मेरे दिल में छुपी है एक बात सतीश कुमार मेरे दिल में छुपी है एक बात, जो मैं ना कह पाया दिन रात कि मां मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं। मुझे सुलाने, मुझे खिलाने जो जगती थी सारी रात, उससे मैं न कह पाया यह बात। कि मां मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं। तुमने की मेरी हर जिद पूरी, रखकर अपनी ख्वाहिश अधूरी। चलती थी तुम मेरे साथ, पर मैं न कह पाया यह बात। कि मां मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं।.... जब भी थी जरूरत तुम्हारी, तुम खड़ी थी मेरे साथ। चाहे हो दिन का उजाला या हो आधी रात, पर मैं ना कह पाया यह बात। कि मां मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं।.... मुझ को सही राह दिखाने जब भी उठाया है तुमने हाथ, घर कर गई है दिल में यह बात। ऐसा लगा जैसे मै पा लूंगा सारी कायनात, पर मैं ना कह पाया है बात। कि मां मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं।.......... मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं।... शब्द ए हकीकत सतीश कुमार यही रूप है, यही रंग है यही वेश है, यही है मेरा ढंग। करना है तो इसे पसंद क...
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