सोमवार, सितंबर 28, 2020

थैंक्यू टीचर: राम सहोदर



Thank You Teacher

“थैंक्यू टीचर”

तुम्हारे नाम की पूजा, मैं हरदम दिल से करता हूँ।

दिया जो ज्ञान का रोशन, सो थैंक्यू तेरा करता हूँ॥

है शिक्षक शिक्षा देने की कृपा मुझ पर दिखाई जो।

इसी से जीना जीवन की कला में, जान भरता हूँ॥

मैं थैंक्यू- थैंक्यू करता हूँ, सदा धन्यवाद करता हूँ।

दिया भण्डार बुद्धि का, सो साधूवाद करता हूँ॥

अँधेरे अंध ख्वाबो के अनैतिक अंध नीती से।

जगाया ज्योति दर्शन दे, वही एहसान करता हूँ॥

करूं धन्यवाद मैं तेरा या साधुवाद जी भरकर।

संवारा साज-सुख साहस सरस सब भोग करता हूँ॥

जनम जननी जगत में दे, जिताई जंग सारा है।

सकल जीवन सुधारा, जान डाला तेरा हे श्वास भरता हूँ॥

कृपा की दृष्टि यदि, तुम्हारी न होती  तो विकल रहता।

पड़ा शोषक के शोषण में सताया जाता रहता हूँ॥

मैं थैंक्यू कहता हूँ शिक्षक शिखर की सीख दीन्ही है।

जो खाते ठोकर शिक्षा बिना उन्हें याद करता हूँ॥

अकल के उल्लू बन बैठे, शरण शिक्षक न पाया जो।

बिताते पशु सा जीवन हैं उन्हें भी याद करता हूँ॥

तिमिर अज्ञान से निकला, ज्योतिर का राह दीन्हा जो।

इसी एहसान के बदले ह्रदय से थैंक्स करता हूँ॥

न होता साया यदि गौरव गुरुगण ज्ञान गुणपति का।

न जग का भान फिर होता यही मैं याद करता हूँ॥

तुम्हें हरदम सुमिरता हूँ, तुम्हे धन्यवाद करता हूँ।

हैं टीचर-टीच से तेरे दिकाऊ टिम-टिमाता हूँ॥

सहोदर सीख शिक्षण से शिखर श्रंगार जीवन का।

अनुग्रह हो सदा शिश  पर, यही फरियाद करता हूँ॥

रचनाकार: राम सहोदर पटेल, शिक्षक

शासकीय हाईस्कूल नगनौड़ी

निवास ग्राम-सनौसी, तहसील-जयसिंहनगर, जिला-शहडोल(म.प्र.)

 

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शुक्रवार, सितंबर 18, 2020

मैं एक नारी हूँ: राम सहोदर


मैं एक नारी हूँ

मैं एक नारी हूँ, हाँ मैं नारी हूँ।
मैं ही जगत की अवतारी हूँ।
मैं अनेक रूप धारी हूँ। 
मैं ही माँ, मैं ही बहन, 
मैं ही बेटी बन जाती ससुरारी हूँ।
मैं ही भैया की कलाई को सजाती, 
बनती रक्षा, प्रेम पुजारी हूँ।
मैं ही माता- पिता की राजदुलारी हूँ ।
मैं सास-ससुर की वंश बढाने वाली,
पति के जीवन बगिया की फुलवारी हूँ।
बेटों को जनने वाली महतारी हूँ।
मैं नारी हूँ, हाँ मैं एक नारी हूँ।।

मैं मन बहलाने वाली जीजा की सारी हूँ।
गृहणी बन कुटुंब चलाती नारी हूँ ।
कभी न हारने वाली नारी हूँ।
मैं ही दुर्गा, मैं ही चंडी 
मैं ही शारदा छविधारी हूँ। 
मैं ही लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई 
पद्मा  राज कुमारी हूँ।
मैं ही सीता, मैं ही सावित्री 
मैं ही राधा प्यारी हूँ। 
मैं ही देवकी, मैं ही यशोदा आँख में पट्टी बंधी गंधारी हूँ।
मैं ही शबरी, मैं ही मीरा 
मैं ही द्रोपदी लाचारी हूँ।
मैं कुसुम हूँ, मैं हूँ काटा
मैं ही पुरुष के आधे की अधिकारी हूँ।
सुख-दुःख सब सहने वाली
प्रसव वेदना सहने वाली, 
दुष्टों के दुष्टदृष्टि से दहने वाली, 
अत्याचार पुरुष का सहने वाली,
बसुधा सी धैर्यधारी हूँ।
हाँ मैं एक नारी हूँ।।

किन्तु नहीं अनजान कभी मैं, 
बेबशी की सहती मार कभी मैं.
हूँ पुरुष बिना अधूरी मैं, 
मुझ बिन पुरुष अधूरा है,
पुरुष की सहगामी नारी हूँ।
मैं नारी हूँ, जीवन की अधिकारी हूँ ।
पुरुष मुझे है प्यारा, मैं भी उसको प्यारी हू।।
रचना: राम सहोदर पटेल, शिक्षक
शासकीय हाईस्कूल, नगनौड़ी, तहसील-जयसिंहनगर जिला शहडोल (मध्यप्रदेश) 
निवास ग्राम-सनौसी, थाना-ब्योहारी जिला शहडोल(मध्यप्रदेश)
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स्त्री (नारी) दोहे: राम सहोदर


