ता है हौसला।
विरोधी की प्रशंसा से, घटता है फासला।।
🌷अधूरापन🌷
गर समाज में न हो अपनापन, छाया हो अकेलापन।
अपूर्ण रहे सामाजिक जीवन, तभी लगता अधूरापन।।
   संगिनी साथ छोड़ दे, साजन अपना मुंह मोड़ ले,-2
   रह जाता है अकेलापन, यही तो है अधूरापन।
   गर समाज में-----------
खुशहाल परिवार हो,वैभव की भरमार हो-2
संतति की किलकारी न हो, तो लगता है अधूरापन।
गर् समाज में------------
   पत्नी करे सोलह श्रंगार,पिया संग लुटाए प्यार,
   गर गोदी रहे सूनापन, तो लगता है अधूरापन।
   गर समाज  में------------
धरा में हरियाली आए, सावन में घटा छाए,
तभी याद आए बचपन,तो लगता है अधूरापन।
गर समाज में-----------
   संगदिल संग न हो,विरहणी में उमंग न हो,
   जब भी देखे दर्पन, तभी लगता अधूरापन।
   गर समाज में---------
"कुशराम"का यह कहना है, अब अकेले ही रहना है,
उम्र पार हुआ छप्पन, लगता है अधूरापन,
गर समाज में न हो अपनापन,छाया होअकेलापन,
अपूर्ण रहे सामाजिक जीवन,तभी लगता अधूरापन।।
रचनाकार-बी एस कुशराम बड़ी तुम्मी
     जिला अनूपपुर (मध्य प्रदेश)


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मंगलवार, जुलाई 07, 2020

कुछ भी असंभव नहीं: बी एस कुशराम


☀️कुछ भी असंभव नहीं☀️
मानव तन के लिए, कुछ भी असंभव नहीं,
जीत का जज्बा हो तो,कभी भी पराभव नहीं।
   निराशा भाव छोड़ ,श्रम सदा करते रहें,
   हतबल हाथों के लिए,कामयाबी संभव नहीं।
   मानव तन के लिए---------
कामयाबी कदम चूमे,बुद्धि और कौशल से,
हताश वही होता,जिसके पास अनुभव नहीं।
मानव तन के लिए---------
   श्रम सफलता की कुंजी,सद्बुद्धि से श्रम करें,
   असफल वही है जिसमें, बुद्धि का उद्भव नहीं।
   मानव तन के लिए---------
कुशराम कहें आलस्य छोड़, अपनावें सद्मार्गी जोश,
विफल वही है जिसके,सद्कार्य में सदाभव नहीं।
मानव तन के लिए,कुछ भी असंभव नहीं,
जीत का जज्बा हो तो,कभी भी पराभव नहीं।।
दिनांक07/07/2020
रचनाकार-बी एस कुशराम बड़ी तुम्मी
जिला अनूपपुर ( मध्य प्रदेश)
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शुक्रवार, जुलाई 03, 2020

डोली (कविता): बी एस कुशराम



👉डोली 👈
बाबुल के घर से एक डोली चली।
उस में बैठकर एक नवेली चली।।
   कंधे से उठाए हैं चार कहार,
   संग में बारातियों की टोली चली।
   बाबुल के घर से-------------
सजना से मिलने के सपने सजाए,
मासूम चेहरा एक भोली चली।।
बाबुल के घर से------------
   सोलह शृंगार किए बैठी है दुल्हन,
   गोटेदार चमकीली चोली सजी।
   बाबुल के घर से-----------
अल्हड़ अठखेलियां करती थी नैहर,
स्तब्ध भाव लेकर हमजोली चली।
बाबुल के घर से------------
   बाबुल का छुटा घर सखियों से बिछुड़ी,
   गमगीन दशा में छोड़ खोली चली।
   बाबुल के घर से-----------
कुशराम विदाई पल होती दुखदाई,
ऐसा लगे जिगर में गोली चली।
बाबुल के घर से एक डोली चली,
उस में बैठकर एक नवेली चली।
दिनांक- 03/07/ 2020
रचनाकार--बी०एस०कुशराम,
बड़ी तुम्मी जिला अनूपपुर (म०प्र०)
मो०-9669334330
       7828095047
     जिला अनूपपुर ( मध्य प्रदेश)
         सधन्यवाद
    ।
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गुरुवार, जुलाई 02, 2020

