शनिवार, अक्टूबर 31, 2020

दादा वल्लभ की सांसें वतन के लिये: राम सहोदर पटेल



       
                                                                                                                                            

:दादा वल्लभ की सांसें वतन के लिये:
दादा वल्लभ की सांस थी वतन के लिये,
उनकी हर आस थी इस वतन के लिये।
जिन्दगी की कभी भी न परवाह की,
पग बढ़ाया हमेशा वतन के लिये।।

कभी अन्याय सहना न सीखा था वह,
दया करुणा की समझो तो सागर था वह,
दीन-हीनों का समझो पुजारी था वह 
उनका सपना भी होता वतन के लिये।।

धूर्त दुष्टों का अन्याय सहकर के भी,
आंग्ल क्रूरों के कोड़ों से छिल करके भी, 
बन्दी खाने में भूखा ही रहकर के भी,
उनकी हर चाह होती वतन के लिये।।

पड़ा दुर्भिक्ष बेहाल जनता हुई,
भूखे प्यासे भरें टैक्स दुगुनी हुई,
तब कुशासन विरोधी कृषक सेना ले,
किया बारडोली क्रान्ति वतन के लिये।।

जान लेकर हथेली में निर्भय लड़े, 
देश दुश्मन के कानून थे सिर चढ़े, 
झुका अंग्रेज़ी नीति को सरदार बन, 
पदवी एमपी को छोड़ा वतन के लिए ॥

देशी सारे रियासत को सम्मिलित किया,
सार्वभौमिक बना देश अखण्डित किया,
रहे लोहा सा दृढ़ लौहपुरुष थे बने,
खुद समर्पित रहे हैं वतन के लिये।।

हाथ उनके हजारों उठे साथ में, 
कार्य उनके हजारों करें साथ में, 
सबसे रखते सहोदर सरल भावना,
सबल संगठन बनाया वतन के लिये।।
पग बढ़ाया  हमेशा वतन के लिये।।
रचनाकार: राम सहोदर पटेल, सहा. शिक्षक 
शासकीय हाईस्कूल नगनौड़ी, निवास ग्राम- सनौसी थाना- ब्योहारी जिला- शहडोल (मध्यप्रदेश)
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लौह पुरुष की ऐसी छवि:अनिल पटेल


लौह पुरुष की ऐसी छवि,       
न देखि न सोची कभी।    
आवाज मे सिंह सी दहाड़ थी,
हृदय मे कोमलता की पुकार थी।।    
एकता का स्वरूप जो इसने रचा,  
देश का मानचित्र पल भर मे बदला।।      
गरीवो का सरदार था वो,
दुश्मनो के लिए लोहा था वो।  
आंधी की तरह वहता गया, 
ज्वालामुखी सा धधकता गया।
बनकर गांधी का अहिंसा का शस्त्र, 
महकता गया विश्व मे कोई ब्रम्हास्त्र।
इतिहास  के गलियारे खोजते है जिसे,
ऐसे सरदार पटेल अब न मिलते पूरे विश्व मे।।      
खंड खंड  को जोड़ जिसने,    
अखंड राष्ट्र का सृजन किया।
उन शिल्पी वल्लभ को सबने, 
लौह पुरुष कह नमन किया।। 
खेड़ा से राण  मे  रखे कदम,
भर हुंकार बारदौली मे बोले।
न दे लगान कि रत्ती हम,   
वाणी मे थी सिंह गर्जना।    
पांच सौ  पैसठ रजवाड़ो को,
कूटनीति से विलय किया।।
रचना:अनिल पटेल,
ग्राम-पोस्ट नगनौड़ी, तहसील-जयसिंहनग
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राष्ट्रीय एकता से सामाजिक एकता की ओर: जनार्दन

राष्ट्रीय एकता से सामाजिक एकता की ओर: जनार्दन 

 


