सोमवार, जनवरी 25, 2021

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या (कविता) : बी एस कुशराम








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1 टिप्पणी:

Ram Sahodar Patel ने कहा…

अति सुन्दर सरल एवं मार्मिक

॥ दगाबाजों से सावधान ॥ चौपाई जब बारी ही फसल उजारे। कर दीजै तब उसे किनारे॥ विश्वासघात अंगरखा हो...