श्रृंगार (कविता): बी.एस. कुशराम

रचनाकार--बी०एस०कुशराम बड़ी तुम्मी
जिला अनूपपुर 
(मध्यप्रदेश)
विषय--श्रंगार
विधा--कविता
   🌲श्रंगार🌲
श्रृंगार है अलंकार है,बहार ही बहार है।
अठारह बरस की नवेली,अद्भुत की श्रृंगार है।।
   पांव महावर चक्षु में कजरा, होठों लाली बालों में गजरा,
   चपल चंचल चटकीले चक्षु,लागे जस कटार है।
   श्रृंगार है अलंकार है---------
मांग सिंदूर माथे बिंदिया,रातों की ये उड़ाए निंदिया,
छुनुर-छुनुरछनन-छनन, ये पायल की झंकार है।
श्रृंगार है अलंकार है--------
   कानों में कुंडल नाक में नथनी लगे सुहावन कटी करधनी
   भृकुटि की सजावट ऐसा, कि लागे द्वै तलवार है।
   श्रृंगार है अलंकार है--------
स्वेत दंत जब खिल खिलाए,दर्शकों के मन को भाए,
मधुर मधुर मुस्कुराहट,याद आता बार-बार है।
श्रृंगार है अलंकार है----------
   इसे मैं नाम दूं पिकबयनी, और कहूं मृगनयनी,
   स्नेहिल भाव युक्त,रचना रचा करतार है।
   श्रृंगार है अलंकार है---------
कुशराम फिदा संसार है,यह लाजवंती नार है,
सबसे बढ़कर लज्जा ही,नारी का श्रृंगार है।।
श्रृंगार है अलंकार है,बहार ही बहार है।
अठारह बरस की नवेली,अद्भुत की श्रृंगार है।।
दिनांक 02/07/2020
    बी०एस०कुशराम बड़ी तुम्मी
   जिला अनूपपुर (मध्य प्रदेश)
मो०-9669334330,7828095047

मंगलवार, जून 30, 2020

कुदरत का करिश्मा: बी एस कुशराम


रचनाकार--- बी एस कुशराम बड़ी तुम्मी
शहर--- अनूपपुर (मध्य प्रदेश)
दिनांक--- 30 जून 2020
दिन--- मंगलवार
विषय--- कुदरत का करिश्मा
विधा--- कविता
     🙏 कुदरत का करिश्मा🙏
वरदान है मानव के लिए,देखो करिश्मा कुदरत का।
अभिशाप भी है जग के लिए,ये तो करिश्मा कुदरत का।।
   अस्तित्व को बचाए रखें, वरदान साबित होगा,
   गर करोगे छेड़छाड़,अभिशाप होगा कुदरत का।
   वरदान है मानव के लिए----------

पूजा करें कुदरत का, यश गान करें शोहरत का,
फल मिलेगा पक्ष में, मौका न होगा शिकायत का।
वरदान है मानव के लिए-----------
   हम ऐसा करें उपक्रम, पर्यावरण सुधारें हम,
   समाज देश उन्नत करें, विकास हो भारत का।
   वरदान है मानव के लिए---------
प्रकृति से न करें खिलवाड़, प्रगति का लगाके आड़,
   
   असर विपरीत पड़ेगा, एहसान मानो कुदरत का।
   अभिशाप भी है जग लिए----------
    बिन मांगे सब कुछ देता, हमसे कुछ भी नहीं लेता,
   संरक्षण व संवर्धन करें, सम्मान करें कुदरत का।
   वरदान है मानव के लिए-----------
कुशराम का है ये कथन, वृक्ष लगाएं सभी जन,
कुदरत ही से जीवन है, समझो करिश्मा कुदरत का।
वरदान है मानव के लिए,देखो करिश्मा कुदरत का।।
अभिशाप भी है जग के लिए, ये तो करिश्मा कुदरत का।।
            सधन्यवाद
बी. एस. कुशराम बड़ी तुम्मी,
जिला अनूपपुर (मध्यम प्रदेश)