आज हम सबने भारत वर्ष की राष्ट्रीय एकता के सूत्रधार सरदार वल्लभ भाई पटेल साहब का 145 वां जन्मदिन राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया । दोस्तोंजब हम लोग  एकता शब्द उच्चारित करते हैं तो मन में शक्ति का भाव ज्यादा उभरता है, किन्तु एकता शब्द  का  अर्थ   ( एक + ता = एक जैसा अर्थात  समानता) वाला भाव कितना जागता है, आप खुद से पूंछ लें।

 

साल दर साल हम सरदार पटेल एवम् अन्य महापुरुषों के द्वारा किए गए कार्यों को याद करते हैं और अच्छा महसूस करते हैं, फिर अपने जीवन यापन, अपने व्यवसाय एवं कार्य व्यवहार में लग जाते हैं। हमारा पूरा ध्यान इस बात में रहता है कि हम महापुरुषों के कार्यों के विषय में कितनी सटीकता से जानकारी रखते हैं, आपको क्या लगता है, किए गए कार्यों की चर्चा / उल्लेख से  देश(समाज) का उत्थान होगा? मुझे लगता है कि देश ( समाज) की बेहतरी तब होगी, जब चर्चा उन कार्यों की हो, जो अधूरे रह गए, जिन कार्यों को पूरा करने से पहले ही महापुरुष का भौतिक जीवन पूरा हो गया है।

 

सरदार पटेल साहब को राष्ट्रीय एकता का शिल्पी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने 562 रियासतों को भारतीय गणराज्य में मिलायालेकिन राजनीतिक आज़ादी के 73 वर्ष बाद भी सामाजिक एकता अर्थात सामाजिक समानता स्थापित नहीं हुई । बहुत खुशी होती यदि देश सामाजिक समानता की ओर बढ़ता हुआ दिखता, किन्तु अफसोस! ऐसा नहीं जान पड़ता। कभी-कभी ऐसा लगता है कि सुख समृद्धि की मृग मरीचिका के पीछे दौड़ते-दौड़ते, संविधान की प्रस्तावना में चिन्हित उद्देश्यों को हम भूलते जा रहे हैं। वैभव के लिए तड़पते नीति निर्धारकों को याद दिला दूं :  एक देश(समाज) के लिए गरीबी से ज्यादा दुखदाई है - असामनता की खाई।

 

आइए हम सब मिलकर उन कार्यों की चर्चा करें, जो काम सरदार साहब के जीवन में पूरे नहीं हुए, सरदार पटेल ने देश की रियासतों को मिलाकर एक विशाल राष्ट्र बनाया; हम सब देशवासी अनेक जाति - धर्म रूपी रियासतों को मिटाते हुए, सामाजिक समानता स्थापित करके इसे एक श्रेष्ठ राष्ट्र बनाएं।

 

सामाजिक समानता  एवं समान अवसर वाले श्रेष्ठ राष्ट्र की स्थापना के लिए संकल्पित - सरदार पटेल के द्वारा एकीकृत विशाल  देश का एक कृतज्ञ नागरिक-

 

जनार्दन पटेल, 31 अक्टूबर 2020

नवी मुंबई।

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सरदार वल्लभ भाई पटेल(आलेख): भानू पटेल



भारतरत्न लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल 


पूरा नाम- वल्लभ भाई झावेरभाई पटेल
जन्म- 31 अक्टूबर 1875 नडियाद (बंबई पेंसीडेंसी)
मृत्यु- 15 दिसम्बर 1950 (मुम्बई)
पत्नी- झाबेरवा पटेल
सरदार पटेल के नाम से लोकप्रिय
भारत के उपप्रधानमंत्री प्रथम (15 अगस्त 1947 से 15 दिसम्बर 1950)
सरदार पटेल जी का जन्म नडियाद,गुजरात में एक लेबा पटेल (पाटीदार) जाति में हुआ था। आपके पिता का नाम झाबेरभाई एवं आपकी माता का नाम लाडवा देवी था। आप अपने माता-पिता की चैथी संतान थे। आपके तीन बड़े भाई सोमाभाई, नरसीभाई औ बिट्ठलभाई थे। आपकी शिक्षा मुख्यतः स्वाध्याय से हुई। आप लन्दन जाकर बैरिस्टर की पढ़ाई की और वापस आकर अहमदाबाद में वकालत की।


महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर आप स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लिए।
स्वतंत्रता आंदोलन में सरदार पटेल का सबसे पहला और बड़ा योगदान 1918 में खेड़ा संघर्ष में  हुआ। गुजरात का खेड़ा खण्ड उस समय सूखा की चपेट में था। तब किसानों ने अंगेजों से कर में छूट की मांग की। जब यह स्वीकार नहीं किया गया तब सरदार पटेल ने किसानों का नेतृत्व कर अंग्रेज सरकार को झुकने पर मजबूर किया।
बारडोली सत्याग्रह भारतीय स्वाधीनता संग्राम के दौरान 1928 में गुजरात में किसानों के लगान में 30 प्रतिशत की वृद्धि कर दी गई। तब पटेल ने इसका जमकर विरोध किया। सरकार ने इस सत्याग्रह आंदोलन को कुचलने का प्रयास किया और कठोर कदम उठाए लेकिन अंततःविवश होकर किसानों की मांगों को मानना पड़ा और लगान को 22 प्रतिशत कम कर 6.03 कर दिया।
इस सत्याग्रह आंदोलन में सफल होने के कारण वहाँ की महिलाओं ने बल्लभ भाई पटेल को ‘सरदार’ की उपाधि प्रदान की। जिस कारण से भारत एवं अन्य जगहों पर उन्हें अक्सर हिंदी, उर्दू और फाारसी में ‘सरदार’ कहा जाता था जिसका अर्थ है ‘प्रमुख’।
किसान संघर्ष एवं राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम के अंतर्संंबंधों की व्याख्या बारडोली किसान संघर्ष के संदर्भ में करते हुए गांधी जी ने कहा कि इस तरह का हर संघर्ष, हर कोशिश हमें स्वराज के करीब पहुंचा रही है और हम सबको स्वराज की मंजिल तक पहुंचाने में ये संघर्ष सीधे स्वराज के लिए संघर्ष से कहीं ज्यादा सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
यद्यपि अधिकांश प्रान्तीय कांग्रेस समितियाॅं पटेल के पक्ष में थीं लेकिन गांधीजी की इच्छा का आदर करते हुए प्रधानमंत्री पद की दौड़ से अपने को दूर रखा और नेहरू का समर्थन किया। और उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री का कार्य सौंपा गया। किन्तु इसके बाद नेहरू जी से संबंध तनावपूर्ण ही रहे। इसके चलते कई बार पद त्याग करने की धमकी भी दे दी।
गृहमंत्री के रूप में पहली प्राथमिकता थी  देशी रियासतों को भारत में मिलाना। इसको उन्होंने बिना खून बहाए पूरा किया। स्वतंत्रता के समय 562 देशी रियासतें थीं। इनका क्षेत्रफल भारत का 40 प्रतिशत था। आजादी के बाद ही वीपी मेनन के साथ मिलकर देशी रियासतों को भारत में मिलाने का वीणा उठाया और जम्मू और कश्मीर को छोड़कर  सभी को भारत में विलय कर दिया गया। नेहरू के कश्मीर को यह कहकर अपने पास रख लिया कि यह समस्या अंतरराष्ट्रीय है और संयुक्त राष्ट्र संघ में ले गये और अलगाववादी ताकतों के कारण कश्मीर की समस्या बनी रह गयी।
एक भारतीय अधिवक्ता और राजनेता होेने  के साथ-साथ भारतीय गणराज्य के संस्थापक पिता थे। भारत के एकीकरण में महान योगदान के लिए उन्हें भारत का लौहपुरुष के रूप में जाना जाता है।
सन् 1991 में मरणोपरांत उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारतरत्न’ से सम्मानित किया गया।
उनकी याद में भारत सरकार ने गुजरात के नर्मदा तट पर सरदार सरदार पटेल जी की एक विशाल मूर्ति स्थापित करने का निर्णय लिया । यह स्मारक लौह से निर्मित मूर्ति है। इस स्मारक का नाम ‘एकता की मूर्ति’ या स्टेच्यू ऑफ़ यूनिटी’ रखा गया। प्रस्तावित प्रतिमा को एक छोटे चट्टानी द्वीप ‘साधू बेत’ पर स्थापित किया गया जो केवड़िया में सरदार सरोवर बांध के सामने नर्मदा नदी के बीच स्थित है। इसे 31 अक्टूबर 2018 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने राष्ट्र को समर्पित किया है।
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आलेख प्रस्तुति:  भानू पटेल, प्राथमिक शिक्षक एवं ब्लाक अध्यक्ष, आजाद अध्यापक शिक्षक संघ ब्लाक ब्योहारी जिला शहडोल निवासग्राम- आमडीह, थाना-ब्योहारी, तहसील-जयसिंहनगर जिला-शहडोल (मध्यप्रदेश)
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भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल (कविता): मनोज कुमार चंद्रवंशी

भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल
                          (कविता)

            सरदार   जी   का  जीवन  दर्शन,
            हम  सबके  लिए अनुकरणीय है।
            कर्मयोगी लौह पुरुष का योगदान,
            सियासत की धरा में अतुलनीय है॥
सरदार   पटेल    युग  प्रवर्तक  के   सच्चे  अवतारी थे।
दूर दृष्टा,   देशभक्त   मातृभूमि   के   परम   पूजारी थे॥

            प्रतिभा  के बहुमुखी  सरदार पटेल,
            बारडोली सत्याग्रह  में  आगे आए।
            महिलाएं   पटेल  को  उपनाम दिये,
           भारत में पटेल"लौह पुरुष"कहलाए॥
मन, वचन, कर्म से  भारतीय  संस्कृति  के संवाहक थे।
सरदार  अटल, निर्भीक  वर्ग विरोध  के  जननायक थे॥

           न्याय  प्रिय,   यथार्थवादी  पटेल,
           युग  दृष्टा,   साहित्य  साधक  थे।
           दीन- हीन वर्गों के मसीहा  पटेल,
           निज  मातृभूमि  के  आराधक थे॥
पटेलअनुशासन प्रिय,त्वरित निर्णय लेने की क्षमता था।
राज्य  एकीकरण  के अग्रदूत के हृदय में मानवता था॥

          राजनीति    एकता   के  सूत्रधार,
          संगठन शक्ति को  मजबूत किए।
          परतंत्रता की आंधी को रोक कर,
          "लौह पुरुष" होने का सबूत  दिए॥
सेवाभावी  पटेल "बिस्मार्क" के  नाम  से  प्रसिद्ध  हुए।
तन, मन से सियासत  एकीकरण यज्ञ को सिद्ध  किए॥

          अखंड भारत के स्वर्णिम सपनों को,
          सरदार   पटेल   जी  साकार  किये।
          प्रथम गृह मंत्री के पद में सुशोभित,
          राष्ट्रीय  एकता  को  मजबूत  किए॥
कर्मनिष्ट, मितभाषी, मृदुभाषी  जन-जन के  नायक थे।
प्रतिभावान, विराट व्यक्तित्व पटेल सब  के लायक थे॥

                         ✍रचना
                 (स्वरचित एवं मौलिक)
                 मनोज कुमार चंद्रवंशी
        बेलगवाँ जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश

॥ दगाबाजों से सावधान ॥ चौपाई जब बारी ही फसल उजारे। कर दीजै तब उसे किनारे॥ विश्वासघात अंगरखा होई। त...