स्त्री (नारी) दोहे

नारी तू अर्धांगनी कई तुम्हारा रूप।
माँ, बेटी है बहन तू, ममता का प्रतिरूप।।
बहू बने ससुराल की, बेटी बन पितु-मात।
पत्नी बन पतिदेव की, सेवत है दिनरात।।
सुत जन्मा जननी बनी, सहे प्रसव आघात।
दुःख-सुख सह संतान को, पाले ताम्बुल पात।। 
सदन दोउ रोशन करे, मैका- ससुरा गेह। 
सास-ससुर, माता- पिता करे सभी से नेह।। 
घर में है गृह लक्ष्मी, रन में चंडी जान। 
भक्ति में मीरा बनी, पतिब्रत सीता मान।।
नारी प्रेम खदान है, देवी के समरूप।
प्रेममयी घर को रखे, करे स्वर्ग  अनुरूप।
करो मान सम्मान यदि, जीवन सुखमय देत। 
अगर किया अपमान तो जीवन को हर लेत।। 
अक्षम इसे समझने की, कीन्ही यदि यूं भूल।
फिर तो तू मिट जाएगा, रावण के अनुकूल।। 
नारी यदि खुश हो गयी, देव सभी खुश होय। 
स्वर्ग सा सुन्दर घर बसे, दूर विपत्ति सब होय।। 
किसी क्षेत्र में कम नहीं, इनकी गणना होय।
पुरुषों से आगे सदा, क्षमता साहस दोय।।
इनके बिन संसार में, होवे न कोई काम। 
पुरुष न हो नारी बिना, न जग न कोइ धाम।। 
सकल चराचर की जननि , मादा से नर होय। 
कहत सहोदर सुन सखा, पूजनीय यह होय।।
रचना: राम सहोदर पटेल, शिक्षक
शासकीय हाईस्कूल, नगनौड़ी, तहसील-जयसिंहनगर जिला शहडोल (मध्यप्रदेश) 
निवास ग्राम-सनौसी, थाना-ब्योहारी जिला शहडोल(मध्यप्रदेश)
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सोमवार, सितंबर 14, 2020

राष्ट्रभाषा हिन्दी: देवीदीन चंद्रवंशी

राष्ट्र भाषा हिन्दी 

विद्या धन अर्जित कर, 
पण्डित हुए विख्यात। 
निज भाषा ज्ञान बिन, 
कोई न माने बात।। 
अंग्रेजी पढ़ कर भी, 
नहीं मिला सम्मान। 
बिन निज भाषा के, 
हुआ बड़ा अपमान।। 
कला और शिक्षा के क्षेत्र में, 
मिला ज्ञान विविध प्रकार। 
सम्पूर्ण विश्व में करे, 
निज भाषा की प्रचार।। 
न रंग चाहिए न रूप, 
बना नया प्रारूप।
प्रथम ठौर निज भाषा की, 
मानो इसे सम रूप।। 
ले संकल्प मिलकर सब, 
यही हमारा आशा है। 
करो सम्मान हिन्दी की, 
जन -जन की ये भाषा है।। 

                    घोषणा पत्र 
मै घोषणा करता हूँ कि देबीदीन चन्द़वँशी मेरा यह रचना मौलिक, अप्रकाशित एवंअप्रसारित है। किसी को परेशानी आती है तो रचनाकार स्वयं जिम्मेदार होगा। 

                  उद्देश्य 
भारत की राष्ट्र भाषा हिन्दी है। किसी दूसरे भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए और हिन्दी भाषा का सम्मान कर उसके आन, बान, सम्मान किसी प्रकार के ठेस नहीं पहुँचना चाहिए। हम संकल्प के साथ हिन्दी भाषा का प्रचार प्रसार करे।
हिन्दी दिवस के शुभ अवसर पर सादर समर्पित 
                      स्वरचित कविता 
                    देबीदीन चन्द़वँशी 
                     ग्राम-बेलगवाँ 
                   तह0  पुष्पराजगढ़ 
                     जिला - अनूपपुर 
                            म0  प्र0
                   मो0  8819059964
                    अतिथि शिक्षक 

राष्ट्रभाषा हिंदी -डी .ए.प्रकाश

🌷राष्ट्रभाषा हिंदी 🌷

राष्ट्र प्रगति की भाषा हिंदी,
जन-जन को है भाया |
राष्ट्रीय भाषा बनाने हिंदी,
जब संविधान सभा में आया ||

चौदह सितम्बर दिन था प्यारा,
सन उन्नीस सौ उनचास रहा |
गोपाल स्वामी ने दिया विचार,
हिंदी राजभाषा यह शंकर राव कहा ||

भाषाओं के कारण ही तो,
राज्यों का नव निर्माण हुआ |
राजभाषा आयोग बना तब,
हिंदी का गुणगान हुआ ||

काश्मीर से केरल तक,
जन प्रिय भाषा है हिंदी |
उषा से रजनी तक सब,
प्रिय जन बोलें हिंदी ||

पंत निराला और दिनकर का,
पावन हिंदी भाषा है |
कबीर तुलसी और सूर का,
हिंदी ज्ञान जिज्ञासा है ||

शिक्षा का स्तम्भ है हिंदी,
जन-मन को पावन करती है |
रस छंद अलंकार विभूषित,
हिंदी कविता रहती है ||

नौ राज्यों की मातृभाषा है,
हिंदी हृदय लगाते है |
अजर अमर हो हिंदी भाषा,
आज हिंदी दिवस मनाते हैं ||

✍🏼डी.ए.प्रकाश खाण्डे, अनूपपुर मध्यप्रदेश

॥ दगाबाजों से सावधान ॥ चौपाई जब बारी ही फसल उजारे। कर दीजै तब उसे किनारे॥ विश्वासघात अंगरखा होई। त...