गुरुवार, जून 25, 2020

तकदीर की लिखावट: बी एस कुशराम


तकदीर की लिखावट
ये कहा जाता है कि, विधि लिखता तकदीर।
जो वह मस्तक लिख दिया, वही अटल तहरीर॥
   कोई रहे सुख चैन से, मिले किसी को पीर।
   कोई ठहाका हंस रहे, किसी के लुट रहे है चीर॥
खाने के लाले किसी को, कोई बन रहे अमीर।
कोई तो कृष गात रहे, कोई पुष्ट    शरीर॥
   किसी को प्रिय रांझा मिले, मिले किसी को  हीर।
   किसी को रोटी ना मिले,किसी को हलवा खीर॥
कोई डुबक डुबक मरे,किसी को मिल गया तीर।
किसी को पीने जल नहीं, कोई बहाए नीर॥
   कोई रंक के रंक रहे, कोई रंक से   वजीर।
   किसी की रहे बादशाहत, बन रहे कोई फकीर॥  
    कोई जुल्मी स्वच्छंद घूमे, कोई बंधे जंजीर।
    कोई निठल्ला खुश रहे,आफत में श्रमवीर॥
    विधि-विधान बनायके, वह लिखता तकदीर।
   जिसके हक में जो मिला, यही तो है तकदीर॥
समय चक्र यह घूमता, तनिक तो रखिए धीर।
लाचारी का भाव छोड़,बनके रहें गंभीर॥
   इसीलिए कुशराम कहें, स्वयं गढ़े तकदीर।
   सुचारु श्रम करते रहें, बदलेगा  तकदीर॥
                सधन्यवाद

©बी एस कुशराम, बड़ी तुम्मी, पुष्पराजगढ़ जिला अनूपपुर 
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बुधवार, जून 24, 2020

वीरांगना महारानी दुर्गावती:बी एस कुशराम


24जून को वीरांगना महारानी दुर्गावती की बलिदान दिवस है। इस अवसर पर उनकी श्रद्धांजलि में प्रस्तुत है यह रचना:-
वीरांगना महारानी दुर्गावती
दुर्गावती महारानी,वो खूब लड़ी मर्दानी॥
दुश्मन को हुई  हैरानी,वो खूब लड़ी मर्दानी॥
गढ़ महुबे की राजकुमारी।
साक्षात दुर्गा अवतारी॥
धनुष बाण और खड्ग कटारी।
शोभा देता हाथी सवारी॥
दलपत शाह की रानी,वो खूब लड़ी मर्दानी॥
   गढ़ मंडला के वैभव पन से।
   देख पड़ोसी जलते मन से॥
   बाज बहादुर किया आक्रमण।
   एक नहीं त्रय बार किया रण॥
हार के हुआ पानी पानी, वो खूब लड़ी मर्दानी॥
   दुर्गा को जब अकबर जाना।
   राज हड़पना मन में ठाना॥
   आसफ खां को भेजा मंडला।
   कहा-वहां पर कर दो हमला॥
उसे भी हरा दी रानी,वो खूब लड़ी मर्दानी॥
   दुबारा आसफ लड़ने आया।
   रानी फिर भी उसे हराया॥
   तीसरी बार धोखे से मारा।
   रानी को लगा बाण करारा॥
मूर्छित हो गई रानी,वो खूब लड़ी मर्दानी॥
  
 मूर्छा टूटी ठाकुर से बोली।

   उठने वाली है अंतिम डोली॥
   छूने न दूंगी रिपु को काया।
   खुद कटार ले छाती में धंसाया॥
कुशराम की है जुबानी,वो शहीद हो गई रानी।
दुश्मन को हुई  हैरानी,वो खूब लड़ी मर्दानी॥
Ⓒबी एस कुशराम बड़ी तुम्मी, मध्यप्रदेश
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