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॥ दगाबाजों से सावधान ॥ चौपाई जब बारी ही फसल उजारे। कर दीजै तब उसे किनारे॥ विश्वासघात अंगरखा होई। त...
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बचपन की बहार : रिश्तेदारों का प्यार बात जुलाई 1985 की है , जब खेलते खेलते प्राथमिक पाठशाला कराहिया ( रीवा जिले के ग्राम बारौ का ए...
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यादें कुछ तो है बीते हुए कल में, बसी है यादें हर एक पल में। देकर नाम पुराने दिन का, जीता हूं मैं उसी हलचल म...
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दो कविताएं 1. पाखण्ड भारत में पाखंड का बाज़ार है, सदियों से चल रहा व्यापार है। देवी-देवताओं की गणना हज़ार है, बारी-बारी से ये पा रहे सत्का...
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जब मनुष्यता भूल जाती है एक मनुष्य है — जिसे बार-बार बताना पड़ता है, क्या अर्थ होता है मनुष्य होने का। शिक्षक समझाते...
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बड़का बाँध: सुरेन्द्र कुमार पटेल श्यामू फफक-फफक रो रहा है। उसे सारा संसार असार मालूम पड़ता है। छाती में असह्य शूल उठता है। एक हाथ ...
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होलिकोत्सव (होला का त्यौहार) मन का भावन फाग आया , होलिका धू-धू जली। है बुराई...
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प्रेम — राम सहोदर पटेल प्रेम — श्री राम सहोदर पटेल दोहा प्रेम बनाए काम सब, प्रेमहि सुख आधार । ...
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ऐसा भ्रम तुम नहीं पालो सुरेन्द्र कुमार पटेल आया था जो वो पल , वो पल तुम सम्हालो आएगा फिर से वो पल ऐसा भ्रम तुम नहीं पालो ...
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आप मुझे नहीं जानते अगर कोई किसी को नहीं जानता तो इसमें किसका दोष है?उसका जो नहीं जानता या जिसे नहीं जाना जा रहा ?" असल में ...
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